पदोन्नति में देरी पर भड़के शिक्षक: बोले- पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर हो प्रमोशन
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति में लंबी देरी हो रही है।
- शासकीय शिक्षक संगठन ने इस मुद्दे पर तीखी आपत्ति जताई है।
- संगठन ने वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर प्रमोशन की मांग की।
- लगभग सभी विभागों में पदोन्नति पूरी हो चुकी है।
- सितंबर अक्टूबर में अगले दौर की डीपीसी शुरू होने वाली है।
प्रदेश के हजारों शिक्षक इन दिनों गहरी निराशा में हैं। नवीन शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई शिक्षक सालों से अपनी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें अब तक कोई स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया नहीं मिल पाई है। इसी वजह से शिक्षक संगठनों ने अब खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।
देरी की वजह पर उठे सवाल
शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया साफ नियमों पर आधारित होनी चाहिए। यह वरिष्ठता, पात्रता और रिक्त पदों के हिसाब से होनी चाहिए। साथ ही यह चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए। लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इसी वजह से शिक्षकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कई शिक्षक अब रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके हैं। फिर भी उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका है।
पारदर्शिता की कमी से असमंजस
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि यदि विभाग किसी पदोन्नति आदेश में कोर्ट के फैसले का हवाला देता है तो उसकी पूरी जानकारी शिक्षकों को दी जानी चाहिए। इससे किसी तरह का भ्रम पैदा नहीं होगा। उनका कहना है कि पारदर्शिता की कमी से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बन रही है। विभाग को इस पर तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए।
किन पदों पर अटकी पदोन्नति
शासकीय शिक्षक संगठन ने साफ किया है कि तीन स्तर पर पदोन्नति रुकी हुई है।
पहला, प्राथमिक शिक्षक से माध्यमिक शिक्षक के पद पर।
दूसरा, माध्यमिक शिक्षक से उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर।
तीसरा, उच्च माध्यमिक शिक्षक से प्राचार्य हाईस्कूल के पद पर। संगठन का कहना है कि इन तीनों स्तर पर अनावश्यक देरी हो रही है। यह देरी अब सहनशक्ति से बाहर होती जा रही है।
अन्य विभागों से तुलना
गौरतलब बात यह है कि पदोन्नति की प्रक्रिया कई महीने पहले शुरू हो चुकी है। लगभग सभी सरकारी विभागों में यह काम पूरा हो चुका है। लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग अब तक पीछे है। यहां तीनों स्तर की पदोन्नति अटकी हुई है। इससे शिक्षकों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर देरी की वजह क्या है। कई शिक्षक इसे विभागीय लापरवाही भी बता रहे हैं।
अगली डीपीसी से पहले चिंता
एक बड़ी बात यह भी सामने आई है कि सितंबर अक्टूबर में अगले दौर की डीपीसी (Departmental Promotion Committee) शुरू हो जाएगी। ऐसे में मौजूदा पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी होनी जरूरी है।
यदि देरी जारी रही तो शिक्षकों को दोहरा नुकसान हो सकता है। इसी वजह से संगठन अभी से विभाग पर दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि समय रहते फैसला लेना बेहद जरूरी है।
अन्य संगठनों का भी समर्थन
इस मुद्दे पर सिर्फ शासकीय शिक्षक संगठन ही नहीं बोल रहा। मध्य प्रदेश शिक्षक संगठन ने भी यही मांग दोहराई है। राज्य अध्यापक संघ ने भी पदोन्नति में देरी न करने की बात कही है। इन सभी संगठनों की मांग लगभग एक जैसी है। सबका कहना है कि पात्र शिक्षकों को जल्द न्याय मिलना चाहिए। इससे साफ है कि यह मुद्दा अब व्यापक रूप ले चुका है।
संगठन की मुख्य मांगें
शासकीय शिक्षक संगठन ने विभाग से तत्काल स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने को कहा है। संगठन चाहता है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और चरणबद्ध तरीके से हो। साथ ही सभी पात्र शिक्षकों को बिना देरी के पदोन्नति का लाभ मिले। संगठन का मानना है कि देरी से शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है। इसका सीधा असर स्कूलों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। इसलिए जल्द फैसला लेना जरूरी बताया जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। शिक्षक संगठन लगातार विभाग पर दबाव बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला आ सकता है। शिक्षकों की नजर अब विभाग के अगले कदम पर टिकी है। सभी को उम्मीद है कि जल्द राहत भरी खबर आएगी।
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