एमपी में मिडिल स्कूल शिक्षक के लिए अंग्रेजी जरूरी, ग्वालियर हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Anjali Dwivedi | May 20, 2026, 18:34 IST
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एमपी शिक्षक भर्ती को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट के अनुसार ग्रेजुएशन स्तर पर संबंधित विषय की डिग्री होना अनिवार्य है। केवल उच्च योग्यता के आधार पर मिडिल स्कूल में शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं मिल सकती है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में मिडिल स्कूल शिक्षक बनने के लिए नया नियम साफ हो गया है।
  • अब उम्मीदवारों के पास ग्रेजुएशन स्तर पर संबंधित विषय होना बहुत जरूरी है।
  • केवल पोस्ट ग्रेजुएशन यानी उच्च योग्यता के आधार पर नौकरी नहीं मिल पाएगी।
  • ग्वालियर हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती 2018 से जुड़ी एक अहम याचिका खारिज कर दी।
  • कोर्ट ने कहा कि खेल के बीच में भर्ती के नियम बदले नहीं जा सकते।

मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि मिडिल स्कूल शिक्षक बनने के लिए संबंधित विषय जरूरी है।



अभ्यर्थी के पास स्नातक यानी ग्रेजुएशन स्तर पर उस विषय की डिग्री होनी चाहिए। इसके बिना उम्मीदवार को इस पद पर नियुक्ति का अधिकार बिल्कुल नहीं मिलेगा। कोर्ट ने इस संबंध में दायर एक याचिका को भी पूरी तरह खारिज कर दिया।



शिक्षक की नौकरी केवल योग्यता से नहीं मिलेगी

ग्वालियर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पात्रता के नियमों को बहुत स्पष्ट कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार के पास ग्रेजुएशन में संबंधित विषय नहीं है। तो उसे केवल पोस्ट ग्रेजुएशन यानी उच्च योग्यता के आधार पर नियुक्त नहीं कर सकते।



शिक्षा विभाग के नियमों को सर्वोपरि मानते हुए कोर्ट ने सरकार के पक्ष को सही ठहराया। यह पूरा मामला साल 2018 की माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।



जानें याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा का मामला

यह पूरा कानूनी विवाद याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा की एक अर्जी से शुरू हुआ था। पवन कुमार ने माध्यमिक शिक्षक परीक्षा 2018 की भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था। उन्होंने अंग्रेजी विषय के शिक्षक पद के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किया था। लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग ने उनकी नियुक्ति को निरस्त कर दिया था।



विभाग का कहना था कि पवन के पास ग्रेजुएशन स्तर पर अंग्रेजी विषय नहीं था। इसी आदेश को पवन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।



हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की तरफ से दी गई दलीलें

याचिकाकर्ता पवन मिश्रा की ओर से कोर्ट में एक खास दलील पेश की गई थी। उनके वकील ने कहा कि पवन ने अंग्रेजी विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उनके पास अंग्रेजी की उच्च शैक्षणिक योग्यता है, इसलिए उन्हें पात्र माना जाना चाहिए।



दूसरी तरफ सरकारी वकील ने इस दलील का जमकर विरोध किया। सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह मांग मौजूदा भर्ती नियमों के पूरी तरह खिलाफ है। विभाग नियमों से बाहर जाकर किसी को नियुक्ति पत्र नहीं दे सकता।



ग्वालियर हाईकोर्ट बेंच ने क्या कहा

Gwalior High Court की डबल बेंच ने इस पूरे मामले की बहुत गंभीरता से सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार के तर्कों को सही माना और याचिकाकर्ता की मांग ठुकरा दी।



सुनवाई के दौरान माननीय कोर्ट ने एक पुराना और प्रसिद्ध कानूनी सिद्धांत फिर से दोहराया। कोर्ट ने कहा कि खेल शुरू होने के बाद बीच में नियम नहीं बदले जा सकते। विज्ञापन जारी होने के समय जो शर्तें तय थीं, उनका पालन करना बेहद जरूरी होता है।



हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अपने फैसले में भर्ती नियमों को बाध्यकारी बताया। कोर्ट ने कहा कि अगर बीच में नियमों में ढील दी जाएगी तो गलत होगा।



इससे उन हजारों योग्य अभ्यर्थियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो जाएगा। जिन्होंने विज्ञापन की शर्तों को पढ़कर इस भर्ती के लिए आवेदन ही नहीं किया था। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है। जहां पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री को ग्रेजुएशन के बिल्कुल बराबर माना गया हो।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश मिडिल स्कूल शिक्षक भर्ती को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट का क्या निर्णय है?
    मध्य प्रदेश की ग्वालियर हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्णय दिया है कि मिडिल स्कूल बनने के लिए उम्मीदवार के पास ग्रेजुएशन स्तर पर संबंधित विषय की डिग्री होना अनिवार्य है। यदि किसी अभ्यर्थी के पास ग्रेजुएशन में वह विषय नहीं है, तो उसे केवल पोस्ट ग्रेजुएशन के आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

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