महाकाल की तर्ज पर अब उज्जैन कालभैरव मंदिर में भी वीआईपी कल्चर, इतना लगेगा शुल्क
Ujjain Kaal Bhairav: मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन से एक बड़ी खबर सामने आई है। बाबा महाकाल के रक्षक कहे जाने वाले कालभैरव मंदिर में बड़ा बदलाव हुआ है। अब यहां वीआईपी तरीके से दर्शन करने के लिए जेब ढीली करनी होगी। मंदिर प्रशासन ने इसके लिए बकायदा एक नया नियम लागू कर दिया है।
यह नया नियम आज यानी बुधवार से पूरी तरह लागू हो गया है। इसके तहत अब खास दर्शन के लिए रसीद कटवानी होगी। इस नई व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं के बीच काफी चर्चाएं हो रही हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा को देखकर यह फैसला लिया है।
कालभैरव मंदिर में VIP एंट्री के लिए कितने पैसे देने होंगे
अगर आप बिना लाइन के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए भक्तों को 500 रुपए देने होंगे। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, वीआईपी दर्शन के लिए 500 रुपए की रसीद दी जाएगी।
इसके बाद भक्तों को एक अलग रास्ते से ले जाया जाएगा। इस रसीद के जरिए श्रद्धालु सामान्य कतार से पूरी तरह बच जाएंगे। उन्हें सीधे मंदिर के मेन गर्भगृह तक आसानी से पहुंचाया जाएगा।
गर्भगृह पहुंचने के बाद श्रद्धालु बाबा को मदिरा का भोग लगा सकेंगे। भक्त अपनी लाई मदिरा वहां मौजूद पुजारी को सौंप देंगे। पुजारी भक्तों के सामने ही बाबा कालभैरव को मदिरा का भोग लगाएंगे।
महाकाल दर्शन फीस से दोगुना है कालभैरव का टिकट
बता दें कि ये फीस महाकाल मंदिर से भी ज्यादा है। महाकाल के विभिन्न दर्शन शुल्कों के मुकाबले यह दाम दोगुना है। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के लिए प्रति व्यक्ति 200 रुपए लगते हैं। वहीं संध्या और शयन आरती का ऑनलाइन शुल्क 250 रुपए है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन में शीघ्र दर्शन की व्यवस्था भी केवल 250 रुपए में है। लेकिन कालभैरव मंदिर में इसके लिए 500 रुपए तय किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इसी तर्ज पर यह व्यवस्था बनाई गई है। इससे मंदिर के वीआईपी प्रोटोकॉल को बेहतर ढंग से संभाला जा सकेगा।
दलालों पर लगेगी लगाम
इस मामले पर कालभैरव मंदिर की प्रशासक संध्या मार्कण्डेय ने जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह व्यवस्था सीमित स्तर पर शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में इस व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
इसके बाद जरूरत के अनुसार इसमें और जरूरी बदलाव किए जाएंगे। मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे दलाली रुकेगी। कई बाहरी तत्व भोले-भाले भक्तों से पैसे ठग रहे थे।
वे पैसे लेकर लोगों को गर्भगृह तक चोरी-छिपे ले जाते थे। अब यह अवैध वसूली पूरी तरह से बंद हो जाएगी। इस नई व्यवस्था से होने वाली कमाई सीधे मंदिर खाते में जाएगी।
यह राशि अब मंदिर के विकास और आय का मुख्य स्रोत बनेगी। सबसे जरूरी बात यह है कि आम भक्तों को कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं, सामान्य कतार से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सेवा मुफ्त रहेगी।
हर दिन आते हैं हजारों श्रद्धालु
उज्जैन के कालभैरव मंदिर में भक्तों की भारी आस्था जुड़ी हुई है। यहां हर दिन औसतन 50 से 60 हजार श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। जब भी कोई बड़ा पर्व या त्योहार आता है, तो भीड़ बढ़ जाती है। त्योहारों के दिनों में यह संख्या एक लाख को पार कर जाती है।
लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन काफी समय से परेशान था। प्रोटोकॉल दर्शन की मांग भी लगातार बहुत तेजी से बढ़ रही थी। इसी मांग और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे वीआईपी और आम लोगों को अलग-अलग सहूलियत मिलेगी।
उज्जैन के राजा महाकाल हैं, तो कालभैरव को क्यों कहा जाता है यहां का कोतवाल?
उज्जैन के असली राजाधिराज भगवान महाकाल हैं, जो इस पूरी सृष्टि के स्वामी हैं। लेकिन कालभैरव को इस नगरी का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी या कोतवाल माना गया है।
मान्यता है कि महाकाल की आज्ञा के बिना यहाँ कोई पत्ता भी नहीं हिल सकता। ठीक उसी तरह, कालभैरव की इजाजत के बिना कोई यहां रह नहीं सकता। कहा जाता है कि पुराने समय में उज्जैन की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं की थी।
आज भी लोग इन्हें शहर का सर्वोच्च रक्षक और राजा का सेनापति मानते हैं।यदि कोई व्यक्ति महाकाल के दर्शन करता है, तो उसे कालभैरव के द्वार भी जाना पड़ता है। तभी उसकी उज्जैन यात्रा पूरी और सफल मानी जाती है।
कष्टों से मुक्ति का सबसे बड़ा केंद्र है यह मंदिर
उज्जैन का कालभैरव मंदिर सदियों से अघोरियों और तांत्रिकों की साधना का मुख्य केंद्र रहा है। यहां मुख्य रूप से तामसिक पूजा की परंपरा रही है।
शास्त्रों के मुताबिक, कालभैरव की पूजा करने से इंसान को दीर्घायु प्राप्त होती है। इसके साथ ही अकाल मृत्यु का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति पर भूत-प्रेत, तंत्र बाधा या राहु-केतु का बुरा साया हो।
तो यहां आकर धागा बांधने से सभी तरह के कष्ट तुरंत दूर हो जाते हैं। शनिवार और रविवार के दिन इस मंदिर में भक्तों का बहुत बड़ा सैलाब उमड़ता है।
लोग अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और बाबा उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। इस मंदिर की सबसे चमत्कारी और अनोखी मान्यता मदिरा यानी शराब का भोग लगाना है। यहां आने वाले श्रद्धालु बाबा को प्रसाद के रूप में मदिरा चढ़ाते हैं।
FAQ
- उज्जैन के कालभैरव मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन के लिए कितना शुल्क तय किया गया है?
उज्जैन के प्रसिद्ध बाबा कालभैरव मंदिर में प्रोटोकॉल (VIP) दर्शन के लिए 500 रुपए का शुल्क तय किया गया है। यह व्यवस्था बुधवार से लागू कर दी गई है। इस शुल्क को देने के बाद श्रद्धालुओं को 500 रुपए की रसीद मिलेगी, जिससे वे सामान्य कतार से अलग होकर सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच सकेंगे। इसके जरिए श्रद्धालु बिना किसी भीड़ और परेशानी के सीधे बाबा कालभैरव को अपनी मदिरा का भोग लगा सकेंगे। - क्या कालभैरव मंदिर का नया वीआईपी दर्शन शुल्क महाकाल मंदिर से भी महंगा है?
हां, कालभैरव मंदिर का नया वीआईपी दर्शन शुल्क महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन शुल्क के मुकाबले दोगुना है। महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए प्रति श्रद्धालु 200 रुपए का शुल्क लगता है, जबकि संध्या और शयन आरती के साथ-साथ शीघ्र दर्शन व्यवस्था के लिए 250 रुपए का ऑनलाइन शुल्क निर्धारित है। इसके विपरीत, कालभैरव मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन के लिए भक्तों को 500 रुपए चुकाने होंगे। - कालभैरव मंदिर में इस नई शुल्क व्यवस्था को शुरू करने के पीछे प्रशासन का क्या उद्देश्य है?
कालभैरव मंदिर में हर दिन 50 से 60 हजार श्रद्धालु आते हैं, और त्योहारों पर यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है। बढ़ती भीड़ और वीआईपी दर्शन की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। इसके अलावा, कई बाहरी और असामाजिक तत्व भोले-भाले श्रद्धालुओं से पैसे लेकर उन्हें गर्भगृह में प्रवेश दिला रहे थे। इस नई व्यवस्था से दलालों पर लगाम लगेगी और दलालों के पास जाने वाला पैसा अब मंदिर की आय का आधिकारिक स्रोत बनेगा, जिसका उपयोग मंदिर के विकास के लिए किया जाएगा।
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