MP यूसीसी की फाइनल रिपोर्ट तैयार, समिति ने सीएम को सौंपी, मानसून सत्र में होगा पेश
समझें क्या है पूरा मामला
- UCC समिति ने मुख्यमंत्री को अंतिम रिपोर्ट सौंपी।
- रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है।
- प्रस्तावित विधेयक में 404 धाराएं शामिल हैं।
- समिति को 9.58 लाख जन परामर्श मिले।
- ST समुदाय को कानून से बाहर रखने की सिफारिश।
सीएम को सौंपा गया प्रतिवेदन
सोमवार को समान नागरिक संहिता (UCC – Uniform Civil Code) के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को संहिता का प्रतिवेदन सौंपा। मुख्यमंत्री यादव ने तय समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों का आभार जताया।
इस मौके पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह और शोभा पैठणकर मौजूद रहे। साथ ही समिति के सदस्य सचिव अजय कटेसरिया भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
तीन खंडों में तैयार हुई रिपोर्ट
मुख्यमंत्री को सौंपे गए प्रतिवेदन में समिति की रिपोर्ट तीन खंडों में संकलित है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं शामिल हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर के विभिन्न कानूनों और प्रथाओं का विश्लेषण किया गया है। इस खंड में कुल 10 अध्याय हैं।
दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप के रूप में है। यह प्रारूप मध्य प्रदेश में प्रचलित कानूनों और नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।
तीसरे खंड में जन परामर्श का पूरा प्रतिवेदन है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और वेबसाइट के जरिए बड़े पैमाने पर जन परामर्श किया था। इस प्रक्रिया में समिति को 9.58 लाख से ज्यादा सुझाव मिले। इनका विश्लेषण प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार आधार पर इसी खंड में शामिल किया गया है।
अनुसूचित जनजातियों को मिलेगी छूट
समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है। राज्य सरकार ने इस उच्च स्तरीय समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत व पारिवारिक विषयों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
समिति ने मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप यह प्रारूप तैयार किया है। इसमें लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, विविध रीति-रिवाजों को अप्रभावित रखने और संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान करने पर ध्यान दिया गया है।
अनुपस्थित सदस्यों का भी जताया आभार
मुख्यमंत्री यादव ने समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई का भी धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही समिति के वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर का भी आभार जताया गया, जो व्यक्तिगत कारणों से इस मौके पर मौजूद नहीं हो सके।
अब आगे क्या होगा
समिति से मिला प्रतिवेदन अब मध्य प्रदेश सरकार के विधि विभाग को सौंप दिया गया है। विधेयक के परिमार्जन और वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे मंत्रि-परिषद की मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद विधेयक को मानसून सत्र में ही विधानसभा में रखे जाने की संभावना है।
FAQ
- मध्य प्रदेश यूसीसी समिति की रिपोर्ट में क्या-क्या शामिल है?
यूसीसी की रिपोर्ट तीन खंडों में है। पहले में अनुशंसाएं, दूसरे में विधेयक का प्रारूप और तीसरे में जन परामर्श का विवरण शामिल है। - प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में कितनी धाराएं हैं?
प्रस्तावित विधेयक में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं। यह मध्य प्रदेश के मौजूदा कानूनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
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