MPPSC की 25 हजार लेट फीस जारी रहेगी, हाईकोर्ट ने आयोग के कारण को सही माना

Sanjay Gupta | Sept 24, 2026, 12:00 IST
MPPSC की 25 हजार लेट फीस जारी रहेगी
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को एक बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट इंदौर ने आयोग के जरिए ली जाने वाली लेट फीस 25 हजार को वैध करार दिया है। जानें हाईकोर्ट का पूरा फैसला और आयोग के तर्क...

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) को हाईकोर्ट के एक फैसले से बड़ी राहत मिली है। एक अभ्यर्थी द्वारा हाईकोर्ट इंदौर में आयोग द्वारा परीक्षा आवेदन में ली जाने वाली लेट फीस को लेकर आपत्ति लगाई गई थी। इसे संविधान में समानता के अधिकार के खिलाफ बताया गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और आयोग द्वारा बताए गए कारण को सही माना है।



क्या है लेट फीस का मामला

आयोग द्वारा परीक्षा विज्ञापन जारी करने के बाद एक तय समय दिया जाता है जिसमें तय शुल्क 500 रुपए भरकर आवेदन किया जा सकता है। इसके बाद यह समय बीतने के बाद करीब सप्ताह भर का समय फिर लेट फीस 3000 रुपए लेकर फॉर्म भरने की छूट दी जाती है। लेकिन जब यह समय भी बीत जाता है तो आयोग यह लेट फीस सीधे 25 हजार कर देता है।



याचिकाकर्ता ने यह उठाया था मुद्दा

याचिकाकर्ता मोहम्मद रिजवान ने याचिका लगाई। इसमें बताया कि 10 मार्च 2026 को सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पद के लिए विज्ञापन आया। इसमें फॉर्म भरने की अंतिम तारीख 8 मई थी। शुल्क 500 रुपए था। फिर 9 से 15 मई तक शुल्क 3000 रुपए रखा गया और इसके बाद लेट फीस को 16 मई से 23 सितंबर तक के लिए 25 हजार कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह लेट फीस बहुत ज्यादा और आर्थिक आधार पर भेदभाव करती है। इसके चलते वह फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं और परीक्षा देने का अधिकार छीना जा रहा है।





अन्य राज्यों का भी दिया उदाहरण

याचिकाकर्ता ने इसके साथ ही राजस्थान, केरल, यूपी व अन्य आयोग के जरिए ली जाने वाली अधिकतम फीस संबंधी नोटिफिकेशन भी लगाए। इसमें 600 से ज्यादा शुल्क नहीं है। ऐसे में यह फीस को कम किया जाए और फॉर्म भरने की मंजूरी दी जाए।



पीएससी ने यह बताए लेट फीस के कारण

इस पर हाईकोर्ट ने इस बात से इनकार किया कि याचिकाकर्ता द्वारा कहा जाना कि वह ऐसे कारण थे कि समय पर फॉर्म नहीं भर सका, वह विश्वास योग्य नहीं है और स्पष्ट भी नहीं है। साथ ही आयोग ने जो कारण बताए, वह उचित हैं।



पीएससी की ओर से अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि आयोग ने जानबूझकर तीन हजार रुपए की लेट फीस और बहुत ज्यादा देरी होने पर 25 हजार रुपए की अतिरिक्त लेट फीस का प्रावधान किया है। ताकि उम्मीदवार देर से आवेदन फॉर्म जमा करने से बचें। परीक्षा के अंतिम समय में उम्मीदवार एकसाथ आवेदन नहीं करें, इसके लिए ही यह सिस्टम रखा गया है।



हाईकोर्ट ने आयोग के तर्कों को सही माना

हाईकोर्ट ने आयोग के इन तर्कों पर कहा कि असल में, फीस लेने और फिर देर से फॉर्म भरने पर धीरे-धीरे ज्यादा फीस और बहुत ज्यादा देरी होने पर और भी ज्यादा फीस लेने के पीछे यही मकसद लगता है। इस कोर्ट को याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई उचित आधार नहीं मिला। तय समय के भीतर उम्मीदवारी फॉर्म न भरने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। इसलिए, बिना किसी ठोस आधार वाली इस याचिका को खारिज किया जाता है।



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