एमपी में दिव्यांग परेशान, UDID कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार, सामने आए आंकड़े

Manya Jain | Aug 16, 2026, 17:49 IST
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मध्यप्रदेश में UDID कार्ड बनने में औसतन 253 दिन लग रहे हैं। 12 हजार 213 आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं। संसद में पेश आंकड़ों से इस देरी का खुलासा हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश में दिव्यांगों के लिए UDID कार्ड बनने की प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है।
  • एक दिव्यांग व्यक्ति को कार्ड पाने में औसतन 253 दिन लगते हैं।
  • राज्य में 12,213 आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं।
  • संसद में सरकार ने खुद यह आंकड़े पेश किए हैं।
  • यह देरी पेंशन, शिक्षा और अन्य सुविधाओं पर सीधा असर डाल रही है।

क्या है UDID कार्ड

विशिष्ट दिव्यांगता पहचान यानी यूडीआईडी (UDID – Unique Disability Identity) परियोजना दिव्यांगों को डिजिटल पहचान देने के लिए बनाई गई है। इस कार्ड के जरिए दिव्यांग व्यक्ति सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठा पाते हैं। मध्यप्रदेश में यह परियोजना भारी सुस्ती का शिकार हो गई है।



संसद में सरकार ने खुद दी जानकारी

यह कोई अटकल या निजी दावा नहीं है। संसद में दिए गए सरकार के आधिकारिक जवाब से यह पुष्टि होती है कि राज्य में एक दिव्यांग व्यक्ति को अपना वैध पहचान पत्र या दिव्यांगता प्रमाण पत्र पाने के लिए औसतन 253 दिन यानी करीब साढ़े आठ महीने इंतजार करना पड़ रहा है। राज्यसभा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने यह आंकड़े सदन के सामने रखे।



यह देरी दिव्यांगों के लिए मानसिक और प्रशासनिक परेशानी बन चुकी है, क्योंकि पेंशन, शिक्षा और दूसरी सरकारी मदद के लिए यह कार्ड जरूरी होता है।



हजारों आवेदन अटके, सरकार ने खुद माना

मंत्री बीएल वर्मा के संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक, मध्यप्रदेश में कार्ड बनने की प्रक्रिया धीमी होने के साथ-साथ हजारों आवेदन भी कई महीनों से सरकारी विभागों में फंसे हुए हैं। यह आंकड़े किसी निजी रिपोर्ट के नहीं, बल्कि खुद सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए हैं, इसलिए इनकी प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठता।



सरकार के मुताबिक राज्य में वर्तमान में 12 हजार 213 आवेदन ऐसे हैं जो 6 महीने से भी ज्यादा समय से पेंडिंग हैं। वहीं 3 महीने से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या 14 हजार 288 है।



अब तक कितने कार्ड बने, सरकारी आंकड़ा

संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 से 5 अगस्त 2026 तक की अवधि में मध्यप्रदेश से कुल 58,156 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से चार लाख 819 कार्ड अब तक बनाए जा चुके हैं। वहीं 16 हजार 396 आवेदनों को खारिज कर दिया गया है।



सरकार ने यह भी बताया कि वर्तमान में कुल 18 हजार 510 मामले पोर्टल पर अलग-अलग चरणों में लंबित हैं।



पोर्टल के लाइव आंकड़े भी करते हैं पुष्टि

संसद में दिए गए आंकड़ों के अलावा, यूडीआईडी पोर्टल के "डिस्ट्रिक्ट/हॉस्पिटल-वाइज पेंडेंसी रिपोर्ट" सेक्शन का ताजा डेटा भी मध्यप्रदेश की स्थिति की पुष्टि करता है। इस पोर्टल डेटा के मुताबिक राज्य में 3 महीने तक 4,147 आवेदन, 3-6 महीने के बीच 1,567 आवेदन और 6 महीने से ज्यादा 6,956 आवेदन पेंडिंग हैं। कुल पेंडिंग आवेदनों की संख्या 12,670 बताई गई है।



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पोर्टल के मुताबिक पिछले 3 महीनों में 16 हजार 503 कार्ड जारी हुए हैं और औसत प्रोसेसिंग समय 195 दिन दर्ज है। यह आंकड़ा संसद में दिए गए 253 दिन के आंकड़े से कुछ कम है, लेकिन दोनों ही सरकारी सोर्स इस बात की पुष्टि करते हैं कि मध्यप्रदेश में UDID कार्ड बनने में अब भी लंबा समय लग रहा है।



पूरे देश में भी यही हाल, सरकार का जवाब

संसद में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में इस समय 5.93 लाख से अधिक आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से लंबित पड़े हैं।



संसद में जब जिला चिकित्सा बोर्डों की बैठकों में हो रही देरी पर सवाल पूछा गया, तो सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि इन बैठकों का समय और आवृत्ति राज्य सरकारों और संबंधित अस्पतालों की स्थानीय जरूरतों तथा डॉक्टरों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। केंद्र सरकार इसकी कोई एक समान आवृत्ति तय नहीं करती।



सुधार के लिए सरकार के अपने दावे

संसद में दिए गए जवाब में केंद्र सरकार ने स्थिति सुधारने के लिए कई कदमों की जानकारी भी दी है। इनमें पोर्टल को अपग्रेड करना, डेटाबेस को आधार से जोड़ना और डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देना शामिल है।



इसके बावजूद, सरकार के अपने आंकड़ों के हिसाब से मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य में 253 दिनों का औसत प्रसंस्करण समय अब भी लंबा है। पोर्टल का ताजा 195 दिन का आंकड़ा बताता है कि हालात में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन देरी की समस्या पूरी तरह हल नहीं हुई है।



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