मुरैना का दिव्यांग शिक्षक फर्जीवाड़ा, AIIMS मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित नहीं हुए शिक्षक
Ratan Kumar Mishra | Jul 14, 2026, 20:13 IST
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मुरैना में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले छह शिक्षक एम्स भोपाल की मेडिकल जांच में उपस्थित नहीं हुए। जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है।
मुरैना जिले के सरकारी स्कूलों में फर्जी दिव्यांगता से नौकरी पाने का मामला सामने आया है। छह शिक्षकों को एम्स भोपाल में मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया था। लेकिन कोई भी शिक्षक जांच के लिए वहां नहीं पहुंचा। इससे शक और गहरा गया है कि इन शिक्षकों ने गलत तरीके से नौकरी पाई थी। अब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में है।
मुरैना में दिव्यांगता के फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला पहले भी उठ चुका था। इसी को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने जिला शिक्षा अधिकारी मुरैना को पत्र लिखा था। यह पत्र 13 जून 2023 को भेजा गया था। इसमें छह शिक्षकों की दिव्यांगता जांच एम्स भोपाल में कराने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद 11 दिसंबर 2025 को एक रिमाइंडर पत्र भी भेजा गया।
इसके जवाब में जिला शिक्षा अधिकारी मुरैना ने भी आदेश जारी किया। सभी छह शिक्षकों को एम्स भोपाल जाकर आंखों की दिव्यांगता की जांच कराने को कहा गया। शिक्षकों को 25 जून 2026 तक मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना था। लेकिन तय समय पर कोई शिक्षक जांच के लिए नहीं पहुंचा। एम्स भोपाल ने इसकी सूचना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दे दी है।
जांच से गायब रहने वाले शिक्षकों में महेश कुमार शर्मा शामिल हैं। वे शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय सुमावली में पदस्थ हैं। राज किशोर शर्मा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सहरेयन का पुरा में कार्यरत हैं। बृजेश कुमार उपाध्याय उमावि नगरा, पोरसा में शिक्षक हैं। रवि कुमार पाराशर उमावि मामचोन में पदस्थ हैं। सत्या शर्मा उमावि कुरावली में और कुलदीप शर्मा उमावि चेतापुरा में कार्यरत हैं। इन सभी की भर्ती वर्ष 2020-21 में हुई थी।
यह सभी शिक्षक वर्ष 2020-21 की भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त हुए थे। उस समय इन सभी ने आंखों की दिव्यांगता का प्रमाण पत्र लगाया था। दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर इन्हें आरक्षित श्रेणी में नौकरी मिली। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रमाण पत्र असली थे। शिक्षकों का जांच से दूर रहना इस शक को और पुख्ता करता है।
जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह इंदौलिया ने इस मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि सभी संदिग्ध शिक्षकों को पत्र भेजकर एम्स भोपाल बुलाया गया था। मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होने के आदेश दिए गए थे। लेकिन कोई भी शिक्षक जांच के लिए नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि इन शिक्षकों ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है। विभाग अब इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करेगा।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि विभाग किस तरह की कार्रवाई करेगा। लेकिन मेडिकल जांच में गैरहाजिर रहना इन शिक्षकों के खिलाफ बड़ा सबूत माना जा रहा है। शासन से वेतन ले रहे इन शिक्षकों पर अब जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई हो सकती है। इसमें नौकरी से बर्खास्तगी से लेकर वेतन वसूली तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है। मामले पर आगे की जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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जांच का पूरा घटनाक्रम
इसके जवाब में जिला शिक्षा अधिकारी मुरैना ने भी आदेश जारी किया। सभी छह शिक्षकों को एम्स भोपाल जाकर आंखों की दिव्यांगता की जांच कराने को कहा गया। शिक्षकों को 25 जून 2026 तक मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना था। लेकिन तय समय पर कोई शिक्षक जांच के लिए नहीं पहुंचा। एम्स भोपाल ने इसकी सूचना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दे दी है।
गैरहाजिर शिक्षकों के नाम
2020-21 में हुई भर्ती
अधिकारी ने क्या कहा
आगे क्या होगा कार्रवाई
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