नवोदय एडमिशन में EWS बाहर, 650 से ज्यादा स्कूलों में लाखों सीटें, फिर भी गरीब वंचित, हाईकोर्ट सख्त

Neel Tiwari | Mar 17, 2026, 15:10 IST
navodaya-ews-reservation-high-court-notice
देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी स्कूल सिस्टम में गरीब वर्ग के बच्चों की एंट्री पर सवाल खड़े हो गए हैं। नवोदय विद्यालयों की क्लास 6 एडमिशन प्रक्रिया में EWS को पूरी तरह बाहर रखने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है।

News in Short

  • नवोदय के 6वीं क्लास एडमिशन में EWS के लिए कोई आरक्षण नहीं है।
  • देशभर में 650+ नवोदय स्कूल, करीब 2.9 लाख छात्र पढ़ रहे हैं।
  • हाईकोर्ट ने केंद्र और नवोदय समिति को नोटिस जारी किया है।
  • याचिका नाबालिग छात्रा की ओर से दायर की गई थी।

650 से ज्यादा स्कूल, लाखों छात्र… फिर भी EWS गायब

देशभर में इस समय 650 से अधिक जवाहर नवोदय विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग 2.9 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ये स्कूल खास तौर पर ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए बनाए गए थे।



हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े नेटवर्क और लाखों सीटों के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं की गई है।



कोर्ट पहुंचा मामला, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में दायर याचिका में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया है। कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार, नवोदय विद्यालय समिति सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।



अधिवक्ता धीरज तिवारी ने रखी मजबूत पैरवी

इस मामले में एक नाबालिग छात्रा की ओर से याचिका दायर की गई है। मामले की पैरवी अधिवक्ता धीरज तिवारी ने करते हुए कोर्ट के सामने यह मुद्दा मजबूती से रखा कि नवोदय की नीति अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। गरीब वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है।



किसे मिल रहा आरक्षण, कौन रह गया बाहर?

नवोदय विद्यालयों में SC, ST, OBC, ग्रामीण छात्रों, बालिकाओं और दिव्यांगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। लेकिन EWS वर्ग के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इससे सामान्य वर्ग के गरीब बच्चे पूरी तरह सिस्टम से बाहर हो रहे हैं।



संविधान का हवाला, 10% आरक्षण का अधिकार

याचिका में 2019 के 103वें संविधान संशोधन का हवाला दिया गया है, जिसमें EWS वर्ग को शिक्षा संस्थानों में 10% तक आरक्षण देने का प्रावधान है। इसके बावजूद नवोदय की प्रवेश नीति में इसे लागू नहीं किया गया, जिसे संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी बताया गया है।



एक ही मंत्रालय, दो नियम?

एक और बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि केंद्र सरकार के अधीन आने वाले केंद्रीय विद्यालयों में EWS को एडमिशन का लाभ मिलता है, लेकिन नवोदय विद्यालयों में नहीं। याचिका में इसे सीधा-सीधा भेदभाव बताया गया है।



सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र

याचिका में हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Atharv Chaturvedi केस, 10 फरवरी 2026) का हवाला देते हुए कहा गया है कि EWS छात्रों को अवसर न देना गंभीर मुद्दा है। इसी आधार पर नवोदय में भी समान अवसर की मांग की गई है।



नवोदय सहित सरकार को नोटिस

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से जल्द जवाब मांगा है और अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार EWS छात्रों को नवोदय में जगह देने के लिए नीति में बदलाव करेगी या नहीं।



ये खबरें भी पढ़ें...



जबलपुर हाईकोर्ट भ्रूण मामला: सुरक्षा में चूक पर 4 पुलिसकर्मी निलंबित, एसपी की बड़ी कार्रवाई



जबलपुर हाईकोर्ट के जज बने मद्रास हाईकोर्ट के CJ, एमपी हाईकोर्ट से अबतक 18 जज बने चीफ जस्टिस



भोपाल मेट्रो GM को झूठा हलफनामा पड़ा भारी, जबलपुर हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार



जबलपुर हाईकोर्ट ने IG रिपोर्ट पर जताई नाराजगी, एक साल तक सीलबंद रहेगी रिपोर्ट



Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • मध्य प्रदेश
  • हाईकोर्ट
  • जवाहर नवोदय विद्यालय