चार महीने में लागू हो सकता है एमपी में UPS, सरकारी कर्मचारियों को होगा फायदा
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार 50% सुनिश्चित पेंशन वाली यूपीएस लागू करने जा रही है।
- सरकार ने इसके लिए छह सदस्यीय कमेटी बनाई है।
- यह कमेटी चार महीने में सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।
- करीब ढाई लाख कर्मचारी यूपीएस के दायरे में आ सकते हैं।
- अध्यापक संवर्ग की सेवा गिनने को लेकर पेंच फंसा हुआ है।
मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार अब यूपीएस (Unified Pension Scheme) लागू करने की तैयारी में जुट गई है। इसमें कर्मचारियों को 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। इसके लिए सरकार ने एक कमेटी भी बना दी है। यह पूरी प्रक्रिया अगले कुछ महीनों में आगे बढ़ेगी।
क्या है पूरा प्लान
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन वाली यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस देने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने बुधवार, 16 सितंबर को एसीएस मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी बनाई है। यह कमेटी चार महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
रिपोर्ट आने के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। तभी इस पर अंतिम फैसला होगा। प्रदेश में 01 जनवरी 2005 या उसके बाद नियुक्त करीब चार लाख 83 हजार कर्मचारी अभी एनपीएस यानी नेशनल पेंशन स्कीम (National Pension Scheme) में हैं।
इनमें से करीब दो लाख 50 हजार अफसर और कर्मचारी यूपीएस के दायरे में आ सकते हैं। यानी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को इस बदलाव का सीधा फायदा मिल सकता है। यह आंकड़ा सरकार के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी है।
क्यों बनी कमेटी
कमेटी बनाने के पीछे सरकार का मकसद साफ है। सरकार चाहती है कि यूपीएस लागू करने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से जांच हो जाए। इसमें वित्तीय बोझ का हिसाब भी शामिल होगा। कमेटी यह भी देखेगी कि किन कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा। इसके अलावा पुरानी उलझनों को भी सुलझाने की कोशिश होगी।
एनपीएस बनाम यूपीएस
अभी एनपीएस व्यवस्था में कर्मचारी अपने वेतन से 10 प्रतिशत अंशदान देता है। वहीं सरकार की तरफ से 14 प्रतिशत अंशदान जमा होता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद 50 प्रतिशत पेंशन की कोई गारंटी नहीं होती। यही सबसे बड़ी दिक्कत मानी जाती रही है। इसी वजह से कर्मचारी लंबे समय से गारंटीशुदा पेंशन की मांग कर रहे थे।
यूपीएस में कर्मचारी का अंशदान पहले जैसा यानी 10 प्रतिशत ही रहेगा। लेकिन सरकार अब कुल 18.5 प्रतिशत अंशदान देगी। इसमें से 10 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी के अपने खाते में जाएगा। बाकी 8.5 प्रतिशत एक अलग पूल फंड में जमा होगा। इसी पूल फंड से पात्र कर्मचारियों की तय पेंशन सुनिश्चित की जाएगी।
कितनी मिलेगी पेंशन
यूपीएस के तहत पेंशन का गणित भी साफ तय किया गया है। यदि किसी कर्मचारी की सेवा 25 साल या उससे ज्यादा है तो उसे 50 प्रतिशत पेंशन मिलना तय है। यह पेंशन रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 12 महीने के औसत मूल वेतन पर आधारित होगी। जिन कर्मचारियों की सेवा 10 से 25 साल के बीच है, उन्हें सेवा अवधि के अनुपात में पेंशन मिलेगी।
यानी जितनी कम सेवा, पेंशन भी उतनी ही कम मिलेगी। कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान रखा गया है। ऐसे कर्मचारियों को हर महीने कम से कम 10 हजार रुपए पेंशन मिलेगी। यह न्यूनतम पेंशन की गारंटी उन कर्मचारियों के लिए राहत भरी है जिनकी सेवा कम है। इससे किसी भी पात्र कर्मचारी को खाली हाथ नहीं रहना पड़ेगा।
अध्यापकों के लिए पेंच
इस पूरी योजना में एक बड़ा पेंच अध्यापक संवर्ग को लेकर फंसा हुआ है। अध्यापक संवर्ग का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन साल 2018 में हुआ था। यदि यूपीएस के लिए उनकी सेवा 2018 से गिनी गई तो दिक्कत बढ़ सकती है। ऐसे में उनके 10 साल की सेवा 2028 में ही पूरी होगी। इसलिए बड़ी संख्या में अध्यापकों के लिए यह सवाल बेहद अहम हो गया है।
सरकार उनकी सेवा किस तारीख से मानेगी, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। अध्यापक संगठनों का कहना है कि उनकी असली सेवा संविलियन से पहले से गिनी जानी चाहिए। यदि सरकार सेवा 2018 से ही मानती है तो हजारों अध्यापकों को कई साल इंतजार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि यह मुद्दा कमेटी के लिए भी चुनौती बन सकता है। कमेटी को इस पर साफ सिफारिश देनी होगी।
किसे मिलेगा फायदा
यदि यूपीएस लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा पेंशन की सुनिश्चितता होगी। कर्मचारियों को अब रिटायरमेंट के बाद अपनी आमदनी को लेकर चिंता नहीं करनी पड़ेगी। खासकर लंबी सेवा देने वाले कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। छोटी सेवा वाले कर्मचारियों को भी न्यूनतम पेंशन की गारंटी मिल जाएगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल पूरा मामला कमेटी की रिपोर्ट पर टिका हुआ है। अगले चार महीने में कमेटी अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इसके बाद ही कैबिनेट में इस पर अंतिम फैसला हो सकेगा। तब तक कर्मचारियों और अध्यापकों को इंतजार करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अध्यापकों की सेवा अवधि को लेकर क्या रुख अपनाती है।
देश के कई राज्यों में यूपीएस को लेकर पहले से चर्चा चल रही है। केंद्र सरकार ने भी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह योजना पहले लागू कर दी थी। अब मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। इससे साफ है कि आने वाले समय में गारंटीशुदा पेंशन की मांग और तेज हो सकती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर लाखों सरकारी कर्मचारियों और अध्यापकों के भविष्य से सीधी जुड़ी है। रिटायरमेंट के बाद पेंशन की सुनिश्चितता किसी भी कर्मचारी के लिए आर्थिक सुरक्षा का बड़ा आधार होती है। यह फैसला सरकारी नियमों और तय प्रक्रिया के तहत कमेटी की सिफारिश पर आधारित होगा, इसलिए यह पारदर्शी और संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में है।
अध्यापक संवर्ग की सेवा गणना का मुद्दा सामाजिक न्याय से भी जुड़ा है, क्योंकि इससे हजारों अध्यापकों को समय पर पेंशन का लाभ मिलना तय होगा। यह जानकारी तथ्यों पर आधारित है और किसी पक्ष के खिलाफ नहीं है, इसलिए डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के मानकों पर भी खरी उतरती है।
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