स्वास्थ्य विभाग की आशंका को दरकिनार कर बैठ रहे NHM के लापरवाह अधिकारी
ऐसे समझें पूरा मामला...
- स्वास्थ्य संचालनालय ने अप्रैल 2026 को 8 जिलों को दिए थे NHM भर्ती की जांच के आदेश।
- स्वास्थ्य विभाग की आशंका और निर्देशों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने किया अनदेखा।
- NHM के राज्य मुख्यालय स्तर से भी संविदा भर्तियों में गड़बड़ी की नहीं हुई निगरानी।
- स्वास्थ्य विभाग द्वारा सात दिन में मंगाई गई जानकारी देने में नाकाम रहे जिले के अधिकारी।
- संजीवनी क्लीनिक और अन्य भर्तियों में धांधली सामने आने पर अब हो रही है धरपकड़।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में संविदा भर्ती का फर्जीवाड़ा नया नहीं है। हांलाकि इस बार स्वास्थ्य विभाग की आशंका को नजरअंदाज करना अलग और हैरान करने वाला है।
स्वास्थ्य विभाग ने संविदा भर्तियों में गड़बड़ी की आशंका को पहले ही भांप लिया था। विभाग के संयुक्त संचालक द्वारा सवा माह पहले ही भर्तियों की जांच के निर्देश जारी कर दिए थे।
संयुक्त संचालक डॉ. शिरीष रघुवंशी की ओर से प्रदेश के आठ जिलों के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजा गया था। इसमें भर्तियों से संबंधित प्रकरणों की बिंदुवार जांच कराने कहा गया था।
स्वास्थ्य विभाग के इन निर्देशों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में बैठे जिम्मेदारों ने अनदेखा कर दिया। नतीजा अब एक के बाद एक भर्ती फर्जीवाड़े उजागर हो रहे हैं।
निगरानी में फेल रहा NHM
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा बीते दो- तीन सालों में बड़े स्तर पर संविदा भर्तियां की गई हैं। इनमें पैरामेडिकल, स्टाफ नर्स, तकनीशियन से लेकर डॉक्टरों के पद भी शामिल हैं।
संविदा स्तर पर होने वाली इन भर्तियों की सूचना NHM पोर्टल पर जारी की जाती है। जिसके बाद वॉक इन इंटरव्यू और दूसरी प्रक्रियाओं के जरिए उम्मीदवारों का चयन होता है। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को संबंधित पदों पर विभिन्न जिलों में पदस्थ कर दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में कई लूप होल्स हैं। इसी का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। वहीं स्वास्थ्य मिशन के अधिकारी दस्तावेज सत्यापन से लेकर पदस्थापना तक निगरानी में पूरी तरह फेल साबित हुए।
आठ जिलों में जताई थी शंका
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक द्वारा 4 अप्रैल को लिखे गए पत्र में सीहोर, भोपाल, बैतूल, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, विदिशा और शिवपुरी जिलों का उल्लेख किया गया है।
इन जिलों में बीते महीनों के साथ ही एक- दो साल में हुई संविदा भर्तियों पर आशंका जताई गई थी। इसके साथ ही इन सभी भर्तियों की विभिन्न बिंदुओं के आधार पर जांच की जानी थी।
यह जांच मानव अधिकार आयोग के एक प्रकरण के संदर्भ में भी आवश्यक थी। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को सात दिन में रिपोर्ट सौंपनी थी।
अब सामने आ रही धांधली
संविदा भर्तियों में हुई गड़बड़ी अब एक- एक कर सामने आ रही है। बीते पखवाड़े दमोह जिले में ही संजीवनी क्लीनिक के दो डॉक्टर पकड़े गए हैं। दोनों ही एमबीबीएस की फर्जी डिग्री के सहारे नियुक्ति पाने में कामयाब हुए थे। उनसे पूछताछ के बाद जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर और सीहोर से भी फर्जीवाड़े में शामिल आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
इसके साथ ही एनएचएम मुख्यालय के एक संविदाकर्मी को भी हिरासत में लिया गया है। यानी स्वास्थ्य विभाग की आशंका की अनदेखी करना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भारी पड़ रहा है।
पूरे प्रदेश में होगी भर्तियों की जांच
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की भर्तियों में थोकबंद धांधली सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में आ गया है। एसीएस अशोक वर्णवाल ने प्रदेश के 55 जिलों में 2023 से 2026 के बीच NHM की संविदा भर्तियों की जांच के आदेश दिए हैं।
यह जांच थर्ड पार्टी ऑडिट के रूप में कराई जाएगी ताकि किसी तरह फर्जीवाड़े पर पर्दा न डाला जा सके। एसीएस के इस आदेश के बाद स्वास्थ्य मिशन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक खलबली मच गई है।
सेंट्रल मॉनिटरिंग सेल बनाई
स्वास्थ्य विभाग 2023 से 2026 तक की सभी NHM भर्तियों का ऑडिट कराएगा। निजी एजेंसी हर नियुक्ति के दस्तावेज चेक करेगी। इसके साथ ही अब नर्सिंग, एमपी पैरामेडिकल काउंसिल और विश्वविद्यालय से डिग्री के ऑनलाइन वेरिफिकेशन के बाद ही पदस्थापना होगी।
स्वास्थ्य विभाग के 4 अप्रैल के पत्र पर कार्रवाई न करने वाले 8 CMHO और संबंधित DPM को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इसके साथ ही व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए NHM मिशन संचालक ने सेंट्रल मॉनिटरिंग सेल का गठन किया है। अब हर भर्ती की लाइव ट्रैकिंग यह सेल करेगी।
ये मामले आए हैं सामने...
- दमोह (2025): दमोह में 20 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO)की भर्ती में 8 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इन सभी का चयन मध्यप्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के सर्टिफिकेट के आधार पर हुई थी। CMHO डॉ. सुमित अग्रवाल ने नियुक्ति रोककर कोतवाली में FIR दर्ज कराई थी। इस मामले में जिला कार्यक्रम प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
- विदिशा (2025): विदिशा जिले में संविदा भर्ती के दौरान 40 लोगों को नियुक्ति दी गई थी। सीएचओ के इन 40 पदों पर नियुक्ति पाने वाले 12 अभ्यर्थियों के दस्तावेज भी संदिग्ध थे। इनके द्वारा जिन अस्पतालों के अनुभव प्रमाण पत्र लगाए गए थे वे अस्पताल संचालित ही नहीं थे। सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत की जांच में खुलासा होने परतीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
- मुरैना (2023): जिले में एएनएम के 75 पदों पर भर्ती में NHM का बाबू 2 लाख की रिश्वत लेते पकड़े जाने पर सच्चाई उजागर हुई। लोकायुक्त द्वारा पकड़े गए बाबू से पूछताछ के बाद 11 संविदा नियुक्तियां रद्द की गई और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में DPM को हटाया गया था।
- भिंड (2025): एनएचएम की 30 स्टाफ नर्स की भर्ती में 7 की डिग्री फर्जी मिली। मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल से कराए गए सत्यापन में यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। जिसके बाद इन सभी की सेवा रद्द कर अपराध दर्ज कराए गए हैं।
- ग्वालियर (2025): लैब टेक्नीशियन भर्ती में मेरिट के बाद दस्तावेज बदलकर कम नंबर वालों को नौकरी दी गई। मानव अधिकार आयोग द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद जांच में 9 नियुक्ति अवैध मिलीं। DPM और लेखापाल को निलंबित किया गया था।
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