नए वक्फ एक्ट पर बोर्ड बनाने वाला MP पहला राज्य, जानें बोर्ड की कमाई का हिसाब
मध्यप्रदेश ने नए वक्फ अधिनियमके तहत वक्फ बोर्ड कापुनर्गठन कर दिया है। यह ऐसा करनेवाला देश का पहला राज्य बनगया है। बोर्ड में पहलीबार दो हिंदू सदस्य भीशामिल किए गए हैं। प्रदेश मेंवक्फ बोर्ड के पास कुल 23 हजार 118संपत्तियां दर्ज हैं। इनमेंसबसे ज्यादा संपत्तियांराजधानी भोपाल में मौजूद हैं।
साल 2025 में केंद्र सरकारने नया वक्फ अधिनियम लागूकिया था। इसी कानून के तहत अबराज्यों में वक्फ बोर्ड कापुनर्गठन होना है। मध्य प्रदेशने इस दिशा में सबसे पहलेकदम उठाया। राज्य सरकार ने नएनियमों के मुताबिक बोर्ड मेंसदस्यों की नियुक्ति कर दी है।
पहली बार दो हिंदू सदस्य
नए कानून मेंप्रावधान है कि बोर्ड में दो हिंदूसदस्य भी शामिल किए जासकते हैं। मध्य प्रदेश ने इसप्रावधान को सबसे पहले लागूकिया है। बोर्ड में कुल 11 सदस्योंको रखने का नियम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केनिर्देश पर यह अधिसूचनाराजपत्र में जारी हुई। नवगठितबोर्ड में सनवर पटेल को अध्यक्षबनाया गया है। मनोजमालपानी और अनिमेश भार्गव को पहलीबार हिंदू सदस्य के तौर परजगह मिली है।
प्रदेश में 23 हजार संपत्तियां
मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की वेबसाइट केअनुसार राज्य में कुल23 हजार 118 वक्फ संपत्तियां दर्जहैं। इनमें मस्जिद,कब्रिस्तान, ईदगाह, दरगाह और मदरसेशामिल हैं। यह पूरा रिकॉर्डबोर्ड के आधिकारिक पोर्टल परउपलब्ध है।
जिलेवारआंकड़ों में भोपाल सबसे आगे है।भोपाल में 4 हजार 475 वक्फसंपत्तियां दर्ज हैं। इसके बाद उज्जैनमें 1 हजार 473 और इंदौर में1 हजार 307 संपत्तियां हैं।शाजापुर में 1 हजार 213, विदिशा में1 हजार 11 और रतलाम में 907संपत्तियां दर्ज हैं।
वक्फ बोर्ड की सालाना कमाई
वक्फबोर्ड की कमाई का जरिया कईस्रोतों से जुड़ा है। बोर्ड कीवेबसाइट के मुताबिक हर सालकरोड़ों रुपए की आय होतीहै। इसमें सरकारी अनुदान काबड़ा हिस्सा शामिल है।
चंदानिगरानी शुल्क से भीबोर्ड को नियमित आय मिलती है।इसके अलावा अन्य स्रोतोंसे भी पैसा जुटायाजाता है। यह पूरी राशिवक्फ संपत्तियों के रखरखावमें खर्च होती है।
वक्फ बोर्ड का असली काम
मध्य प्रदेशवक्फ बोर्ड, वक्फअधिनियम 1995 के तहत बनी एककानूनी संस्था है। इसकामुख्यालय राजधानी भोपाल मेंस्थित है। बोर्ड का मुख्यकाम वक्फ संपत्तियों काप्रबंधन और सुरक्षा करनाहै।
बोर्ड सभी रजिस्टर्डसंपत्तियों का रिकॉर्ड भीरखता है। यह संपत्तियोंको अवैध कब्जे से बचानेका काम करता है। विवाद कीस्थिति में बोर्ड कानूनी कार्रवाईभी करता है। संपत्तियों सेमिलने वाली आय धार्मिक, शैक्षणिकऔर सामाजिक कल्याण कार्योंमें लगाई जाती है।
क्यों अहम है यह कदम
मध्य प्रदेशका यह कदम बाकी राज्योंके लिए एक उदाहरण बन सकताहै। नए वक्फ कानून को लेकर देशभरमें अलग-अलग राय सामने आई हैं।कुछ लोग इसे पारदर्शिताबढ़ाने वाला कदम मानते हैं। वहींकुछ पक्ष इसके प्रावधानों पर सवालभी उठाते रहे हैं।
मध्यप्रदेश में बोर्ड का पुनर्गठनबिना विवाद के पूरा हो गया है।यह प्रक्रिया आने वाले समयमें अन्य राज्यों के लिएमॉडल बन सकती है। बोर्ड केनए सदस्यों कीनियुक्ति से प्रशासनिकप्रक्रिया भी तेज होगी। इससे वक्फसंपत्तियों के प्रबंधन मेंसुधार की उम्मीद जताई जारही है।
FAQ
- मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड क्यों चर्चा में है?
मध्य प्रदेश नए वक्फ अधिनियम के तहत बोर्ड पुनर्गठित करने वाला पहला राज्य बना है। बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्य भी शामिल किए गए हैं। यह कदम देशभर में चर्चा का विषय बना है। - प्रदेश में कितनी वक्फ संपत्तियां हैं?
मध्य प्रदेश में कुल 23 हजार 118 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें सबसे ज्यादा 4 हजार 475 संपत्तियां भोपाल में मौजूद हैं। बाकी संपत्तियां उज्जैन, इंदौर, शाजापुर जैसे जिलों में हैं। - वक्फ बोर्ड की कमाई कहां से होती है?
बोर्ड को सरकारी अनुदान और चंदा निगरानी शुल्क से आय होती है। इसके अलावा अन्य स्रोतों से भी पैसा मिलता है। यह राशि संपत्तियों के रखरखाव में खर्च होती है।
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