1 अक्टूबर से खुलेंगे एमपी के नेशनल पार्क, कूनो में 16 चीते और पन्ना में 100 बाघ के होंगे दीदार
1 अक्टूबर से खुलेगा कूनो नेशनल पार्क
तीन महीने के मानसून अवकाश के बाद मध्य प्रदेश के पार्क खुल रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क के गेट 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खुलेंगे।
यहां के खुले जंगल में पहली बार एक साथ 16 चीते नजर आएंगे। पर्यटकों की बढ़ती संभावित संख्या को देखते हुए प्रबंधन ने पूरी तैयारी की है। पार्क प्रबंधन ने जिप्सियों और गाइडों की संख्या बढ़ा दी है।
पन्ना टाइगर रिजर्व में 100 से ज्यादा बाघ
वहीं पन्ना टाइगर रिजर्व भी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। यहां अब 100 से अधिक बाघ मौजूद हैं। सफारी के पहले दिन के लिए एडवांस बुकिंग पूरी हो चुकी है। यहां सफारी वाहन का टिकट पूर्व की तरह छह हजार 600 रुपए ही रहेगा।
माधव टाइगर रिजर्व में शावकों की मौजूदगी
माधव टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। इसकी दक्षिण रेंज में एमटी-5 नर बाघ मौजूद है। इसी रेंज में एमटी-4 मादा बाघ और 2 शावक भी मौजूद हैं। पूर्वी रेंज में एमटी-2 नर और एमटी-3 मादा बाघ हैं। इनके साथ 2-2 शावक भी यहां विचरण कर रहे हैं।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पुराना शुल्क
दुर्गावती टाइगर रिजर्व (Durgavati Tiger Reserve) में करीब 30 बाघ-बाघिन मौजूद हैं। पर्यटकों को यहां सफारी के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। टूरिस्ट पुराने शुल्क पर ही सफारी का पूरा लुत्फ उठा सकेंगे।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बोट और क्रूज बंद
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) में वर्तमान में करीब 92 बाघ-बाघिन मौजूद हैं। वन्यजीव प्रेमियों के लिए पार्क के रास्ते खोले जा रहे हैं। हालांकि पर्यटकों को तवा बांध और नदी में सैर की अनुमति नहीं होगी। यहां अभी सोलर बोट और क्रूज की सवारी नहीं कराई जाएगी।
कूनो नेशनल पार्क
बता दें कि कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) को 1981 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था। वहीं 2018 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था। यह पार्क मुख्य रूप से विंध्याचल पर्वत श्रृंखला और कूनो नदी के कछार में फैला हुआ शुष्क पर्णपाती वन क्षेत्र है।
कूनो की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान भारत का प्रोजेक्ट चीता है। इसके तहत 2022 में नामीबिया और बाद में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर यहां पुनर्वासित किया गया।
पन्ना टाइगर रिजर्व
पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) बाघ संरक्षण के इतिहास में एक मिसाल माना जाता है। वर्ष 2008–09 के दौरान जब यहां बाघों की संख्या शून्य हो गई थी, तब वन विभाग के सफल टाइगर री-इंट्रोडक्शन प्रोग्राम के जरिए बाघों का कुनबा दोबारा खड़ा किया गया था।
केन नदी इस रिजर्व की जीवनरेखा है, जो इसे दो भागों में बांटती है और दुर्लभ घड़ियालों व गिद्धों के लिए आदर्श प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराती है। यूनेस्को (UNESCO) द्वारा इसे बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा भी प्राप्त है।
माधव टाइगर रिजर्व
माधव राष्ट्रीय उद्यान ग्वालियर के सिंधिया राजवंश का ऐतिहासिक शिकारगाह रहा है। इसे 1958 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। इस पार्क में साख्या सागर नामक प्रमुख झील मौजूद है। इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर आर्द्रभूमि घोषित किया गया है।
पार्क के भीतर पहाड़ी पर बना जॉर्ज कैसल एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है।