एमपी में महिला आयोग अध्यक्ष का नाम तय, सालों पूराने केस से नियुक्ति पर लगी रोक
News In Short
- मध्य प्रदेश महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति अटकी है।
- सरकार ने रेखा यादव, साधना स्थापक और समीक्षा गुप्ता के नाम तय कर दिए थे।
- मार्च-अप्रैल 2020 की एक नियुक्ति से जुड़ी याचिका अभी कोर्ट में लंबित है।
- अब सरकार ने AG (Advocate General) यानी महाधिवक्ता से कानूनी राय मांगी है।
News In Detail
क्यों अटकी है यह नियुक्ति?
मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है। इसी कड़ी में राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की फाइल भी आगे बढ़ी।
जानकारी के अनुसार, सरकार ने अध्यक्ष पद के लिए पूर्व विधायक रेखा यादव और सदस्य के रूप में गाडरवारा की पूर्व विधायक साधना स्थापक और ग्वालियर की पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता का नाम तय किए हैं। वहीं, आदेश जारी होने से पहले ही एक पुरानी अड़चन सामने आ गई।
मध्य प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग (Women and Child Development Department) में जब फाइल आगे बढ़ी तो पता चला कि मार्च-अप्रैल 2020 में की गई एक नियुक्ति से जुड़ी याचिका अब भी कोर्ट में लंबित है। यह छह साल पुराना मामला अब नई नियुक्ति के रास्ते में रोड़ा बन गया है।
जानें क्या है पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की जड़ में कमलनाथ सरकार का एक फैसला है। मार्च 2020 में कमलनाथ सरकार ने शोभा ओझा को महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। वहीं, कुछ ही दिनों बाद सरकार गिर गई थी। 23 मार्च 2020 को शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
अप्रैल 2020 में शोभा ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। शोभा ओझा ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी। तब से यह पद खाली ही पड़ा है। यही याचिका अब भी कोर्ट में चल रही है, जो नई नियुक्ति के लिए कानूनी उलझन बन गई है।
सरकार के सामने क्या हैं विकल्प?
इस अटकी हुई नियुक्ति को लेकर सरकार ने महाधिवक्ता यानी AG से मार्गदर्शन मांगा है। सवाल यह है कि क्या इस स्थिति में नई नियुक्ति के आदेश जारी किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक पहले नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर विचार हुआ, लेकिन बाद में पूरे मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट कराने का फैसला हुआ था।
अब दो विकल्पों पर हो रही है चर्चा
पहला, कोर्ट में अर्जेंट सुनवाई कराकर यह केस जल्द खत्म कराया जाए।
दूसरा, यथास्थिति आदेश के दायरे को समझते हुए नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
दोनों में से जो भी रास्ता कानूनी रूप से सही होगा, उसी पर अमल होगा।
कब तक मिल सकता है हल?
सूत्रों का कहना है कि दो-तीन दिनों में स्थिति काफी हद तक साफ हो सकती है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो अगले सप्ताह तक नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह महाधिवक्ता की राय और कोर्ट की स्थिति पर निर्भर करेगा।
महिला आयोग का पद लंबे समय से खाली पड़ा है। यह आयोग महिलाओं से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई, उनके अधिकारों की रक्षा और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। पद खाली रहने से आयोग का काम प्रभावित हो रहा है।
नियुक्तियों की नोटशीट से खुला राज
इसका राज तब खुला जब नई नियुक्तियों की नोटशीट सामने आई। नोटशीट में ही यह जानकारी उजागर हुई कि कोर्ट का एक पुराना मामला अभी तक निपटाया नहीं गया है। इसके बाद विभाग ने कानूनी राय लेने का फैसला किया।
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि राजनीतिक दबाव में जल्दी नियुक्ति करने की कोशिश हुई, लेकिन कानूनी अड़चन ने ब्रेक लगा दिया। अब सरकार सोच-समझकर कदम उठाना चाहती है ताकि कोर्ट में नई मुश्किल न खड़ी हो।
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