बड़खेड़ा ओपन कैप में सड़ा एक हजार मीट्रिक टन से ज्यादा धान, अब जबलपुर में नीलामी की तैयारी, कॉर्पोरेशन ने निकाले टेंडर
बड़खेड़ा ओपन कैप में क्या मिला?
बड़खेड़ा ओपन कैप मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन का है। यहां रखा 1987 मीट्रिक टन धान सड़ चुका है। यानी करीब 19 हजार 870 क्विंटल धान खराब हो गया है। इसमें शायद ही 50 से 60 क्विंटल धान सही बचा हो। दर्शनी के ओपन कैप में भी धान का भंडारण है। वहां एक हजार 167 मीट्रिक टन धान रखा गया है। वहीं, बंदरकोला में 287 मीट्रिक टन धान का भंडारण है।
धान का समर्थन मूल्य और नुकसान
अन्य कैप में 35 हजार 210 क्विंटल धान रखा है। हालांकि, इस आंकड़े की पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह धान 2021-22 में खरीदा गया था। उस समय धान का समर्थन मूल्य एक हजार 940 रुपए प्रति क्विंटल था। इस हिसाब से धान की कुल कीमत 6 करोड़ 83 लाख रुपए होती है।
समितियों का भुगतान, रखरखाव और दूसरे खर्च जोड़ने पर रकम बढ़ जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रकम 7 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। सोचने वाली बात ये है कि इतनी कीमत का धान आज किस दाम पर बिकेगा?
पांच जिलों का 3 लाख टन धान
अब बड़े आंकड़ों की बात करते हैं। मध्यप्रदेश सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन ने ई-नीलामी का टेंडर निकाला है। इसके तहत धान की ऑनलाइन बोली लगाई जाएगी। यह धान जबलपुर संभाग और दूसरे जिलों के कैप व गोदामों में रखा है।
इस टेंडर में पांच जिलों का धान शामिल है। इनमें जबलपुर, नर्मदापुरम, कटनी, बालाघाट और सिवनी शामिल हैं। इन पांच जिलों में कुल तीन लाख 265 मीट्रिक टन धान रखा है। इसमें अकेले जबलपुर का हिस्सा 65 हजार 139 मीट्रिक टन है। यह मात्रा करीब 6.51 लाख क्विंटल के बराबर है।
किस साल का कितना धान नीलाम होगा?
रिपोर्ट के आंकड़ों में साल के हिसाब से मात्रा दी गई है। साल 2021-22 का तीन हजार 611 मीट्रिक टन धान है। 2022-23 का तीन हजार 415 और 2023-24 का चार हजार 277 मीट्रिक टन है। 2024-25 का एक हजार 836 मीट्रिक टन है।
सबसे बड़ा हिस्सा 2025-26 का है। यह मात्रा 50 हजार मीट्रिक टन है। बाकी चार सालों की मात्रा इसके सामने छोटी है।
पांच साल तक क्यों सड़ता रहा धान?
रिपोर्ट में हर साल के धान की मात्रा दी गई है। 2021-22 में तीन हजार 611 मीट्रिक टन धान था। 2022-23 में यह मात्रा तीन हजार 415 मीट्रिक टन थी। 2023-24 में चार हजार 277 मीट्रिक टन धान दर्ज किया गया। वहीं, 2024-25 में एक हजार 836 मीट्रिक टन धान था।
सबसे ज्यादा मात्रा 2025-26 की है। इस साल 50 हजार मीट्रिक टन धान शामिल है। इसके मुकाबले पिछले चार सालों की मात्रा काफी कम है।
मध्यप्रदेश धान टेंडर में पांच जिलों का धान शामिल है। इनमें जबलपुर, नर्मदापुरम, कटनी, बालाघाट और सिवनी जिले हैं। इन पांच जिलों में कुल तीन लाख 265 मीट्रिक टन धान है। अकेले जबलपुर में 65 हजार 139 मीट्रिक टन धान शामिल है। यह मात्रा करीब 6.51 लाख क्विंटल के बराबर है।
ओपन कैप में धान रखने का नियम क्या है?
नियम के मुताबिक, किसी भी ओपन कैप में तीन महीने से ज्यादा अनाज नहीं रख सकते। फिर पांच साल तक धान कैसे रखा रहा? रिपोर्ट के मुताबिक, अब यह धान सड़कर काला पड़ चुका है।
सड़े धान का अब क्या होगा?
रिपोर्ट में इस धान के दो संभावित इस्तेमाल बताए गए हैं। पहला, मुर्गियों के दाने बनाने में और दूसरा, शराब बनाने में। लेकिन सबसे बड़ा सवाल इसकी नीलामी की कीमत को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, खरीदार इसे बहुत कम दाम पर खरीदते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले में तीन एजेंसियां शामिल थीं। मार्कफेड ने धान खरीदा था। वेयर हाउसिंग ने इसका भंडारण किया था। वहीं, सिविल सप्लाई ने इसकी सप्लाई की थी। रिपोर्ट में इस पूरे मामले की जांच कराने की जरूरत बताई गई है।
अब इस धान की नीलामी के लिए टेंडर निकल चुके हैं। अगला कदम बोली लगाने का है। इसके बाद पता चलेगा कि सड़े धान के बदले कितनी रकम मिलेगी।
FAQ
- बड़खेड़ा ओपन कैप में कितनी मात्रा में धान सड़ चुका है?
बड़खेड़ा ओपन कैप में 1987 मीट्रिक टन धान सड़ चुका है, जो करीब 19 हजार 870 क्विंटल के बराबर है। - सरकार ने धान की नीलामी के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मध्यप्रदेश सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन ने ई-नीलामी के लिए टेंडर जारी किया है, जिसमें जबलपुर और अन्य जिलों के कैप व गोदामों में रखा कुल तीन लाख 265 मीट्रिक टन धान शामिल है। - सड़े धान का क्या किया जाएगा?
रिपोर्ट के अनुसार, सड़े धान का दो संभावित इस्तेमाल मुर्गियों के दाने बनाने में और शराब बनाने में किया जा सकता है, लेकिन इसकी स्थिति पर नीलामी की कीमत का भी बड़ा सवाल है।