MP के 2.10 लाख शिक्षकों की नौकरी पर खतरा! पात्रता परीक्षा पास करने का आदेश

Jitendra Shrivastava | Mar 07, 2026, 23:01 IST
Photograph: (THESOOTR)
MP के 2.10 लाख शिक्षकों को अपनी पात्रता परीक्षा पास करनी होगी, नहीं तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। 2013 से पहले भर्ती हुए शिक्षक भी परीक्षा में शामिल होंगे।

News In Short

  • 2.10 लाख शिक्षकों को पात्रता परीक्षा में पास होना अनिवार्य।
  • परीक्षा पास न करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश।
  • 2013 से पहले भर्ती शिक्षकों को भी परीक्षा पास करनी होगी।
  • शिक्षकों के संगठन ने फैसले का विरोध किया, पुनर्विचार याचिका की योजना।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पात्रता परीक्षा लागू की गई।

News In Detail

मध्य प्रदेश में करीब 2.10 लाख प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए परीक्षा पास करनी होगी। अगर वे परीक्षा में सफल नहीं होते, तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। यह आदेश 2013 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों पर लागू होगा। इस निर्णय से शिक्षकों के बीच विरोध भी देखने को मिल रहा है।



नए नियमों के तहत पात्रता परीक्षा

मध्य प्रदेश के 2.10 लाख शिक्षकों के लिए नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसके तहत उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। यह आदेश 2013 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों पर लागू होगा, जिनके लिए अब तक पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी। अब उन्हें भी इस परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा।



परीक्षा में असफल होने पर क्या?

यदि कोई शिक्षक निर्धारित समय में पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करता और उसकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से अधिक समय बचा है, तो उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। यह कदम इस उद्देश्य से उठाया गया है कि शिक्षा प्रणाली में केवल योग्य शिक्षक ही काम करें।



teachers eligibility exam


गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम में शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया है। इससे पहले शिक्षक भर्ती परीक्षा का कोई वैध मानदंड नहीं था, और इसी कारण से अब तक कई शिक्षक बिना परीक्षा के काम कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।



शिक्षकों के लिए ई-केवाइसी जरूरी

इसके अलावा, राज्य शिक्षा विभाग ने ई-केवाइसी (E-KYC) की प्रक्रिया को भी अनिवार्य कर दिया है, जिससे कि पात्रता परीक्षा की बुकिंग और उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। सभी शिक्षकों को ऑनलाइन पंजीकरण और परीक्षा से संबंधित दस्तावेज़ों की पुष्टि करनी होगी।



राज्य शिक्षक संघ ने जताया विरोध

हालांकि, इस फैसले को लेकर शिक्षक संघ में असंतोष है। राज्य शिक्षक संघ ने इस आदेश को असंवेदनशील बताया और फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की योजना बनाई है। संगठन का कहना है कि यह नियम शिक्षकों की मेहनत और समर्पण की अनदेखी करता है।



शिक्षकों की स्थिति और काम की चुनौती

मध्य प्रदेश में साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं, लेकिन कई शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। सरकार का यह कदम उन शिक्षकों के लिए एक अवसर प्रदान कर रहा है जो अब तक पात्रता परीक्षा से बचते आए हैं। इसके बावजूद, कुछ शिक्षक इसे एक कठोर कदम मानते हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।



सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, राज्य के सभी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को अब पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। इस संदर्भ में संबंधित दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने इस प्रक्रिया को अनिवार्य बताया है।



वहीं, इस आदेश के खिलाफ राज्य शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। 15 मार्च को संगठन की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।



ये खबरें भी पढ़ें...



LPG गैस बुकिंग में बदलाव: नया नियम लागू, इतने दिन बाद मिलेगा दूसरा सिलेंडर



जहरीला कफ सिरप कांड : जांच में मिले सबूत, परासिया के दो डॉक्टर गिरफ्तार



एमपी के दो जिलों में 3 हजार करोड़ की लागत से बनेगी सड़क, हजारों किसानों को होगा फायदा



MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें





Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • शिक्षक पात्रता परीक्षा
  • अनिवार्य सेवानिवृत्ति
  • शिक्षक संघ
  • e-KYC