परिवहन अधिसूचना मामले में हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को अंतिम अवसर

Ratan Kumar Mishra | Aug 04, 2026, 20:43 IST
Photograph: (THESOOTR)
GWALIOR. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने परिवहन अधिसूचना मामले में सरकार को अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने बार-बार समय मांगने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई। आगे देरी बर्दाश्त नहीं होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • हाईकोर्ट सख्त, सरकार को मिला आखिरी मौका, नहीं चलेगा बहाना।
  • परिवहन अधिसूचना पर कोर्ट की नाराजगी, अब देरी नहीं चलेगी।
  • बार-बार समय मांगने पर हाईकोर्ट ने लगाई फटकार।
  • सरकार का पुराना वही तर्क, कोर्ट बोला अब बर्दाश्त नहीं।
  • ग्वालियर बेंच का सख्त रुख, न्याय हित में आखिरी मौका।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकार को सख्त संदेश दिया है। परिवहन अधिसूचना जारी करने के मामले में अब आखिरी मौका दिया गया है।



सरकार ने फिर 15 दिन का समय मांगा था। कोर्ट ने कहा कि बार-बार एक जैसा बहाना अब नहीं चलेगा। न्याय के हित में यह आखिरी अवसर दिया जा रहा है।



कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नई परिवहन अधिसूचना जारी करने से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार को अब प्रक्रिया पूरी करने का अंतिम अवसर दिया जा रहा है।



न्यायालय ने यह भी कहा कि वह बार-बार समय दिए जाने के पक्ष में नहीं है। लेकिन न्याय के व्यापक हित को देखते हुए एक आखिरी मौका दिया गया है।



किस मामले की सुनवाई हो रही थी

यह सुनवाई न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की डबल बेंच में हुई। मामला हरिशंकर सिंह पटेल एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश शासन के नाम से दर्ज है।



सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश शासकीय अधिवक्ता ने अदालत से 15 दिन का और समय मांगा। उन्होंने कहा कि इतने समय में मामले की स्थिति साफ हो जाएगी।



सरकार का क्या तर्क था

शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नई परिवहन अधिसूचना का प्रस्ताव पहले ही समन्वय समिति के पास भेजा जा चुका है। समिति से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव परिवहन प्राधिकरण को भेजा जाएगा। इसके बाद ही नई अधिसूचना जारी होगी।



कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि पिछली कई सुनवाइयों में भी सरकार की ओर से ऐसे ही आश्वासन दिए जाते रहे हैं।



न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया को इस तरह लंबित रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि बार-बार समय मांगने और एक जैसे तर्क देने की प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं है।



अब सरकार को क्या करना होगा

हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि अब सरकार को तय समय में ठोस कार्रवाई करनी होगी। नई अधिसूचना जारी करने की दिशा में ठोस कदम उठाने ही होंगे।



अगली सुनवाई में सरकार से प्रक्रिया की असली प्रगति दिखाने की अपेक्षा की जाएगी। यानी अगर इस बार भी सिर्फ आश्वासन दिया गया, तो कोर्ट सख्त रुख अपना सकता है।



पहले भी हो चुकी है फटकार

यह पहला मौका नहीं है जब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई हो। इससे पहले भी ग्वालियर खंडपीठ ने परिवहन अधिसूचना जारी करने में देरी को लेकर सरकार को फटकार लगाई थी। उस समय कोर्ट ने कहा था कि इस देरी से ट्रांसपोर्टर्स को परमिट नहीं मिल पा रहे। स्कूल बसों के अस्थायी परमिट भी खत्म हो रहे थे।



यानी यह मामला काफी समय से अदालत में लंबित है और सरकार बार-बार समय मांगती रही है। ताजा सुनवाई में कोर्ट ने अब इस प्रवृत्ति पर सीधा सवाल उठाया है।



इस देरी का असर किस पर पड़ रहा है

परिवहन अधिसूचना में देरी का सीधा असर ट्रांसपोर्टर्स ( Transporters ) और आम यात्रियों पर पड़ रहा है। बिना नई अधिसूचना के कई परमिट अटके हुए हैं। इससे बस संचालन और स्कूल वाहनों की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।



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