ओबीसी आरक्षण पर नई बहस: जब दूसरे वर्गों को आबादी के अनुसार आरक्षण, तो OBC से क्यों भेदभाव?
Neel Tiwari | Jul 28, 2026, 17:31 IST
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जबलपुर हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई में बड़ा सवाल उठा। ओबीसी पक्ष ने कहा कि एससी और एसटी को आबादी के अनुसार आरक्षण मिला है, लेकिन 51 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी को केवल 27 प्रतिशत आरक्षण मिला।
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
- कुछ याचिकाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण का विरोध किया गया है।
- दूसरी ओर कुछ याचिकाओं में ओबीसी को आबादी के अनुपात में अधिक आरक्षण देने की मांग की गई है।
- सुनवाई में 50 प्रतिशत सीमा, क्वांटिफिएबल डेटा और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर बहस चल रही है।
- अब ओबीसी पक्ष की दलीलों के बाद राज्य सरकार अपना जवाब पेश करेगी।
ओबीसी पक्ष ने उठाया सबसे बड़ा सवाल
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी करीब 51 प्रतिशत मानी जाती है। इसके बावजूद उन्हें केवल 27 प्रतिशत आरक्षण मिला। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया गया। ऐसे में ओबीसी के साथ अलग व्यवहार क्यों किया गया, इसका जवाब मिलना चाहिए।
प्रतिनिधित्व ही आरक्षण की असली भावना
उन्होंने कोर्ट को बताया कि इंदिरा साहनी सहित किसी भी बड़े फैसले में यह तय नहीं किया गया कि ओबीसी को कितने प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। उन्होंने बताया कि ST और SC वर्ग के 20 और 16% आरक्षण से बचे हुए 14% ओबीसी वर्ग को दे दिए गए जो बहुत कम है। इसलिए प्रतिशत तय करते समय वास्तविक प्रतिनिधित्व और आबादी दोनों पर विचार होना चाहिए।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा भी आया
उन्होंने फिलहाल अपना पूरा पक्ष ओबीसी आरक्षण के प्रतिशत तक सीमित रखा। इससे पहले कोर्ट में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण वर्टिकल आरक्षण के रूप में लागू है।
1973 के सर्कुलर पर कोर्ट का अहम सवाल
इसी सर्कुलर का हवाला देते हुए जस्टिस आनंद पाठक ने पूछा कि उसी दस्तावेज में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं देने का भी उल्लेख है। यदि ओबीसी का प्रतिशत बढ़ाया जाता है, तो क्या वह हिस्सा दूसरे आरक्षण से कम होगा। इस पर ओबीसी पक्ष ने कहा कि इसका तरीका तय किया जा सकता है। लेकिन आबादी के अनुसार समान अवसर मिलना सबसे जरूरी है।
दूसरे राज्यों के उदाहरण भी रखे गए
पहले पूरी हो चुकी है विरोध पक्ष की बहस
अब सरकार की दलीलों पर टिकी नजर
अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की नजर सरकार के जवाब और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है। आने वाले दिन इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।
ओबीसी आरक्षण की सुनवाई अब केवल 27 प्रतिशत के आंकड़े तक सीमित नहीं है। अब बहस समान अवसर, आबादी के अनुपात, प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सीमाओं पर केंद्रित हो गई है। यही सवाल आने वाली सुनवाई का भी आधार बनेगा।
FAQ
- मध्य प्रदेश में ओबीसी को कितना आरक्षण मिला है?
मध्य प्रदेश में ओबीसी को फिलहाल 27 प्रतिशत आरक्षण मिला है। ओबीसी पक्ष का दावा है कि उनकी आबादी करीब 51 प्रतिशत है। इसी अंतर पर हाईकोर्ट में बहस चल रही है। - जबलपुर हाईकोर्ट में यह सुनवाई किन जजों की बेंच कर रही है?
यह सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष खंडपीठ में हो रही है। मंगलवार को इस बेंच में दो घंटे से अधिक बहस हुई। अब आगे की सुनवाई बुधवार से जारी रहेगी। - अब इस केस में आगे क्या होगा?
बुधवार को ओबीसी पक्ष के अधिवक्ता अपनी बहस पूरी करेंगे। इसके बाद गुरुवार और शुक्रवार को राज्य सरकार की तरफ से दलीलें रखी जाएंगी। इसके बाद कोर्ट अगला कदम तय करेगा।
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