ओबीसी वर्ग के अधिवक्ता बोले- खत्म कर दें OBC आरक्षण, कोर्ट में हुई लंबी बहस
Neel Tiwari | Aug 04, 2026, 18:38 IST
ओबीसी आरक्षण
ओबीसी 27% आरक्षण केस की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने कई बार सरकार को आरक्षण खत्म करने का सुझाव दिया है। उनकी जगह सरकारी स्कूलों से पढ़े छात्रों को नौकरी में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों की लगातार सुनवाई चल रही है।
- विवाद का केंद्र 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा और 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लागू होना है।
- मंगलवार को ओबीसी पक्ष ने मेरिट, सरकारी जवाब और आरक्षण नीति पर विस्तार से दलील रखी।
- सुनवाई के दौरान सरकारी स्कूलों और सरकारी नौकरियों को लेकर अलग बहस भी हुई।
- अब इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार 5 अगस्त को होगी और अंतिम बहस पूरी होने की उम्मीद है।
बहस के बीच अधिवक्ता का बड़ा बयान
मेरिट पर सवाल से शुरू हुई पूरी चर्चा
अधिवक्ता बोले, मैंने कई बार लिखा कि ओबीसी आरक्षण खत्म कर दें
कोर्ट ने भी सरकारी स्कूलों की हालत पर चिंता जताई
जस्टिस पाठक ने साझा किया अपना अनुभव
उन्होंने बताया कि उस समय इंदौर के कलेक्टर भी बच्चों को पढ़ाने पहुंचते थे। कई आईआईटी से पढ़े लोग और अन्य अधिकारी भी इस अभियान से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि सभी लोग बच्चों के साथ समय बिताते थे और भोजन अवकाश में उनके साथ खाना भी खाते थे। इससे स्कूलों की कार्यप्रणाली पर समाज की नजर रहती थी और गुणवत्ता में सुधार दिखाई देने लगा था।
उन्होंने यह भी बताया कि उस समय जस्टिस शील नागू ने भी इस पहल में पढ़ाने की इच्छा जताई थी। बाद में कोरोना महामारी आने के कारण यह अभियान बंद हो गया। उनके अनुसार ऐसी पहल फिर शुरू हो तो सरकारी स्कूलों को लाभ मिल सकता है।
अधिवक्ता ने भी स्कूल सुधार की बात दोहराई
सरकार के जवाब पर भी उठे कई सवाल
2019 के बाद सरकार ने नहीं पेश किया कोई जवाब
सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ के आदेशों का हवाला
आनुपातिकता और आबादी के आधार पर रखी गई अंतिम दलील
अब बुधवार को फिर होगी सुनवाई
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