एमपी में 247 मंदिरों की जमीन नीलामी पर भड़के संत, आंदोलन की दी चेतावनी
Aman Vaishnav | Jul 06, 2026, 15:13 IST
एमपी में मंदिरों की जमीन नीलामी पर संत भड़के
मध्य प्रदेश सरकार के मंदिर जमीन नीलामी फैसले पर गुना में संत-महंत भड़क गए हैं। 247 से ज्यादा मंदिरों के पुजारियों को नोटिस मिले हैं। संतों का कहना है जमीनें सरकार की नहीं हैं। पुजारी संघ ने सरकार से पुजारियों को कर्मचारी घोषित करने की मांग की है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार मठ-मंदिरों की जमीन नीलाम करने जा रही है।
- गुना में 247 से ज्यादा मंदिरों को नोटिस भेजे गए हैं।
- पुजारियों और संतों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।
- पुजारी संघ ने सरकार से बड़ी मांग रखी है।
- जल्द भोपाल में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
गुना में मंदिर जमीन पर छिड़ा विवाद
गुना के भुजरिया तालाब स्थित प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में एक अहम बैठक हुई। यह बैठक मठ मंदिर पुजारी संघ जिला गुना ने बुलाई थी।
बैठक की अध्यक्षता महंत राघवेंद्र दास महाराज ने की थी। इसमें जिले भर के पुजारी और संत शामिल हुए। सभी ने सरकार के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई।
247 मंदिरों को भेजे गए नोटिस
वक्ताओं ने कहा कि सरकार का मकसद साफ है। सरकार प्राचीन मठ-मंदिरों की जमीनें नीलाम करना चाहती है। संतों ने इसे पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया। उनका कहना है कि यह कदम धार्मिक परंपराओं पर सीधा हमला है।
जमीनें सरकार की नहीं हैं, संतों का दावा
संतों ने कहा कि यह जमीनें प्राचीन काल में राजाओं और दानदाताओं ने दी थीं। यह दान भगवान के भोग और मंदिर के रखरखाव के लिए था। इसका इस्तेमाल पुजारियों के भरण-पोषण के लिए भी होता आया है। इसलिए संतों का मानना है कि सरकार का इन पर कोई हक नहीं बनता।
पुजारियों को कर्मचारी बनाने की मांग
संघ ने मांग की है कि पुजारियों को भी शासकीय सेवकों जैसी सुविधाएं मिलें। इसमें हर महीने पूरा वेतन और भत्ते शामिल हों। पुजारियों का कहना है कि यह उनकी आजीविका से जुड़ा सवाल है। इसलिए सरकार को गंभीरता से इस पर विचार करना चाहिए।
भोपाल में बड़े आंदोलन की चेतावनी
इसके तहत हर गांव, ब्लॉक और तहसील स्तर पर बैठकें होंगी। पदाधिकारी पुजारियों को एकजुट करने का काम करेंगे। इसके बाद राजधानी भोपाल में बड़ा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
संतों ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी, ऐसा संतों ने कहा।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप
कांग्रेस के मुताबिक गुना जिले के 247 सरकारी मंदिरों में से करीब 20 बड़े मंदिरों पर सरकार की नजर है। इन मंदिरों की 50 बीघा से ज्यादा जमीन पर कब्जे की तैयारी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह पुजारियों और साधु-संतों की आजीविका पर हमला है।
पार्टी का कहना है कि सरकार ठेके और नीलामी के नाम पर दान की जमीनें हड़पना चाहती है। कांग्रेस ने इसे सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि आस्था पर सीधा हमला बताया है।
आगे क्या हो सकता है
इसके बाद भोपाल कूच की तैयारी होगी। सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि सरकार पुजारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
जब सरकार किसी दान की गई संपत्ति पर फैसला लेती है, तो इसका असर हजारों पुजारियों और श्रद्धालुओं पर पड़ता है। यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों से भी जुड़ा है।
इसलिए यह खबर हर नागरिक के लिए जानना जरूरी है, खासकर जो धार्मिक संपत्तियों और सामाजिक न्याय में रुचि रखते हैं।
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