एमपी में जल्द आएगा UCC, राज्यपाल की मंजूरी, अब राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में यूसीसी (UCC) विधेयक को मिली राज्यपाल की मंजूरी।
- बहुविवाह और निकाह हलाला पर अब लगेगी सख्त रोक।
- अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार करेगा यूसीसी विधेयक।
- उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी की राह पर।
- लिव-इन रिश्तों को भी मिलेगा कानूनी दायरा।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल ने यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी है। इससे राज्य में बहुविवाह और निकाह-हलाला पर रोक लगेगी। विधेयक अब राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसे विधानसभा ने 21 जुलाई को पारित किया था। मंजूरी के बाद इसके प्रावधान प्रभावी होंगे।
राज्यपाल ने दी मंजूरी
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विधानसभा से पारित यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी है।
अब विधि एवं विधायी विभाग इसे मुख्य सचिव के जरिए राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजेगा। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी संबंधित अधिकारियों से समन्वय करेंगे।
पिछले महीने पारित हुआ था विधेयक
मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को यूसीसी विधेयक पारित किया था। इसके बाद यह राज्यपाल की मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया। राज्यपाल ने इस पर कानूनी राय मांगी थी।
विधि एवं विधायी शाखा से अभिमत मिलने और मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात के बाद विधेयक वापस राज्य सरकार को भेजा गया। अब मंजूरी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजने की तैयारी है।
राष्ट्रपति की मंजूरी क्यों जरूरी
संसदीय कार्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यूसीसी विधेयक में कई प्रावधान केंद्रीय कानूनों से जुड़े हैं। इसी वजह से इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजना जरूरी है।
विधेयक केंद्र के पास पहुंचने के बाद केंद्रीय गृह विभाग भी इस पर कानूनी राय देगा। यदि विधेयक संवैधानिक कसौटी पर उपयुक्त पाया जाता है, तो राष्ट्रपति की मंजूरी मिल सकती है।
राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद विधि एवं विधायी विभाग विधेयक को राजपत्र में अधिसूचित करेगा। अधिसूचना जारी होते ही इसके प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे। राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र स्तर पर प्रक्रिया जल्द पूरी हो।
क्या-क्या बदलेगा यूसीसी में
प्रस्तावित यूसीसी में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को लेकर समान कानूनी व्यवस्था का प्रावधान है। इसमें बहुविवाह और निकाह हलाला पर रोक का प्रावधान शामिल है। तलाक के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप को भी नियमों के दायरे में लाया गया है। इसके लिए पंजीयन की व्यवस्था प्रस्तावित है। ऐसे संबंधों से जन्मी संतान को कानूनी अधिकार और संपत्ति से जुड़े प्रावधान भी दिए गए हैं।
उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश की बारी
देश में फिलहाल उत्तराखंड इकलौता राज्य है जहां यूसीसी लागू है। गुजरात विधानसभा भी यूसीसी विधेयक पारित कर उसे केंद्र की अनुमति के लिए भेज चुकी है। असम समेत कुछ अन्य राज्यों में भी यूसीसी को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
9.5 लाख सुझावों का डाटा सुरक्षित
सामान्य प्रशासन विभाग ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से यूसीसी पर सुझाव देने वाले करीब 9.5 लाख लोगों का डाटा सुरक्षित रखवाया है। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित करने की व्यवस्था की है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में UCC विधेयक को किसने मंजूरी दी
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने यूसीसी विधेयक को मंजूरी दी है। यह विधेयक विधानसभा से पहले ही पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। - यूसीसी विधेयक में क्या प्रावधान हैं
यूसीसी विधेयक में बहुविवाह और निकाह हलाला पर रोक का प्रावधान है। विवाह, तलाक और उत्तराधिकार को लेकर समान कानूनी व्यवस्था दी गई है। लिव-इन संबंधों के लिए पंजीयन भी अनिवार्य किया गया है। - यूसीसी विधेयक कब से लागू होगा
यूसीसी विधेयक फिलहाल राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा। अधिसूचना जारी होते ही इसके प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे।
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