MP में 20 हजार तक बढ़ेगी शिक्षकों की सैलरी: पहली नियुक्ति से मिलेगा सर्विस का लाभ
समझें क्या है पूरा मामला...
- मामला शिक्षकों की पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने से जुड़ा है।
- 497 शिक्षकों ने सेवा लाभ नहीं मिलने पर हाई कोर्ट का रुख किया था।
- सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
- 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP खारिज की।
- अब हाई कोर्ट ने चार हफ्ते में आदेश लागू करने को कहा है।
जबलपुर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए सरकार को आदेश दिया है। इसे 4 सप्ताह में लागू करना हैं। इसमें शिक्षकों की पहली नियुक्ति से सेवा जोड़ने पर वेतन, एरियर और दूसरे लाभ मिल सकते हैं।
मध्य प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए यह मामला अहम है। शिक्षकों का कहना है कि पुरानी सेवा को नहीं जोड़ा गया। इससे उन्हें कई सेवा लाभ कम मिलने की बात सामने आई। मामले में 497 शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। इनमें राजेश कुमार पांडेय समेत अन्य शिक्षक शामिल थे।
सरकार को दिया चार हफ्ते का समय
मामला अब अवमानना याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा जस्टिस दीपक खोट की एकल पीठ में इसकी सुनवाई हुई। शिक्षकों की ओर से जितेंद्र आर्य ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से एएस बघेल कोर्ट में मौजूद रहे।
सरकार ने आदेश लागू करने के लिए समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने चार सप्ताह की मोहलत दी। अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
सरकार ने दी थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
हाई कोर्ट के पुराने आदेश को सरकार ने चुनौती दी थी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशन लीव पिटिशन (SLP) यानी विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। यह SLP 24 अगस्त 2026 को खारिज हो गई। इसके बाद शिक्षक फिर हाई कोर्ट पहुंचे। उन्होंने आदेश लागू कराने के लिए अवमानना याचिका लगाई। अब हाई कोर्ट ने पालन के लिए समय तय किया है।
शिक्षकों की सैलरी में कितना बदलाव?
शिक्षकों के अनुसार सेवा जोड़ने से वेतन बढ़ सकता है। बताया गया है कि मासिक वेतन में 15 हजार तक बढ़ोतरी होगी। कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी 20 हजार तक बताई गई है। हालांकि, वास्तविक लाभ सेवा रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा। वेतन निर्धारण के बाद ही अंतिम रकम साफ होगी।
10 साल के एरियर का भी दावा
शिक्षकों के अनुसार छठा वेतनमान 2006 से लागू हुआ था। उनके अनुसार इसका लाभ बाद में मिलना शुरू हुआ। इस अंतर का एरियर मिलने की बात कही जा रही है।
प्रति शिक्षक सात से आठ लाख रुपए तक का अनुमान है। इस राशि का अंतिम निर्धारण विभागीय गणना से होगा। बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज का दावा भी है। इस दावे की अंतिम स्थिति आदेश पालन के बाद साफ होगी।
किस शिक्षक को कितना होगा फायदा?
प्राथमिक शिक्षकों की संख्या करीब 35 हजार बताई गई है। उनका मौजूदा वेतन करीब 80 हजार रुपए बताया गया है। सेवा लाभ मिलने पर यह एक लाख तक पहुंच सकता है। माध्यमिक शिक्षकों की संख्या करीब 20 हजार बताई गई है। उनका वेतन करीब 95 हजार रुपए बताया गया है।
बढ़कर यह करीब 1.10 लाख रुपए तक हो सकता है। उच्च माध्यमिक शिक्षकों की संख्या करीब 15 हजार बताई गई है। उनका वेतन करीब एक लाख रुपये बताया गया है। बढ़कर यह करीब 1.20 लाख रुपये तक बताया गया है। ये आंकड़े शिक्षक संगठनों की ओर से बताए गए हैं।
करीब 70 हजार शिक्षकों को होगा लाभ
तीनों श्रेणियों में करीब 70 हजार शिक्षक बताए गए हैं। सेवा गणना बदलने पर वरिष्ठता भी प्रभावित हो सकती है। वेतन बढ़ोतरी का असर आगे की सेवा पर पड़ेगा। पेंशन और दूसरे लाभों की गणना भी बदल सकती है। हालांकि, हर शिक्षक का लाभ अलग हो सकता है। यह उसकी पहली नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा।
सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर
हाई कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। अब विभाग को पुराने आदेश पर कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद शिक्षकों को वास्तविक लाभ मिलने की प्रक्रिया शुरू होगी। अगली सुनवाई में आदेश पालन की स्थिति सामने आएगी। इसलिए 21 अक्टूबर वाले सप्ताह की सुनवाई अहम होगी।
क्या था हाई कोर्ट का पिछला आदेश
यह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर पीठ द्वारा याचिका संख्या WP-46347 of 2025 (राजेश कुमार पांडे एवं अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य) में दिनांक 12 दिसंबर, 2025 को माननीय न्यायमूर्ति मनिंदर एस भट्टी द्वारा शिक्षकों के पक्ष में आदेश पारित किया गया था। इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उनकी वरिष्ठता (seniority) की गणना वर्ष 2007 (01.04.2007) के बजाय उनकी पहली नियुक्ति की तिथि यानी वर्ष 1998 से की जाए। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 1998 से उनके वेतनमान का पुनर्मूल्यांकन करने, छठे वेतन आयोग के लाभ मध्य प्रदेश वेतन संशोधन नियम, 2009 के अनुसार 01 जनवरी 2006 से लागू करने और बकाया राशि (arrears) पर 12% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान की मांग की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने यह तर्क दिया कि समान मामले में इस न्यायालय की समन्वय पीठ (Co-ordinate Bench) पूर्व में ही निर्णय (WP No. 11734/2021) दे चुकी है, इसलिए उन्होंने अदालत से केवल यह प्रार्थना की कि संबंधित प्राधिकारी को उनके द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन (representation) पर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।
उच्च न्यायालय ने मामले के गुणों (merits) पर कोई टिप्पणी या अंतिम विचार व्यक्त किए बिना इस याचिका का निपटारा कर दिया था। अदालत ने आदेश दिया कि यदि याचिकाकर्ता आज से 30 दिनों के भीतर प्रतिवादी संख्या 1 यानि स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हैं, तो प्राधिकारी को कानून के अनुसार 90 दिनों की अवधि के भीतर एक स्पष्ट और कारण सहित (well-reasoned and speaking order) निर्णय पारित करना होगा। इन याचिकाओं के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी जहां पर शिक्षकों की ही जीत हुई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन न किए जाने पर यह अवमानना याचिका दायर हुई
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