अब ई-अटेंडेंस से जुड़ेगी शिक्षकों की सैलरी, गैरहाजिरी पर कटेगा वेतन
सरकारी स्कूलों में समय पर पहुंचने और नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब शिक्षकों का मासिक वेतन सीधे उनकी ऑनलाइन उपस्थिति यानी ई-अटेंडेंस से जुड़ जाएगा। साफ शब्दों में कहें तो ऐप पर हाजिरी नहीं, तो वेतन भी नहीं।
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक अब प्रदेशभर के शिक्षकों के वेतन बिल 'हमारे शिक्षक' ऐप में दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही तैयार किए जाएंगे।
पहले क्या होता था?
पिछले शैक्षणिक सत्र में भी शिक्षकों को ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उस समय इसे वेतन भुगतान प्रणाली से नहीं जोड़ा गया था। कुछ जिलों में स्थानीय स्तर पर वेतन रोकने जैसी कार्रवाई हुई, लेकिन बाद में कई मामलों में राहत भी दे दी गई थी।
इस बार स्थिति पूरी तरह अलग है। नए नियमों के तहत ई-अटेंडेंस का रिकॉर्ड ही वेतन भुगतान का आधिकारिक आधार माना जाएगा। यानी अब मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश बेहद सीमित होगी।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
शिक्षा विभाग ने एजुकेशन पोर्टल 3.0 के तहत 'हमारे शिक्षक' ऐप को अपग्रेड किया है। अब ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारी इसी डिजिटल डेटा के आधार पर वेतन आहरण देयक तैयार करेंगे।
यदि किसी शिक्षक की उपस्थिति ऐप में दर्ज नहीं मिलेगी, तो संबंधित तिथि के लिए उसे अनुपस्थित माना जाएगा और वेतन में कटौती की प्रक्रिया स्वत: लागू हो सकती है।
अधिकारियों की जवाबदेही भी तय
सरकार ने केवल शिक्षकों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी जिम्मेदारी तय की है। संकुल प्राचार्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ई-अटेंडेंस का मिलान करने के बाद ही वेतन बिल अग्रेषित करें।
यदि उपस्थिति दर्ज न होने के बावजूद किसी शिक्षक का वेतन बिल पास होता है, तो संबंधित संकुल प्राचार्य के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
'नो वर्क, नो पे' पर सख्ती
विभागीय निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जिस दिन शिक्षक ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे, उस दिन उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा। इसका सीधा असर उनके वेतन पर पड़ेगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से स्कूलों में लेटलतीफी, बिना सूचना अनुपस्थिति और कार्यस्थल पर लापरवाही जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा।
क्या होगा इसका असर?
यह फैसला सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और शिक्षण व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, शिक्षकों के बीच तकनीकी दिक्कतों और नेटवर्क समस्याओं को लेकर चिंताएं भी सामने आ सकती हैं।
एक नजर में मुख्य बातें
• शिक्षकों का वेतन अब ई-अटेंडेंस से जुड़ेगा।
• 'हमारे शिक्षक' ऐप पर हाजिरी अनिवार्य होगी।
• बिना उपस्थिति दर्ज किए वेतन बिल नहीं बनेगा।
• संकुल प्राचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की गई।
• गलत तरीके से वेतन बिल पास होने पर कार्रवाई होगी।
• 'नो वर्क, नो पे' का नियम सख्ती से लागू होगा।
• उद्देश्य सरकारी स्कूलों में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाना है।
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