MP में UCC की तैयारी तेज: दिल्ली में पहली बैठक, जिलों में होगी जनसुनवाई
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।
- यूसीसी समिति की पहली बैठक दिल्ली में होगी।
- जिला और भोपाल स्तर पर जनसुनवाई का भी प्लान है।
- आदिवासी समुदायों को कुछ प्रावधानों से बाहर रखा जा सकता है।
- लिव-इन रिलेशनशिप पर भी विशेष नियम बन सकते हैं।
मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति पहले ही बनाई जा चुकी है। अब उस समिति के कामकाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
दिल्ली में होगी समिति की पहली बैठक
समिति की अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई हैं। उनकी और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार, 12 मई को दिल्ली में समिति की पहली बैठक होने की संभावना है। समिति का मुख्य कार्यालय भी दिल्ली में ही स्थापित किया जाएगा।
यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि इसी में समिति के काम की दिशा और समयसीमा तय होने की उम्मीद है। सरकार चाहती है कि यह पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।
जनसुनवाई और वेबसाइट से मिलेगी जनभागीदारी
मध्यप्रदेश सरकार इस मुद्दे पर आम लोगों की राय भी जानना चाहती है। इसके लिए जिला स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इसके अलावा भोपाल में भी अलग से जनसुनवाई होगी। यानी प्रदेश के हर हिस्से से लोगों तक पहुंचने की कोशिश होगी।
सरकार एक विशेष वेबसाइट भी तैयार करवा रही है। इस वेबसाइट पर नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयोगी होगा जो जनसुनवाई में सीधे शामिल नहीं हो सकते हैं।
आदिवासी समुदाय पर विशेष ध्यान
मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी काफी बड़ी है। इन समुदायों की अपनी पारंपरिक परंपराएं और सामाजिक कानून सदियों से चले आ रहे हैं। सरकार इन्हें UCC (Uniform Civil Code) के कुछ प्रावधानों से बाहर रखने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
उत्तराखंड और गुजरात ने पहले से ही आदिवासी परंपराओं को UCC से अलग रखने का रास्ता अपनाया है। मध्य प्रदेश भी उसी मॉडल पर आगे बढ़ सकता है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि किसी तरह का सामाजिक विवाद पैदा न हो और आदिवासी संस्कृति सुरक्षित रहे।
लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त रुख संभव
UCC के मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए जा सकते हैं। समिति को इन संबंधों के पंजीयन (Registration), अधिकारों और जिम्मेदारियों पर सुझाव देने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश इस मामले में उत्तराखंड और गुजरात से भी ज्यादा सख्त रुख अपना सकता है।
यह प्रावधान युवाओं और शहरी वर्ग को सीधे प्रभावित कर सकता है। इसलिए समिति की सिफारिशों का इंतजार बड़ी संख्या में लोगों को रहेगा।
उत्तराखंड और गुजरात से सबक
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था जिसने UCC लागू किया है। गुजरात भी इसी राह पर आगे बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश इन दोनों राज्यों के अनुभव से सीख लेकर अपना मसौदा तैयार करना चाहता है। खासकर आदिवासी और लिव-इन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों राज्यों का अनुभव काम आएगा।
UCC पर सियासी तूफान को नीचे दिए गए ग्राफ से समझें...
जानें यूसीसी आखिर है क्या?
यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा कानूनी ढांचा है जो सभी धर्मों के लोगों पर एक जैसे नियम लागू करेगा। इसमें शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामले शामिल हैं। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ (Personal Law) हैं।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जिसने यूसीसी लागू किया है। मध्यप्रदेश में भी इस पर चर्चा जोर पकड़ रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के संकेतों के बाद राजनीतिक दलों में इस पर बहस और तेज हो गई है।
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