MP में गेहूं खरीदी टली: एक अप्रैल की जगह अब 10 से, तैयारियों की खुली पोल
मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी 1 अप्रैल से शुरू होनी थी। लेकिन इसे 10 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया। वजह जमीनी तैयारियां पूरी न होना है। कई खरीदी केंद्र, भंडारण और लॉजिस्टिक्स सिस्टम समय पर तैयार नहीं हो पाए। इस कारण सरकार को तारीख बदलनी पड़ी।
क्यों टली 1 अप्रैल की खरीदी?
सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों में खरीदी केंद्रों की तैयारियां अधूरी थीं। भंडारण (स्टोरेज) की पर्याप्त व्यवस्था नहीं बन पाई थी, जिससे खरीदे गए गेहूं को रखने में दिक्कत आ सकती थी। परिवहन और उठाव (लिफ्टिंग) की प्लानिंग भी पूरी तरह फाइनल नहीं थी। इन खामियों को देखते हुए सरकार ने जल्दबाजी में खरीदी शुरू करने से बचना बेहतर समझा।
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अब कब और कैसे होगी खरीदी?
नई योजना के मुताबिक खरीदी दो चरणों में होगी।
10 अप्रैल 2026: इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग।
15 अप्रैल 2026: बाकी पूरे प्रदेश में खरीदी।
यानी इस बार पूरी प्रक्रिया थोड़ा लेट लेकिन चरणबद्ध तरीके से चलेगी।
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तैयारियों के दावे बनाम जमीनी सच्चाई
कागजों में भले ही तैयारियां पूरी दिखाई जा रही हों, लेकिन हकीकत कुछ और है। हर साल की तरह इस बार भी आखिरी समय में व्यवस्थाएं अधूरी नजर आईं, जिससे शेड्यूल बदलना पड़ा। इससे साफ है कि प्लानिंग और ग्राउंड एक्सीक्यूशन के बीच अभी भी गैप है।
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भुगतान फिर बना बड़ा सवाल
खरीदी के साथ सबसे बड़ा मुद्दा भुगतान का ही रहता है। सरकार डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने की बात कर रही है, लेकिन पिछली बार की देरी किसानों को अब भी याद है। ऐसे में इस बार भी किसान समय पर पैसा मिलने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
वैश्विक हालात का भी दबाव
मध्य पूर्व के तनाव जैसे अंतरराष्ट्रीय कारणों का हवाला देकर सरकार स्टोरेज मजबूत करने पर जोर दे रही है। लेकिन सवाल यही है कि अगर तैयारी पूरी थी, तो फिर तारीख क्यों बदली गई?
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अरुण यादव का हमला
गेहूं खरीदी की तारीख तीसरी बार बढ़ने पर कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत खेतों में पड़ी है, लेकिन सरकार तारीख पर तारीख दे रही है। यादव ने तंज करते हुए कहा, पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल, अब 10 अप्रैल। उन्होंने इसे लापरवाही और तैयारी की कमी बताया। यादव ने इसे किसान विरोधी रवैया करार देते हुए कहा, "किसान पस्त है और सरकार मस्त है।
तारीख बढ़ाकर सरकार ने वक्त तो ले लिया, लेकिन क्या 10 अप्रैल तक सारी खामियां दूर हो जाएंगी?या फिर खरीदी शुरू होते ही एक बार फिर केंद्रों पर अव्यवस्था और देरी की तस्वीर सामने आएगी?