UCC के नाम रहा विधानसभा का दूसरा दिन: कानून से ज्यादा प्रक्रिया पर भिड़े सत्ता और विपक्ष

Ramanand Tiwari | Jul 21, 2026, 22:11 IST
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मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आए। कांग्रेस ने सेलेक्ट कमेटी भेजने की मांग की, सरकार ने इसे लाखों सुझावों पर आधारित बताया। बहस कानून से ज्यादा प्रक्रिया पर केंद्रित रही।

क्या है पूरा विवाद? एक नजर में..

  • सरकार ने विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया।
  • कांग्रेस ने पहले इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग रखी।
  • मांग खारिज होने पर विपक्ष ने सदन में नारेबाजी और विरोध किया।
  • विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा में भाग लेने की अपील की, कांग्रेस अपने रुख पर कायम रही।
  • 10 मिनट के स्थगन के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं हुआ।

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन सिर्फ यूसीसी (समान नागरिक संहिता) पर बहस का नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष की रणनीति का बड़ा राजनीतिक मंच बन गया। कांग्रेस ने विधेयक की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पहले सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की।



जबकि सरकार ने इसे लाखों लोगों के सुझावों पर आधारित बताते हुए तत्काल चर्चा का फैसला सही ठहराया। आखिरकार भारी हंगामे के बाद यूसीसी बिल बिना विपक्ष के पास सरकार ने पास करवा लिया।



कांग्रेस का फोकस कानून नहीं, प्रक्रिया पर रहा

विपक्ष का कहना था कि समान नागरिक संहिता जैसा बड़ा और संवेदनशील विधेयक बिना विस्तृत जांच और चर्चा के पारित नहीं होना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि पहले इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए ताकि सभी कानूनी और सामाजिक पहलुओं की गहराई से समीक्षा हो सके।



कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी आरोप लगाया कि इतनी महत्वपूर्ण व्यवस्था को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे व्यापक विमर्श का अवसर सीमित हो जाएगा।



सरकार का दावा- जनता की राय से तैयार हुआ मसौदा

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह केवल सरकार का फैसला नहीं है। उनके मुताबिक करीब 10 लाख लोगों के सुझाव लेने के बाद यह विधेयक तैयार किया गया है।



सरकार का तर्क है कि यूसीसी "एक देश, एक समान कानून" की भावना को मजबूत करेगा और यह जनभावनाओं के अनुरूप कदम है।



भाजपा ने विपक्ष पर साधा राजनीतिक निशाना

भाजपा विधायकों ने यूसीसी को जनता की मांग बताते हुए कांग्रेस के विरोध को राजनीतिक बताया। विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि प्रदेश के लाखों लोगों ने यूसीसी का समर्थन किया है। वहीं रामेश्वर शर्मा ने दावा किया कि यह कानून लागू होने के बाद कांग्रेस की राजनीति प्रभावित होगी। भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने भी इसे जनता की अपेक्षाओं से जुड़ा फैसला बताया।



विधानसभा अध्यक्ष ने क्या कहा?

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष से आग्रह किया कि विरोध दर्ज कराने के बजाय चर्चा में हिस्सा लें ताकि उनके सुझाव और आपत्तियां रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकें।



उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष परिस्थितियों में उसी दिन विधेयक प्रस्तुत कर उस पर चर्चा कराना नियमों के दायरे में संभव है और इस मामले में सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।



अल्पसंख्यक अधिकारों का मुद्दा भी उठा

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि इस कानून से एक विशेष वर्ग प्रभावित हो सकता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद-29 का हवाला देते हुए कहा कि पहले विधेयक की विस्तृत जांच होनी चाहिए।



आरिफ अकील ने भी सवाल उठाया कि जब राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी अभी लागू नहीं हुई है तो मध्य प्रदेश में इसे इतनी प्राथमिकता के साथ लाने की क्या वजह है।



असली लड़ाई कानून से ज्यादा प्रक्रिया की

पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम संदेश यह रहा कि विधानसभा में टकराव केवल यूसीसी के पक्ष और विपक्ष का नहीं था। बहस का बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित रहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को किस प्रक्रिया के तहत लाया जाए।



यानी राजनीतिक संदेशों के बीच 'कानून बनाम प्रक्रिया' की बहस ने पूरे दिन की कार्यवाही की दिशा तय कर दी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति में भी प्रमुख विमर्श बनने के संकेत दे रहा है।



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