CM मोहन यादव का बड़ा फैसला : अब CCTV की नजर में होगी गेहूं खरीदी, किसानों से बदसलूकी पड़ेगी भारी
प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने बड़ा मैसेज दिया है अब पूरी प्रक्रिया CCTV कैमरों की निगरानी में होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में साफ कहा है कि किसानों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं चलेगा। कलेक्टर्स को सीधे जिम्मेदारी देते हुए निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद मैदान में उतरकर व्यवस्था संभालें, संवाद बढ़ाएं और हर हाल में विवाद की स्थिति बनने से रोकें।
उपार्जन व्यवस्था पर सरकार का फोकस
गेहूं खरीदी को लेकर सरकार इस बार ज्यादा सतर्क नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि उपार्जन केंद्रों पर हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
CCTV निगरानी से पारदर्शिता
इस बार उपार्जन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इसका सीधा मकसद है—खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद को तुरंत रोकना। इससे किसानों के साथ होने वाली संभावित अनियमितताओं पर भी अंकुश लगेगा।
“संवाद ही समाधान”—CM का साफ संदेश
मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स को स्पष्ट कहा कि किसानों से लगातार संवाद बनाए रखें। उनका मानना है कि ज्यादातर समस्याएं बातचीत से ही सुलझ सकती हैं। इसलिए अधिकारी सिर्फ निर्देश देने तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों को समझाकर काम करें।
बढ़ाई गई क्षमता और समय
सरकार ने उपार्जन केंद्रों की क्षमता को 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दिया है। साथ ही स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई तक कर दी गई है। इससे ज्यादा किसानों को सुविधा मिलेगी और भीड़ का दबाव कम होगा।
किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं
कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि उपार्जन केंद्रों पर छाया, पीने का ठंडा पानी, तौल कांटे और हम्मालों की पर्याप्त व्यवस्था हो। साफ संदेश है—किसान केंद्र पर आए तो उसे किसी चीज की कमी महसूस न हो।
बारिश से बचाव के इंतजाम
असमय बारिश को देखते हुए चना और मसूर की खरीदी सिर्फ मंडी शेड के अंदर ही करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य किसानों की उपज को खराब होने से बचाना है।
रोजाना मॉनिटरिंग अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि गेहूं खरीदी, परिवहन, भंडारण और भुगतान की रोज समीक्षा की जाए। यानी अब हर दिन की रिपोर्टिंग होगी और लापरवाही पर सीधे जवाबदेही तय होगी।
लक्ष्य बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन
प्रदेश में गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार भी जताया।
मुख्यमंत्री के कलेक्टर्स को निर्देश
- उपार्जन केंद्रों पर CCTV से निगरानी
- किसानों से बदसलूकी पर सख्त रोक
- स्लॉट बुकिंग 9 मई तक बढ़ाई गई
- खरीदी क्षमता 2250 क्विंटल प्रतिदिन
- हर केंद्र पर जरूरी सुविधाएं अनिवार्य
- चना-मसूर की खरीदी शेड के अंदर
- रोजाना मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग
- 100 लाख मीट्रिक टन का नया लक्ष्य।
जमीनी मैसेज क्या है?
सरकार का फोकस साफ है खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, किसानों को सम्मान देना और किसी भी तरह के विवाद को पहले ही खत्म करना। अब देखना होगा कि जमीन पर ये सख्ती कितनी असरदार साबित होती है।
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