MP BJP का मिशन एडजस्टमेंट: 10 हजार से अधिक बीजेपी नेताओं को मिलेंगे विभाग, प्रभारी मंत्रियों को सौंपी कमान
Amresh Kushwaha | Apr 30, 2026, 12:13 IST
mp bjp mission adjustment worker appointments 55 districts
मध्य प्रदेश भाजपा का मिशन एडजस्टमेंट अब शुरू हो गया है। 55 जिलों की 70 समितियों में 10 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को जगह मिल सकती है। जानिए, प्रभारी मंत्रियों का पूरा प्लान क्या है...
मध्य प्रदेश की राजनीति में इस वक्त सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बैठाने की एक बड़ी कवायद शुरू हो गई है। एमपी बीजेपी ने राज्य में अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को सरकारी कामकाज से जोड़ने के लिए मिशन एडजस्टमेंट को हरी झंडी दे दी है।
इस महाभियान के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में सरकारी समितियों और बोर्डों के माध्यम से 10 हजार 500 से अधिक सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।
बीजेपी का मुख्य उद्देश्य यह है कि पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक अपने कार्यकर्ता नेटवर्क को सरकारी तंत्र का हिस्सा बनाया जाए।
योजना यह है कि कार्यकर्ताओं को सिर्फ चुनावी रैलियों तक सीमित न रखकर, उन्हें नीति बनाने और उसे लागू करने वाली समितियों में शामिल किया जाए। इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
प्रभारी मंत्रियों को उनके संबंधित जिलों में नियुक्तियों की पूरी जिम्मेदारी दी गई है। वर्तमान में प्रदेश के जिलों में कोर ग्रुप (Core Group) की बैठकें तेजी से चल रही हैं। यहां योग्य उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाई जा रही है।
कुल 31 विभागों की लगभग 70 से अधिक प्रकार की समितियों में ये नियुक्तियां होनी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि हर जिले में करीब 190 से 200 स्थानीय नेता पावरफुल (Powerful) भूमिका में नजर आएंगे।
इस पूरी प्रक्रिया की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इसे मॉनिटर कर रहा है। दरअसल, इस अभियान की शुरुआत तीन महीने पहले 27 जनवरी को ही कर दी गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी प्रभारी मंत्रियों और जिला कलेक्टरों को साफ आदेश दिए थे। अब वही निर्देशों के आधार पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
योग्यता ही बनेगी चयन का आधार:
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस अभियान पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि नियुक्तियों में सर्वानुमति (Consensus) को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे संगठन का पद हो या सरकारी नियुक्ति, मौका केवल उसी कार्यकर्ता को मिलेगा जो उस पद के काबिल होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि सभी की सहमति जुटाने में समय जरूर लगता है, लेकिन पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विभागवार नियुक्तियों पर नजर डालें तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में दिशा, जल स्वच्छता और युवा ग्राम शक्ति जैसी आठ अहम समितियों का गठन होना है। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी भागीदारी तय की गई है।
उच्च शिक्षा की जनभागीदारी समितियों (Public Participation Committees) में हर कॉलेज के लिए एक अध्यक्ष और 13 सदस्यों का मनोनयन किया जाना है। यह कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा राजनीतिक मंच साबित हो सकता है।
योजना और सांख्यिकी विभाग के तहत जिला अंत्योदय समिति (District Antyodaya Committee) सबसे अहम है। यहां 10 से 30 सदस्यों तक की जगह है। इसी तरह, नगर निगम और नगर परिषदों में भी कार्यकर्ताओं का कोटा तय कर दिया गया है।
सामाजिक न्याय विभाग की छह समितियों के माध्यम से दिव्यांगजन सलाहकार और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी कमेटियों में स्थानीय चेहरों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बनाया जा रहा है।
सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी विभागों जैसे जेल विभाग के विजिटर बोर्ड, पुलिस शिकायत बोर्ड और आईटीआई (ITI) समितियों में भी कार्यकर्ताओं को जगह दी जा रही है। प्रभारी मंत्रियों को निर्देश हैं कि वे ऐसे नामों का चयन करें जो आगामी चुनावी समीकरणों (Election Equations) में पार्टी की पकड़ मजबूत कर सकें। उम्मीद है कि आने वाले कुछ ही हफ्तों में सभी 55 जिलों की सूचियां सार्वजनिक कर दी जाएंगी।
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इस महाभियान के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में सरकारी समितियों और बोर्डों के माध्यम से 10 हजार 500 से अधिक सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।
जमीनी कार्यकर्ताओं की सरकारी भागीदारी पर फोकस
योजना यह है कि कार्यकर्ताओं को सिर्फ चुनावी रैलियों तक सीमित न रखकर, उन्हें नीति बनाने और उसे लागू करने वाली समितियों में शामिल किया जाए। इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
हर जिले में 70 से ज्यादा समितियां
कुल 31 विभागों की लगभग 70 से अधिक प्रकार की समितियों में ये नियुक्तियां होनी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि हर जिले में करीब 190 से 200 स्थानीय नेता पावरफुल (Powerful) भूमिका में नजर आएंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधी निगरानी
योग्यता ही बनेगी चयन का आधार: हेमंत खंडेलवाल
शिक्षा और पंचायत विभाग में होगा बड़ा समायोजन
उच्च शिक्षा की जनभागीदारी समितियों (Public Participation Committees) में हर कॉलेज के लिए एक अध्यक्ष और 13 सदस्यों का मनोनयन किया जाना है। यह कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा राजनीतिक मंच साबित हो सकता है।
सामाजिक न्याय और विकास समितियों का जाल
सामाजिक न्याय विभाग की छह समितियों के माध्यम से दिव्यांगजन सलाहकार और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी कमेटियों में स्थानीय चेहरों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बनाया जा रहा है।
आगामी हफ्तों में फाइनल होंगे नाम
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