पूर्व मंत्री पारस जैन ने निधन से पहले लिया था संथारा, जानें क्या होता है यह व्रत
समझें क्या है पूरा मामला
- भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पारस जैन का सोमवार सुबह निधन हो गया।
- वे 77 साल के थे। वे कुछ दिनों से बीमार थे और इंदौर के अस्पताल में भर्ती थे।
- तीन दिन पहले उन्होंने संथारा ग्रहण किया था।
- उनकी अंतिम यात्रा सोमवार दोपहर 2 बजे उज्जैन से निकाली जाएगी।
कौन थे पारस जैन
पारस जैन मध्य प्रदेश भाजपा के अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे। वे उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से छह बार विधायक रहे। 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने उन्हें पहली बार मंत्री बनाया था। 1990 से वे सक्रिय राजनीति में थे। 1998 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार ने उन्हें हराया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद वे संगठन के कामों में लगातार सक्रिय रहे।
अस्पताल में भर्ती थे, तीन दिन पहले लिया संथारा
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक पारस जैन कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हें इंदौर के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उन्होंने तीन दिन पहले संथारा ग्रहण करने का फैसला लिया। सोमवार सुबह उनका निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर इंदौर से उज्जैन लाया जा रहा है।
संथारा क्या होता है, कैसे लिया जाता है
संथारा जैन धर्म की एक पुरानी परंपरा है। इसे सल्लेखना, समाधि-मरण या इच्छा-मरण भी कहा जाता है। दिगंबर परंपरा में इसे सल्लेखना कहते हैं, श्वेतांबर परंपरा में संथारा। यह व्रत साधु-साध्वी भी ले सकते हैं और गृहस्थ भी।
यह व्रत आमतौर पर तब लिया जाता है जब व्यक्ति बहुत बीमार हो या बुढ़ापे के आखिरी पड़ाव में हो। इसमें व्यक्ति धीरे-धीरे अन्न और जल का त्याग करता है। यह फैसला व्यक्ति खुद अपनी पूरी सहमति से लेता है। इसे परिवार और गुरु की मौजूदगी में लिया जाता है।
जैन समाज के अनुसार यह आत्महत्या से अलग है। उनका तर्क है कि आत्महत्या निराशा या तनाव में होती है। जबकि संथारा शांत मन से, समझ-बूझकर और मृत्यु को सहज रूप से स्वीकार करने का प्रयास है। इसे धार्मिक और आध्यात्मिक साधना माना जाता है।
साल 2015 में राजस्थान हाईकोर्ट ने संथारा को आत्महत्या के बराबर मानते हुए इस पर रोक लगाई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर स्टे लगा दिया था। तब से यह मामला अदालत में लंबित है और जैन समाज में यह परंपरा जारी है।
देहदान का संकल्प भी लिया था
परिजन के मुताबिक पारस जैन ने अपने जीवनकाल में नेत्रदान, देहदान और चर्मदान का संकल्प भी लिया था। अंतिम संस्कार से पहले उनकी इच्छा के मुताबिक दान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सीएम मोहन यादव पहुंचेंगे अंतिम विदाई देने
पारस जैन की अंतिम यात्रा उनके अरिहंत नगर स्थित निवास से हीरा मिल मार्ग होते हुए निकलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 1 बजे उज्जैन पहुंचेंगे। वे अंतिम विदाई देंगे। भाजपा नेताओं, सामाजिक संगठनों और उनके समर्थकों ने भी शोक व्यक्त किया है।
पहलवान नेता, रोज करते थे एक घंटा कसरत
पारस जैन युवावस्था में पहलवान भी रहे। समय मिलने पर वे अखाड़े जाते थे। रोज सुबह एक घंटा व्यायाम करना उनकी आदत थी। 2018 के विधानसभा चुनाव के समय वे 68 साल के थे, तब भी अखाड़े में कसरत करते थे। कसरत के बाद वे पपीता, भीगे बादाम, अखरोट, एक कटोरी मैथीदाना और एक गिलास दूध लेते थे। इसके बाद वे मंत्री और नेता की जिम्मेदारी निभाने में जुट जाते थे।
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