अब गांवों पर भी पड़ेगा टैक्स का बोझ: पक्के घरों पर 1000 रुपए तक लगेगा संपत्ति कर
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के गांवों में अगले साल से संपत्ति कर लागू हो सकता है।
- पक्के घरों पर सालाना 500 से 1000 रुपए तक कर लग सकता है।
- कच्चे घरों को इस टैक्स से छूट मिलेगी।
- आदिवासी ब्लॉक में कर शून्य रखने पर विचार हो रहा है।
- जुलाई से गांवों में जलकर पहले ही वसूला जा रहा है।
सर्वे शुरू, तैयारी जोरों पर
जुलाई महीने से गांवों में जलकर लागू हो चुका है। अब पंचायतें एक नई तैयारी में जुट गई हैं। इस बार बारी है संपत्ति कर की।
गांवों में इसके लिए सर्वे का काम शुरू हो चुका है। सरकार ने इस सर्वे को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
इसके बाद जनवरी 2027 से गांवों में संपत्ति कर लागू करने का प्रस्ताव है। यानी अगले साल की शुरुआत से ही ग्रामीण परिवारों को यह नया टैक्स देना पड़ सकता है।
पक्के घर पर कितना टैक्स
नए प्रस्ताव के मुताबिक पक्के मकानों पर सालाना 500 से 1000 रुपए तक संपत्ति कर लग सकता है। यह राशि घर के आकार और बनावट पर निर्भर करेगी।
वहीं कच्चे और कवेलू वाले घरों को इस टैक्स से पूरी तरह छूट दी जाएगी। इससे गरीब और कमजोर तबके के परिवारों को राहत मिलेगी।
जनजातीय यानी आदिवासी ब्लॉक में कर की दर शून्य रखने की व्यवस्था हो सकती है। सरकार का मकसद है कि आदिवासी इलाकों के लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
23 हजार पंचायतों में मैपिंग जारी
फिलहाल प्रदेश की 23 हजार पंचायतों में संपत्तियों की मैपिंग का काम चल रहा है। इस काम में पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक जुटे हुए हैं।
हर घर और संपत्ति का ब्योरा दर्ज किया जा रहा है। इसी डेटा के आधार पर आगे टैक्स तय किया जाएगा।
टैक्स सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं रहेगा। पंचायतें ऐसे मॉडल पर भी काम कर रही हैं, जहां लाइटों की व्यवस्था वाली जगहों से बिजली कर वसूला जाए। इसके साथ ही सफाई और सीवेज टैक्स लगाने की भी तैयारी है।
मडला गांव का दिलचस्प उदाहरण
आय बढ़ाने के लिए पंचायतों को नए तरीके भी सुझाए जा रहे हैं। हाल ही में एक बैठक में पन्ना जिले के मडला गांव का उदाहरण दिया गया।
पता चला कि यहां फॉरेस्ट क्षेत्र में सुपारी की खेती होती है। इस जगह पर काफी लोग वाहनों से आते हैं।
इसे देखते हुए पंचायत ने हर वाहन पर 50 रुपए शुल्क लगा दिया। इससे मडला पंचायत को सालाना ढाई से तीन लाख रुपए की अतिरिक्त आय हो रही है। अब बाकी पंचायतों से भी ऐसी ही नई संभावनाएं तलाशने को कहा गया है।
पानी समिति के पास बड़े अधिकार
गांवों में जलकर वसूलने वाली पानी समिति को कई अहम अधिकार दिए गए हैं। यह समिति गरीब परिवारों को राहत भी दे सकती है।
अत्योदय श्रेणी के परिवार, विधवा और दिव्यांगजन जिनके पास आय का कोई साधन नहीं है, ऐसे पांच से 10 परिवारों का मासिक जल शुल्क माफ किया जा सकता है। नए कनेक्शन का शुल्क भी माफ करने का अधिकार समिति के पास है।
अगर कोई परिवार जल कर नहीं देता, तो समिति उसकी जलापूर्ति रोक सकती है। बकाया राशि पर पांच से 10 प्रतिशत तक पैनल्टी भी लगाई जा सकती है। पानी से वाहन धोने, मवेशी नहलाने या खेती में पानी के गलत इस्तेमाल पर भी जुर्माना लग सकता है। सीधे नल कनेक्शन से टुल्लू पंप जोड़कर पानी खींचने पर कनेक्शन काटा जा सकता है।
वॉश कमेटी का गठन
पानी, सफाई और स्वच्छता से जुड़े बड़े फैसलों के लिए एक खास कमेटी बनाई गई है। इसे वॉश यानी वॉटर, सेनिटेशन और हाइजीन कमेटी कहा जा रहा है।
नीतिगत फैसलों के लिए यह कमेटी जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में काम करेगी। तकनीकी मदद के लिए जिला पंचायत के सीईओ (CEO - Chief Executive Officer) की अध्यक्षता में अलग कमेटी बनाई गई है।
मरम्मत के लिए तय हुई एजेंसियां
गांवों में नल-जल सप्लाई की मरम्मत के लिए जनपद स्तर पर कई एजेंसियां तय की गई हैं। इन्हीं एजेंसियों से मरम्मत का काम कराया जाएगा।
पेंचकस, पाना, हेक्साब्लेड, बिजली टेप, प्लंबर टेप, टेस्टर और कच्ची रबर जैसी चीजों की दरें पहले से तय कर दी गई हैं। इसी तय दर के आधार पर भुगतान किया जाएगा। इससे मरम्मत कार्यों में मनमानी की गुंजाइश कम होगी।
जलकर में महिलाओं की बड़ी भागीदारी
गांवों में फिलहाल परिवारों से 60 से 120 रुपए प्रतिमाह जलकर वसूला जा रहा है। यह राशि हर पंचायत में अलग-अलग हो सकती है।
खास बात यह है कि 20 सदस्यीय पानी समिति में आधी यानी 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। इससे फैसलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पंचायत भवन से 200 रुपए प्रतिमाह जलकर लिया जा रहा है। नए कनेक्शन के लिए एक हजार से 10 हजार रुपए तक शुल्क तय किया गया है। यह राशि क्षेत्र और सुविधा के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर सीधे ग्रामीण परिवारों की जेब से जुड़ी है। संपत्ति कर और जलकर जैसे फैसले गांव के हर घर को प्रभावित करेंगे। पारदर्शी कर व्यवस्था स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने का एक हिस्सा है, जो संविधान की पंचायती राज व्यवस्था के मूल भाव से जुड़ा है।
गरीब और आदिवासी परिवारों को छूट देने का प्रावधान सामाजिक न्याय का ध्यान रखता है। पानी समिति में महिलाओं की आधी भागीदारी लैंगिक समानता को भी दिखाती है। यह खबर सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पाठकों को नए नियमों की सही और तथ्यात्मक जानकारी देना ही इसका मकसद है।
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