नेहा पच्चीसिया को गिरफ्तारी से राहत पर हाईकोर्ट का इनकार, सरकार के जवाब के बाद होगा फैसला

Neel Tiwari | Sept 17, 2026, 13:35 IST
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नेहा पच्चीसिया की FIR रद्द करने वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने फिलहाल राहत नहीं दी। आज 17 सितंबर को इसका आदेश कोर्ट ने जारी किया। कोर्ट ने राज्य से विस्तृत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नेहा पच्चीसिया ने FIR रद्द करने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है।
  • राज्य ने याचिका पर जवाब देने के लिए समय मांगा है।
  • नेहा ने सुनवाई तक कार्रवाई रोकने की मांग की थी।
  • राज्य ने जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।
  • हाई कोर्ट अब 21 सितंबर को अंतरिम राहत पर सुनवाई करेगा।

FIR रद्द कराने पहुंचीं नेहा, कोर्ट ने फिलहाल राहत नहीं दी

पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया को हाई कोर्ट से फिलहाल अंतरिम राहत नहीं मिली। मामला उनकी FIR रद्द करने की याचिका से जुड़ा है। जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने 16 सितंबर को सुनवाई की।



जैसा द सूत्र ने बताया था कि इस मामले का फैसला रिजर्व नहीं किया गया है और जल्द सामने आएगा। आदेश आज 17 सितंबर को दोपहर 12:22 बजे जारी किया गया। कोर्ट ने राज्य को विस्तृत जवाब दाखिल करने का समय दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।





नेहा की दलील, FIR में उनके खिलाफ सीधा आरोप नहीं

नेहा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नेहा को झूठा फंसाया गया है। उनका कहना था कि FIR प्रथम दृष्टया भी अपराध नहीं दिखाती। उन्होंने नेहा के खिलाफ कोई सीधा आरोप नहीं होने की बात कही।



बचाव पक्ष ने सह आरोपियों से संबंध होने से भी इनकार किया। नेहा की ओर से बच्चों की जिम्मेदारी का भी हवाला दिया गया।



अंतरिम राहत पर अभी फैसला नहीं, राज्य से मांगा जवाब

नेहा के वकील ने अंतरिम राहत की मांग की थी। उन्होंने कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया था। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एचएस रूपराह ने विरोध किया। राज्य ने मामले में विस्तृत जवाब देने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने इस स्तर पर राहत देने से इनकार नहीं किया। लेकिन राहत पर फैसला जवाब आने के बाद करने की बात कही।



राज्य का दावा, जांच में सहयोग नहीं कर रहीं नेहा

राज्य ने सुनवाई में नेहा पर गंभीर आरोप लगाए। सरकारी पक्ष ने कहा कि नेहा जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। राज्य ने उनके विदेश जाने की आशंका भी जताई। इसी आधार पर लुक आउट सर्कुलर की कार्रवाई बताई गई। अभियोजन ने नेहा पर सह आरोपियों से मिलीभगत का आरोप लगाया। यह भी बताया गया कि उनकी अग्रिम जमानत पहले खारिज हो चुकी है।



क्षितिज को लेकर सामने आया था चौंकाने वाला दावा

पिछली सुनवाई में क्षितिज राज बारापात्रे को लेकर दावा सामने आया था। राज्य के अनुसार क्षितिज नेहा के घर में उनके पति की तरह रहता था। कुछ पुलिसकर्मियों के बयानों का भी हवाला दिया गया था।



जांच में घर के खर्च से जुड़े लेनदेन की बात भी कही गई। हालांकि, नेहा और क्षितिज दोनों ने पहले संबंधों से इनकार किया था। दोनों ने जिला कोर्ट में एक-दूसरे को पहचानने से भी इनकार किया था।



जमीन सौदे से जुड़ा है FIR का पूरा मामला

FIR कटनी के जमीन सौदे से जुड़ी है। आरोप है कि जमीन सौदे में नेहा की भूमिका रही। जांच में क्षितिज और मरूफ अहमद हनफी का नाम भी आया। आरोप है कि क्षितिज ने जमीन खरीदने के लिए रकम उपलब्ध कराई।



नेहा पर जेल में बंद आरोपी को लाभ पहुंचाने का आरोप भी है। उसके परिजनों पर दबाव बनाकर जमीन लेने का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों को नेहा की ओर से गलत बताया गया है।



शिकायतकर्ता के वकील ने भी सुरक्षा का मुद्दा उठाया

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अवनीश तिवारी वीडियो कांफ्रेंस से जुड़े। उन्होंने खुद को शिकायतकर्ता की ओर से वकील बताया। उन्होंने जान से मारने की धमकी मिलने का दावा किया।



उन्होंने शिकायत वापस लेने का दबाव होने की बात भी कही। उन्होंने 11 सितंबर के आसपास ट्रक चढ़ाने की कोशिश बताई। कोर्ट ने उनके वकालतनामे को लेकर सवाल किया। वकालतनामा नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें सावधानी बरतने को कहा।



कोर्ट ने वकालतनामा नहीं होने पर वकील को चेताया

कोर्ट ने पूछा कि क्या अवनीश तिवारी ने वकालतनामा दिया है। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई वकालतनामा दाखिल नहीं हुआ है। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें भविष्य में सावधानी बरतने को कहा। कोर्ट ने कहा कि पहले अनुमति लेकर ही पक्ष रखना चाहिए। खासकर तब, जब प्रतिनिधित्व का अधिकार पत्र मौजूद नहीं हो।



21 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

जबलपुर हाई कोर्ट ने फिलहाल FIR रद्द करने पर कोई फैसला नहीं दिया। अंतरिम राहत पर भी अभी आदेश नहीं हुआ है। कोर्ट ने राज्य को अगली सुनवाई से पहले जवाब देने कहा। कोर्ट ने 21 सितंबर की तारीख तय की है। उसी दिन अंतरिम राहत के सवाल पर विचार होगा। FIR रद्द करने की अंतिम मांग पर भी आगे सुनवाई होगी।



अभी नेहा को नहीं मिली राहत

16 सितंबर के आदेश से नेहा को अंतरिम संरक्षण नहीं मिला है। कोर्ट ने कार्रवाई रोकने का आदेश भी नहीं दिया है। फिलहाल राज्य को जवाब दाखिल करने का मौका मिला है। अगली सुनवाई में अंतरिम राहत पर विचार होगा। इसलिए अभी FIR रद्द होने की स्थिति नहीं बनी है। इस मामले में अंतिम फैसला आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगा।



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