MPPSC असिस्टेंट मैनेजर भर्ती पर विवाद,पात्र-अपात्र घोषित करने में भेदभाव के आरोप

Sanjay Gupta | Aug 19, 2026, 14:20 IST
mppsc assistant manager vacancy controversy
मप्र लोक सेवा आयोग (पीएससी) के लोक स्वास्थय विभाग के असिस्टेंट मैनेजर भर्ती परीक्षा में पात्र-अपात्र को लेकर विवाद हो गया है। इंटरव्यू में पहले 8 को अपात्र बताया फिर इसमें सात को पात्र पाया। वहीं इंटरव्यू के बाद फिर 19 को अपात्र बताया और 17 को ले लिया।

मप्र लोक सेवा आयोग में असिस्टेंट मैनेजर के 68 पद की अंतिम चयन सूची जारी होना है, लेकिन इसके पहले ही विवाद हो गया है। विवाद इंटरव्यू में पात्र और अपात्र के बीच भेद को लेकर है। उम्मीदवारों ने इसे लेकर आयोग को लिखित में शिकायत की है। साथ ही कहा है कि आयोग ने सही फैसला नहीं लिया तो हाईकोर्ट जाएंगे।



mppsc assiatant manager bharti


क्या है विवाद

विवाद इस बात पर है कि आयोग हर इंटरव्यू से पहले उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता को जांचता है। इसके बाद इसमें अपात्र की सूची जारी कर उन्हें मौका देता है कि वह दस्तावेज उपलब्ध कराएं। आयोग ने इस भर्ती के लिए दो बार पात्र-अपात्र की सूची जारी की। एक इंटरव्यू के पहले और दूसरी इंटरव्यू के बाद।



पहले यह किया

आयोग ने 11 जून को इंटरव्यू के लिए अपात्र उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इसमें 8 उम्मीदवारों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं होने के कारण अपात्र बताया गया। आपत्तियां सुनने के बाद आयोग ने 1 जुलाई को इन 8 में से 4 उम्मीदवारों को पात्र माना, जबकि 3 को अपात्र मानकर बाहर कर दिया। वहीं एक उम्मीदवार दीपक डेहरिया के बारे में आयोग ने कोई जानकारी नहीं दी।



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इसके बाद फिर 29 जुलाई को 19 की सूची जारी की

इसके बाद आयोग ने 8 से 13 जुलाई तक इंटरव्यू लिए। इसके बाद जब सभी चयन सूची का इंतजार कर रहे थे, इसके पहले आयोग ने 29 जुलाई को सूची जारी कर 19 को अपात्र बताया। इसमें 13 के लिए कारण बताया कि शैक्षणिक योग्यता नहीं थी और 6 के लिए कारण बताया संविदा पात्रता पूरी नहीं की गई। लेकिन फिर आयोग ने 13 अगस्त को सूची जारी की और इसमें से 17 को पात्र माना और दो की डिग्री सही मानक की नहीं होने पर अपात्र किया।



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इन तीन मुद्दों पर आपत्ति

शिकायत करने वाले उम्मीदवारों का कहना है कि



उम्मीदवारों को संविदा का लाभ सातवें वेतनमान के लेवल 12 में काम करने वालों को दिया जाता है। लेकिन इसमें लेवल 10 में काम करने वालों को भी यह लाभ दिया गया है। ऐसा करने पर उन्हें अनारक्षित श्रेणी में रखा जाना चाहिए और आयु सीमा का लाभ भी नहीं मिलना चाहिए।



आयोग ने फिर से वापस लेने का कोई आधार नहीं बताया है। जिन 6 को एक जैसा कारण बताकर जून में अपात्र किया गया उसमें से चार को फिर ले लिया गया और दो को नहीं लिया। इस तरह भेदभाव किया गया है।



आयोग पर मनमर्जी के लगाए आरोप

उम्मीदवारों ने लिखित शिकायत में यह भी आरोप लगाए कि आयोग ने मनमर्जी तरीके से कई अपात्रों के आवेदन एक जुलाई को सीधे मंजूर किए हैं। यह भी कहा कि आयु सीमा में छूट नहीं होने के बाद भी कई को छूट देकर अंदर किया गया।



68 पदों के लिए है परीक्षा

आयोग द्वारा नवंबर 2025 में लोक स्वास्थ्य विभाग में असिस्टेंट मैनेजर के 68 पदों के लिए यह परीक्षा की थी। फिर जनवरी में रिजल्ट जारी किया। आयोग ने इनके इंटरव्यू 8 से 13 जुलाई तक लिए, फिर बाद में 19 को अपात्र बताकर बाहर किया। इसके बाद में दस्तावेज लेकर 17 को पात्र बताया गया।



क्या बोल रहा है आयोग

वहीं पीएससी के ओसीडी रविंद्र पंचभाई का कहना है कि पात्रता का फैसला संबंधित विभाग के विशेषज्ञ की टीम द्वारा किया जाता है। इसके लिए सभी दस्तावेज व संबंधित डिग्री की मान्यता देखी जाती है। विशेषज्ञ टीम द्वारा ही यह फैसला लिया गया है।



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