संगीत शिक्षक भर्ती में राहत, प्रयाग संगीत समिति डिग्री वाले चॉइस फिलिंग में शामिल
समझें क्या है पूरा मामला
- हाई कोर्ट ने प्रयाग संगीत समिति की डिग्री वाले 10 याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों को राहत दी है।
- कोर्ट ने विभाग को अभ्यर्थियों को चॉइस फिलिंग प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
- दस्तावेज सत्यापन के दौरान DPI ने UGC संबद्धता न होने का हवाला देकर अपात्र किया था।
- कोर्ट को नियम पुस्तिका और सरकारी गजट में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं मिली।
- नियुक्ति फिलहाल कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी, पोस्टिंग आदेश अभी जारी नहीं होंगे।
मध्य प्रदेश में चल रही माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2024-25 में संगीत शिक्षक पद के कई अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा था। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया है। इन अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करते हुए मेरिट सूची में स्थान बनाया था।
इसके बावजूद DPI (लोक शिक्षण संचालनालय) ने प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद की डिग्री और डिप्लोमा पर सवाल उठाते हुए उनकी पात्रता मानने से इनकार कर दिया। इससे 150 से ज्यादा अभ्यर्थियों का भविष्य अटक गया था।
कैसे रोकी गई थी पात्रता
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय विभाग ने कहा कि प्रयाग संगीत समिति की डिग्री या डिप्लोमा यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है। इसी वजह से ऐसे अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। इस फैसले के बाद कई सालों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का शिक्षक बनने का सपना टूटता दिखा और उन्होंने कोर्ट जाने का रास्ता चुना था।
हाई कोर्ट में नियमों और गजट का हुआ परीक्षण
जबलपुर हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लगाई गई शर्त का कोई वैधानिक आधार नहीं है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने भर्ती नियमों, विभागीय रूल बुक और मध्य प्रदेश शासन के गजट का अवलोकन किया।
प्रारंभिक परीक्षण में कोर्ट को कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं मिला, जिसमें संगीत शिक्षक पद के लिए प्रयाग संगीत समिति की डिग्री को अमान्य बताया गया हो। साथ ही, UGC संबद्धता को अनिवार्य शर्त के रूप में निर्धारित किया गया हो।
प्रथम दृष्टया राहत देते हुए कोर्ट ने क्या आदेश
अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान की दलीलों से संतुष्ट होकर और मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में शुरुआती राहत दी है। कोर्ट ने विभाग को कहा कि इन याचिकाकर्ताओं को अपात्र सूची से हटाकर पात्र माना जाए और उन्हें चॉइस फिलिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
साथ ही साफ किया कि इन्हें भर्ती के अगले चरणों से बाहर नहीं रखा जा सकता है। इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों के लिए भर्ती का रास्ता फिर से खुल गया है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
सुनवाई के बाद अभ्यर्थियों के वकील दिनेश सिंह चौहान ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती नियमों में जो शर्तें लिखी ही नहीं हैं, उन्हें बाद में लागू करना सही नहीं है और इससे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ता है।
उनका यह भी कहना था कि कई बार अधिकारी नियमों से हटकर अतिरिक्त दस्तावेज और शर्तें मांग लेते हैं। इस कारण योग्य उम्मीदवारों को बेवजह परेशानी झेलनी पड़ती है।
अभी अंतिम नियुक्ति पर नहीं लगी मुहर
हालांकि यह राहत फिलहाल उन 10 अभ्यर्थियों को मिली है, जिन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की थी। लेकिन इस आदेश से अन्य प्रभावित उम्मीदवारों को भी कानूनी आधार मिला है। यदि वे भी न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं तो उन्हें समान राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों को चॉइस फिलिंग में शामिल किया जाएगा, लेकिन उनके पोस्टिंग आदेश फिलहाल जारी नहीं होंगे। अंतिम नियुक्ति न्यायालय के आगामी आदेशों और मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
फैसले से अभ्यर्थियों में जगी नई उम्मीद
कई दिनों से अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना कर रहे संगीत शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए यह आदेश किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। जिन युवाओं को लग रहा था कि उनकी वर्षों की मेहनत और योग्यता व्यर्थ हो जाएगी, उन्हें अब भर्ती प्रक्रिया में बने रहने का अवसर मिल गया है।
हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश ने न केवल प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत दी है, बल्कि भर्ती प्रक्रियाओं में नियमों की पारदर्शिता और वैधानिकता को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
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