MPPSC की असिस्टेंट डायरेक्टर भर्ती में 100% आरक्षण पर HC भी हैरान, सरकार से मांगा जवाब
News in short
- MPPSC की असिस्टेंट डायरेक्टर (कृषि) भर्ती में 71 पदों पर विवाद।
- जनरल और EWS वर्ग के लिए 0 सीट।
- OBC के 27% आरक्षण को पूरे कैडर पर लागू करने का विवाद।
- हाईकोर्ट ने 100% आरक्षण पर जताई हैरानी, मांगा जवाब।
- अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय।
News in detail
मध्य प्रदेश में भर्तियों को लेकर एक और बड़ा विवाद सामने आया है, जहां MPPSC की एक भर्ती में 100% आरक्षण लागू कर दिया गया।सामान्य (General) और EWS वर्ग के लिए एक भी पद न छोड़े जाने पर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए सरकार और MPPSC से जवाब तलब किया है।
भर्ती अब कानूनी विवादों में घिरी
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा कृषि विभाग में सहायक संचालक के 71 पदों पर निकाली गई भर्ती अब कानूनी विवादों में घिर गई है। इस भर्ती में आरोप है कि आरक्षण लागू करने के तरीके के कारण सामान्य (General) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए एक भी पद नहीं छोड़ा गया। इसी मुद्दे को लेकर राघवेन्द्र सिंह जादौन समेत अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
पूरे कैडर पर लागू किया आरक्षण
याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप यह है कि सरकार ने 27% OBC आरक्षण को केवल 71 विज्ञापित पदों पर लागू करने के बजाय पूरे कैडर (368 पदों) पर लागू कर दिया। इसी कारण आरक्षण का अनुपात बिगड़ गया और जनरल व EWS वर्ग के लिए सीटें शून्य हो गईं। याचिका के अनुसार यह तरीका न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि आरक्षण के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
आंकड़ों में समझें पदों का पूरा अंतर
वर्तमान रोस्टर के अनुसार 71 पदों में से 47 OBC, 14 SC और 10 ST के लिए रखे गए हैं, जबकि General और EWS के लिए एक भी पद नहीं है। वहीं याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यदि आरक्षण केवल विज्ञापित पदों पर लागू होता, तो 25 General, 2 EWS, 19 OBC, 11 SC और 14 ST पद निर्धारित होते। इस अंतर ने पूरे विवाद को जन्म दिया है।
नियमों और पुराने पैटर्न का हवाला
याचिका में यह भी कहा गया है कि 31 जनवरी 2022 के GAD के सर्कुलर के अनुसार आरक्षण केवल भविष्यलक्षी (Prospective) तरीके से लागू होना चाहिए। साथ ही 2019 की इसी भर्ती के विज्ञापन का हवाला देते हुए बताया गया कि उस समय आरक्षण केवल रिक्त पदों पर ही लागू किया गया था। ऐसे में वर्तमान प्रक्रिया को नियमों के विपरीत बताया गया है।
प्रोविजनल पदों पर भी सवाल
याचिकाकर्ताओं ने OBC आरक्षण को “मुख्य” और “प्रोविजनल” पदों में बांटने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह का वर्गीकरण कानून में कहीं भी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है और यह चयन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि General और EWS वर्ग के उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, जो समान अवसर की गारंटी देते हैं। इस आधार पर भर्ती प्रक्रिया को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है।
100% आरक्षण पर HC भी हैरान
इस मामले की सुनवाई 31 मार्च को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने 100% आरक्षण पर हैरानी जताई और राज्य सरकार और MPPSC से जवाब मांगा है।
MPPSC और सरकार देगी जवाब
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी है। कोर्ट ने मौखिक तौर पर यह स्पष्ट किया कि पहले पदों की संख्या और आरक्षण का अनुपात तय होगा और उसके बाद राहत पर विचार किया जाएगा।
हाईकोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणी ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी, जहां यह तय हो सकता है कि भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी या इसमें बड़ा बदलाव होगा।
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