MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2022: हाईकोर्ट ने एप्लाइड डिग्री को माना वैध, नियुक्ति का रास्ता साफ

Neel Tiwari | Oct 30, 2026, 19:33 IST
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2022 में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एप्लाइड डिग्री मान्य।
High Court Recognizes Applied Degree in MPPSC Assistant Professor Recruitment 2022.
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर (वनस्पतिशास्त्र) भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 'एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी' की डिग्री को मान्य कर दिया है। डिग्री के नाम में 'एप्लाइड' शब्द होने के आधार पर अभ्यर्थियों को अयोग्य ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने इस आधार पर उम्मीदवारी खारिज करने वाले आदेशों को अवैध करार दिया है।

क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामला मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर (वनस्पतिशास्त्र) भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। इसमें राहुल कुमार सूर्यवंशी सहित अन्य अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज कर दी गई थी। अभ्यर्थियों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चार याचिकाएं दायर की थीं। आयोग ने 'एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी' की डिग्री होने के कारण उनकी उम्मीदवारी खारिज की थी। आयोग के मुताबिक यह डिग्री मुख्य या सह-विषयों (Allied Subjects) की सूची में शामिल नहीं थी। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से यह डिग्री हासिल की है। इनमें डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर, बीएचयू वाराणसी और वनस्थली विद्यापीठ शामिल हैं। उनका तर्क था कि इनका पाठ्यक्रम सामान्य माइक्रोबायोलॉजी के पाठ्यक्रम के समान है।



साल 2017 और 2025 की भर्तियों का दिया हवाला

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने हाईकोर्ट में पूर्व भर्तियों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि साल 2017 की भर्ती में इसी डिग्री वाले अभ्यर्थियों को नियुक्तियां मिली थीं। इसके अलावा सरकार ने 2025 की भर्ती के लिए एक शुद्धिपत्र (Corrigendum) जारी किया था। इसमें 'एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी' को वनस्पति शास्त्र (Botany) के सह-विषय के रूप में मान्यता दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने केवल 2022 की भर्ती में इस डिग्री को अमान्य करने पर सवाल उठाए। उन्होंने इस फैसले को मनमाना और तर्कहीन बताया।



विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम को माना समान

हाईकोर्ट ने डिग्री जारी करने वाले विश्वविद्यालयों के प्रमाणपत्रों को अहम माना। सागर विश्वविद्यालय, बीएचयू और वनस्थली विद्यापीठ ने अपने पाठ्यक्रम की समानता प्रमाणित की थी। इनके मुताबिक 'एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी' का पाठ्यक्रम सामान्य माइक्रोबायोलॉजी के समान है। यह पाठ्यक्रम यूजीसी के निर्धारित मानकों के अनुरूप भी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत डिग्री प्रदान करने का अधिकार विश्वविद्यालयों को है। राज्य सरकार बिना ठोस आधार के ऐसी डिग्रियों को अलग या कमतर नहीं मान सकती।



सरकार और पीएससी की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चयन प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने साल 2017, 2022 और 2025 की भर्तियों में अलग-अलग मानदंड अपनाने पर सवाल उठाए। एक ही पद और पाठ्यक्रम के लिए अलग नियम अपनाने को अदालत ने अनुचित माना। कोर्ट के मुताबिक केवल 2022 के अभ्यर्थियों के साथ ऐसा व्यवहार प्रशासनिक और शैक्षणिक अराजकता दर्शाता है। अदालत ने इस तरह के वर्गीकरण को संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन बताया। यह अनुच्छेद समानता का अधिकार सुनिश्चित करता है।



हाईकोर्ट ने नियुक्ति और वरिष्ठता को लेकर दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने दो और छह मई 2025 को जारी आदेश रद्द कर दिए हैं। इन आदेशों के जरिए संबंधित अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज की गई थी। अदालत ने कहा कि अभ्यर्थी अंतरिम आदेश के तहत पहले ही परीक्षा में शामिल हो चुके हैं। इसलिए अब उनके परीक्षा परिणामों पर विचार किया जाए। कोर्ट ने नियुक्ति के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। यदि संबंधित श्रेणी में कम अंक वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल चुकी है, तो आदेश लागू होगा। ऐसी स्थिति में पात्र याचिकाकर्ताओं को भी तत्काल नियुक्ति दी जाए। इसके अलावा उन्हें पिछली तारीख से काल्पनिक वरिष्ठता (Notional Seniority) का लाभ भी दिया जाए। हालांकि, इस वरिष्ठता के आधार पर उन्हें वित्तीय लाभ नहीं मिलेंगे। अन्य सभी मामलों में उन्हें पूर्व तिथि से वरिष्ठता का लाभ दिया जाएगा।

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