NEET पेपर लीक: CBI के निशाने पर 1500 करोड़ का साम्राज्य, सरगना की कोचिंग के 3 छात्र भोपाल AIIMS में
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI को अहम सुराग मिले हैं।
- लातूर के कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर को इस पूरे नेटवर्क का सरगना बताया जा रहा है।
- उसकी कोचिंग से पढ़े तीन छात्र अभी भोपाल AIIMS (Bhopal AIIMS) में पढ़ रहे हैं।
- पिछले साल परीक्षा से पहले नीट का पेपर लातूर के रेनुकाई करियर सेंटर तक पहुंचा था।
- मोटेगांवकर का कोचिंग कारोबार 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा का बताया जा रहा है।
NEET लीक में CBI को मिले नए सुराग
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक की जांच में CBI को ताजा और अहम सुराग हाथ लगे हैं। जांच एजेंसी ने पाया कि पिछले साल यानी नीट-2025 परीक्षा से पहले पेपर लातूर के रेनुकाई करियर सेंटर तक पहुंच गया था।
इस कोचिंग सेंटर के संचालक शिवराज मोटेगांवकर हैं। CBI को संदेह है कि मोटेगांवकर का पुराना और मजबूत सांठगांठ वाला नेटवर्क इस लीक के पीछे था।
3 छात्र भोपाल AIIMS में
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि मोटेगांवकर की कोचिंग से नीट-2025 में सफल हुए छात्रों की जब पड़ताल हुई, तो बड़ी बात सामने आई। दो छात्रों का चयन दिल्ली एम्स में हुआ और पांच छात्रों का हैदराबाद एम्स में। इसके अलावा तीन छात्रों का चयन मध्यप्रदेश के भोपाल एम्स में हुआ है।
एक-एक छात्र देवघर, गोरखपुर, राजकोट, रायपुर और मंगलगिरी एम्स में भी है। ये सभी वे छात्र हैं जो इस कोचिंग के नेटवर्क से जुड़े रहे। अब जांच में यह देखा जा रहा है कि इनमें से कितनों को वन-ऑन-वन मीटिंग कोर्स की आड़ में पेपर मिला था।
10 बच्चों से शुरू हुआ, अब 40 हजार से ज्यादा छात्र
शिवराज मोटेगांवकर लातूर के एक छोटे से गांव से निकले हैं। करीब 25 साल पहले उन्होंने धाराशिव जिले के उमरगा कॉलेज में एक पार्ट-टाइम शिक्षक के तौर पर काम शुरू किया था।
साल 1999-2000 में लातूर में महज 10 बच्चों के साथ एक छोटी सी दुकान में आरसीसी क्लासेस नाम से कोचिंग शुरू की। आज उनका नेटवर्क लातूर, नांदेड़, नागपुर, जलगांव, संभाजीनगर, पुणे समेत 8 शहरों में फैला है। इन सभी केंद्रों में 40 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं।
इतना ही नहीं, शहर और हाईवे पर कई प्रमुख लोकेशन पर जमीनें भी उनके नाम हैं। जानकारों के मुताबिक उनका कुल कारोबार 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा का है।
निशाने पर वे छात्र जो अमीर और औसत से बेहतर थे
CBI की जांच में एक और पैटर्न उभरा है। कोचिंग में निशाने पर ऐसे छात्र रखे जाते थे जो आर्थिक रूप से संपन्न थे और पढ़ाई में भी औसत से बेहतर थे। यानी जो पैसे भी दे सकते थे और थोड़ी-बहुत पढ़ाई के साथ थोड़ी मदद पाकर पास हो सकते थे।
यह चयन बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत होता था, ताकि संदेह कम रहे और सफलता दर ऊंची दिखे।
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