अश्लीलता, भ्रूण हत्या और महिलाओं से अत्याचार में नंबर एक पर एमपी, एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा
समझें क्या है पूरा मामला...
- NCRB की क्राइम इन इंडिया 2024 रिपोर्ट 6 मई 2026 को जारी हुई थी।
- मध्यप्रदेश ST अत्याचार के मामलों में पूरे देश में पहले नंबर पर है।
- MP में हर तीन घंटे में एक बलात्कार का मामला दर्ज होता है।
- अश्लीलता के मामलों में MP लगातार तीसरे साल देश में सबसे ऊपर है।
- अपराध दर 494.4 प्रति लाख है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है।
MP का अपराध आईना: NCRB 2024
06 मई 2026 को NCRB की रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया 2024 सामने आई थी। यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश के लिए एक कड़ा संदेश लेकर आई है। आमतौर पर यह रिपोर्ट सितंबर 2025 में आती, लेकिन इस बार डेटा सत्यापन के कारण देरी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक MP में कुल दो लाख 82 हजार 874 IPC और BNS के मामले दर्ज हुए हैं। यह देश में तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। उत्तर प्रदेश चार लाख 30 हजार 552 और महाराष्ट्र तीन लाख 83 हजार 44 मामलों के साथ पहले और दूसरे स्थान पर हैं।
राष्ट्रीय औसत से 18% ज्यादा अपराध
मध्यप्रदेश में एक आम आदमी के लिए सुरक्षा की कमी है। सिर्फ IPC और BNS के हिसाब से अपराध दर 321.6 प्रति लाख है। वहीं यदि सभी खास और स्थानीय कानूनों के मामले भी जोड़ दें, तो यह बढ़कर 494.4 प्रति लाख हो जाती है। देश का औसत 418.9 है, यानी MP का नागरिक औसतन 18% ज्यादा खतरे में है।
2024 में MP की अनुमानित आबादी 8.79 करोड़ है। राज्य में 21% से ज्यादा आदिवासी आबादी रहती है। यह देश के सर्वाधिक आदिवासी-सघन राज्यों में से एक है।
ST अत्याचार में नंबर 1, SC में नंबर 2
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये है कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अत्याचार के मामले सबसे ज्यादा हैं। यहां तीन हजार 165 केस दर्ज हैं, यानी पूरे देश के ST अपराधों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सिर्फ एमपी से है।
SC/ST PoA एक्ट के तहत MP में चार्जशीटिंग दर तो बहुत अच्छी है, 99.8%, यानी एफआईआर होने के बाद आरोपियों के खिलाफ केस फाइल हो जाता है। वहीं दोषसिद्धि दर 50% से कम है। मतलब एफआईआर दर्ज होती है। चार्जशीट भी होती है, लेकिन अदालत में आरोपी बच निकलता है।
विशेषज्ञ इसे न्याय व्यवस्था की बड़ी कमजोरी मानते हैं। कानून जानकार कहते हैं कि सजा न मिलना और आरोपी का जल्दी जमानत पर बाहर आना मिलकर अपराध को बढ़ावा देता है।
मंडला, डिंडोरी और झाबुआ जैसे आदिवासी इलाके में लोग कहते हैं, पुलिस एफआईआर तो लिखती है पर आरोपी गांव में घूमता रहता है।
एससी अत्याचार के मामले में भी एमपी दूसरे नंबर पर है। यहां सात हजार 765 केस हैं और अपराध दर 68.5%, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।
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हर 3 घंटे में एक रेप केस
वहीं यदि साल 2024 की बात करें तो में MP में बलात्कार के दो हजार 714 मामले दर्ज हुए थे। पीड़ितों की संख्या दो हजार 719 रही। यानी हर तीन घंटे में एक रेप का मामला दर्ज हो रहा है। यह आंकड़ा देश के कुल बलात्कार मामलों का लगभग 9.2% है।
अपराधी-पीड़ित संबंधों के आंकड़े और भी परेशान करने वाले हैं। रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश में महिलाओं के खिलाफ 97% मामलों में आरोपी परिचित होते हैं। यानी रिश्तेदार, पड़ोसी या जान-पहचान वाले। खतरा बाहर से नहीं घर और पड़ोस से है।
आदिवासी महिलाओं से दुष्कर्म के 358 मामले दर्ज हुए। यह देश के कुल ST बलात्कार मामलों का 28% है। यह लगातार दूसरा साल है जब MP इस श्रेणी में पहले स्थान पर है।
गर्भवती महिलाओं से दुष्कर्म में एमपी लगातार तीसरे साल देश में नंबर 1 रहा है। 2024 में ऐसे 10 मामले दर्ज हुए, जो देश के कुल 28 का 35% से ज्यादा है।
महिला अपराध में रोज 90 मामले
2024 में महिलाओं के खिलाफ कुल 32 हजार 832 मामले दर्ज हुए। यानी हर दिन औसतन 90 से ज्यादा मामले। MP लगातार चौथे साल इस श्रेणी में देश में पांचवें स्थान पर रहा है। UP, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल इससे आगे हैं।
दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज हुए। UP और बिहार के बाद MP तीसरे स्थान पर रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि आर्थिक और सामाजिक दबाव में परिवार खुद अपराधी बन जाते हैं।
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अश्लीलता के मामले में MP बर 1 पर
BNS धारा के तहत एमपी में 19 हजार 658 अश्लीलता के मामले दर्ज हुए। 2022 में यह आंकड़ा करीब 10 हजार था, 2023 में 12 हजार 574 हुआ और अब 19 हजार 658 तक पहुंच गया है।
देश के कुल 40 हजार 919 मामलों में से करीब 48% सिर्फ MP से हैं। लगातार तीसरे साल MP इस श्रेणी में नंबर 1 पर है। दूसरे नंबर पर तमिलनाडु है जहां 9,561 मामले हैं, यानी MP से आधे से भी कम।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बढ़ोतरी के दो कारण हैं। पहला BNS लागू होने के बाद नई धाराओं के तहत ज्यादा मामले दर्ज हो रहे हैं। दूसरा मोबाइल फोन और सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकतें वास्तव में बढ़ी हैं।
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हत्या में कमी, अपहरण में बढ़ोतरी
हत्या के मामले पिछले दो साल में थोड़े कम हुए हैं। 2022 में एक हजार 978 केस थे, जो 2024 में घटकर एक हजार 813 रह गए। फिर भी देश में हत्या के मामलों में MP चौथे नंबर पर है। हत्याओं के सबसे आम कारण निजी दुश्मनी, जमीन के झगड़े और पैसों की लालच हैं।
वहीं अपहरण के मामले बढ़ गए हैं। 2024 में ये 11 हजार 847 पर पहुंच गए, जबकि 2022 में 10 हजार 409 थे। यानी हर दिन करीब 32 अपहरण हो रहे हैं।
इनमें से 11 हजार 646 मामले लड़कियों के अपहरण विवाह से जुड़े हैं, जो खासकर गांवों में लड़कियों की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हैं।
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छह साल से नंबर एक पर मध्यप्रदेश
बच्चों के खिलाफ अपराध में MP तीसरे स्थान पर आ गया है। पिछले साल यह पहले नंबर पर था। यह एकमात्र उल्लेखनीय सुधार है, लेकिन बच्चों की हत्या के 125 मामलों में 81 लड़कियां थीं। वहीं 16 बच्चियों की हत्या दुष्कर्म के बाद की गई।
बच्चों को लावारिस छोड़ने में एमपी छह साल से देश में पहले स्थान पर है। भ्रूण हत्या के 27 मामलों में भी MP नंबर 1 है। बुजुर्गों के खिलाफ पांच हजार 857 मामले दर्ज हुए। एमपी लगातार दूसरे साल इस श्रेणी में भी देश में पहले स्थान पर है।
सरकार और विपक्ष क्या कहते हैं
मध्यप्रदेश सरकार का तर्क है कि ज्यादा FIR दर्ज होना बेहतर पुलिसिंग का संकेत है। बच्चों के अपराध में पहले से तीसरे स्थान पर आना सुधार बताया जा रहा है। लाड़ली बहना और "लाडली लक्ष्मी" जैसी योजनाओं का हवाला भी दिया जाता है।
दूसरी तरफ कांग्रेस और आदिवासी संगठनों का कहना है कि आदिवासी भूमि अधिकार और जंगल कानूनों को कमजोर किया गया है। 50% से कम दोषसिद्धि दर न्याय व्यवस्था की नाकामी है, अपराध घटने का संकेत नहीं।
यह खबर क्यों जरूरी है
NCRB 2024 की यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है। यह उन लाखों नागरिकों के जीवन की तस्वीर है जो सुरक्षा, न्याय और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
ST अत्याचार में नंबर 1 और 50% से कम दोषसिद्धि दर यह बताती है कि यह अधिकार कागज पर ज्यादा, जमीन पर कम है। जब बच्चियों को लावारिस छोड़ा जाता है, गर्भवती महिलाओं से दुष्कर्म होता है और आदिवासी युवकों को जातिगत अपमान झेलना पड़ता है, तो यह सामाजिक नैतिकता का संकट है।
डिजिटल माध्यमों पर अश्लीलता में 48% हिस्सेदारी बताती है कि तकनीक का दुरुपयोग एक नई चुनौती बन चुका है। यह खबर नागरिकों को यह जानने का अधिकार देती है कि उनका राज्य सुशासन के दावों पर कितना खरा उतरता है।
FAQ
- MP में अश्लीलता के मामले इतने ज्यादा क्यों हैं और क्या यह सिर्फ कानून बदलने का असर है?
1 जुलाई 2024 से BNS (Bharatiya Nyaya Sanhita) लागू हुआ। पुरानी IPC धारा 294 की जगह BNS धारा 296 आई। नई धाराओं के तहत पुलिस ज्यादा मामले दर्ज कर रही है, इसलिए आंशिक रूप से यह कानूनी बदलाव का असर है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल और सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकतों में वास्तविक बढ़ोतरी भी हुई है। दोनों कारण मिलकर इस आंकड़े को देश के कुल का 48% तक ले गए हैं। - NCRB की 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट में मध्यप्रदेश की स्थिति कैसी है?
NCRB (National Crime Records Bureau) की रिपोर्ट के अनुसार MP में 2024 में 2,82,874 IPC/BNS मामले दर्ज हुए, जो देश में तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। अपराध दर 494.4 प्रति लाख है, जो राष्ट्रीय औसत 418.9 से करीब 18% ज्यादा है। ST अत्याचार में MP देश में पहले, SC अत्याचार में दूसरे, अश्लीलता में पहले और बुजुर्गों के खिलाफ अपराध में भी पहले स्थान पर है। हत्या और बच्चों के अपराध में मामूली सुधार हुआ है। - मध्यप्रदेश में ST यानी अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार इतने ज्यादा क्यों हैं?
MP में 21% से ज्यादा आदिवासी आबादी है। राज्य में कोयला, बॉक्साइट और हीरे के खनन क्षेत्र मुख्यतः आदिवासी बहुल इलाकों में हैं। संसाधनों पर कब्जे की होड़, जंगल जमीन से बेदखली और जातिगत मानसिकता मिलकर हिंसा को बढ़ावा देते हैं। दोषसिद्धि दर 50% से कम होने की वजह से अपराधियों को सजा का डर नहीं रहता। अदालतों में लंबित मामले, गवाहों का मुकरना और कमजोर अभियोजन न्याय में रोड़ा बनते हैं।