एमपी के 3 लाख शिक्षकों के तबादलों पर बड़ा अपडेट, 58 हजार लिस्ट से बाहर
मध्य प्रदेश में 1 से 15 जून तक कर्मचारियों के तबादलों की छूट मिल चुकी है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग अब भी अपने ही बनाए चक्रव्यूह में उलझा दिखाई दे रहा है। एक तरफ लाखों शिक्षक वर्षों से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं, दूसरी तरफ विभाग पहले डेटा अपडेट, फिर समीक्षा और उसके बाद निर्णय की बात कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर शिक्षकों का पूरा ब्योरा अपडेट कराने की कवायद तेज कर दी गई है, जबकि ट्रांसफर प्रक्रिया पर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह तबादलों की तैयारी है या फिर एक और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया की शुरुआत?
तबादलों में अबतक क्या हुआ
- प्रदेश में करीब 3 लाख शिक्षक कार्यरत हैं।
- सरकार ने कर्मचारियों के तबादलों के लिए 1 से 15 जून का समय तय किया है।
- स्कूल शिक्षा विभाग अब तक ट्रांसफर प्रक्रिया पर अंतिम फैसला नहीं ले पाया है।
- सभी स्कूलों का विषयवार शिक्षक डेटा एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर अपडेट कराया जा रहा है।
- 58 हजार से ज्यादा जनगणना ड्यूटी वाले शिक्षक फरवरी 2027 तक तबादलों से बाहर रहेंगे।
- 2022 में मंजूर ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी आज तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।
चार साल बाद भी फाइलों में अटकी ट्रांसफर पॉलिसी
अगस्त 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट ने शिक्षकों के लिए नई ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी दी थी। दावा किया गया था कि तबादलों में पारदर्शिता आएगी और पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी।
लेकिन लगभग चार साल गुजरने के बाद भी नीति का पूर्ण क्रियान्वयन नहीं हो सका। नतीजा यह है कि हजारों शिक्षक आज भी अपने पसंदीदा या जरूरत वाले स्थान पर जाने का इंतजार कर रहे हैं।
पोर्टल अपडेट की हड़बड़ी क्यों?
स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्कूल में विषयवार पदस्थ शिक्षकों की जानकारी अपडेट की जाए।
सेवानिवृत्त और दिवंगत शिक्षकों के नाम भी रिकॉर्ड से हटाए जा रहे हैं। विभाग का तर्क है कि वास्तविक स्थिति सामने आए बिना तबादलों का सही निर्णय संभव नहीं है।
हालांकि शिक्षक संगठनों का सवाल है कि जब वर्षों से डेटा विभाग के पास मौजूद है तो हर बार तबादलों से पहले नई कवायद की जरूरत क्यों पड़ती है?
क्या सभी शिक्षकों को मिलेगा मौका?
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। यदि हजारों शिक्षक जनगणना के कारण बाहर रहेंगे, कुछ शिक्षक विशेष श्रेणियों में छूट प्राप्त करेंगे और प्रशासनिक तबादलों को प्राथमिकता मिलेगी, तो स्वैच्छिक तबादलों के लिए वास्तव में कितनी सीटें बचेंगी? शिक्षक संगठनों का मानना है कि सरकार को इस पर स्पष्ट रोडमैप जारी करना चाहिए।
नीति में किसे प्राथमिकता?
विभागीय नीति के अनुसार सबसे पहले प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर तबादले होंगे। इसके बाद स्वैच्छिक स्थानांतरण किए जाएंगे।
स्वैच्छिक तबादला पाने वाले शिक्षक को कम से कम तीन वर्ष तक उसी स्थान पर सेवा देना अनिवार्य होगा। उत्कृष्ट विद्यालय, मॉडल स्कूल और सांदीपनि विद्यालयों में स्वैच्छिक स्थानांतरण की अनुमति भी नहीं होगी।
इन शिक्षकों को मिल सकती है राहत
नीति में कुछ श्रेणियों को सामान्य तबादलों से छूट दी गई है। इनमें शामिल हैं:
- तीन वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक
- गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारी
- दिव्यांग शिक्षक
- 40 प्रतिशत या उससे अधिक नि:शक्तता वाले कर्मचारी
- जिनकी सेवा अवधि एक वर्ष से कम शेष है।
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.संजय गोयल का कहना है कि विभाग विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है और शिक्षकों की उपलब्धता, विषयवार आवश्यकता तथा जनगणना जैसी प्रशासनिक बाध्यताओं का अध्ययन किया जा रहा है।
क्या फिर उम्मीदों से बड़ा साबित होगा सिस्टम?
शिक्षकों के बीच सबसे बड़ी चिंता यह नहीं है कि तबादले होंगे या नहीं, बल्कि यह है कि क्या इस बार प्रक्रिया वास्तव में शुरू होगी? पिछले कई वर्षों से नीति, पोर्टल, डेटा अपडेट और समीक्षा की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन जमीन पर नतीजे सीमित रहे हैं। ऐसे में लाखों शिक्षक अब सिर्फ आदेश नहीं, बल्कि वास्तविक ट्रांसफर सूची देखने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि शिक्षा विभाग वर्षों पुरानी मांग पूरी करता है या फिर तबादलों का मुद्दा एक बार फिर फाइलों में सिमट जाता है।
FAQ
- क्या सभी शिक्षक इस बार तबादले के लिए आवेदन कर पाएंगे?
नहीं। जिन शिक्षक को जनगणना, विशेष श्रेणी या प्रशासनिक कारण से छूट दी गई है, वे तबादलों से बाहर रहेंगे। - स्वैच्छिक तबादले की नीति क्या है?
स्वैच्छिक तबादला लेने वाले शिक्षक को कम से कम तीन वर्ष उसी स्थान पर सेवा देनी होगी। उत्कृष्ट और मॉडल स्कूलों में स्वैच्छिक तबादला नहीं मिलेगा। - पोर्टल अपडेट का उद्देश्य क्या है?
एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर शिक्षक डेटा अपडेट करने से वास्तविक स्थिति सामने आएगी। इसके बिना सही तबादला निर्णय संभव नहीं है।
यह खबरें भी पढ़ें...
सिंहस्थ 2028: इंदौर में बनेंगे होल्डिंग एरिया, उज्जैन में भीड़ होने पर यहां रुकेंगे श्रद्धालु
PCC में दिग्गी-सिंघार की जुगलबंदी: पटवारी का ऐलान, आदिवासियों के लिए करेंगे आंदोलन
इंदौर पुलिस को अब आईआईएम सिखाएगा आमजन से बात करने का तरीका
एमपी बीजेपी में आरपार: अपने ही मंत्री पर भड़के विधायक पन्नालाल शाक्य, कह दी ये बात..