हाईकोर्ट में लगे सरकार पर मामला टालने के आरोप, अब 22 अप्रैल को स्पीकर करेंगे सुनवाई

Neel Tiwari | Apr 20, 2026, 17:19 IST
Photograph: (the sootr)
बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल मामले में अब सुनवाई का फोकस स्पीकर पर आ गया है। विधानसभा स्पीकर ने 9 अप्रैल को होने वाली सुनवाई को टालकर 22 अप्रैल कर दिया है। अब हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

News in Short

  • सप्रे की भाजपा सदस्यता के 5 मई को 2 साल पूरे - कांग्रेस
  • निर्मला सप्रे कर चुकी है भाजपा सदस्य होने से इनकार
  • 9 अप्रैल को विधानसभा स्पीकर के समक्ष होने वाली सुनवाई टली, अब 22 अप्रैल को तय
  • सरकार पर लगे केस को जानबूझकर टालने के आरोप
  • विधानसभा स्पीकर की सुनवाई के बाद होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

Intro

बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल मामले में अब सुनवाई का फोकस स्पीकर पर आ गया है। विधानसभा स्पीकर ने 9 अप्रैल को होने वाली सुनवाई को टालकर 22 अप्रैल कर दिया है। अब हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 29 अप्रैल को होगी। उमंग सिंघार की ओर से देरी को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।



News in detail

पहले स्पीकर के सामने सुनवाई, फिर हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

जबलपुर हाई कोर्ट में 20 अप्रैल को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले मध्यप्रदेश विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष कार्यवाही पूरी होना आवश्यक है। अब 22 अप्रैल को स्पीकर इस दल-बदल याचिका पर सुनवाई करेंगे, जिसके बाद ही मामला हाई कोर्ट में आगे बढ़ेगा। कोर्ट ने इसी आधार पर अगली सुनवाई 29 अप्रैल तय की है।



सरकार ने मांगा समय, महाधिवक्ता की व्यस्तता का हवाला

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि महाधिवक्ता इंदौर में भोजशाला मामले की सुनवाई में व्यस्त हैं, इसलिए इस केस को आगे बढ़ाने के लिए समय दिया जाए। इस पर कोर्ट ने मामले को स्थगित करते हुए नई तारीख तय कर दी, जिससे स्पीकर के समक्ष होने वाली कार्यवाही का परिणाम भी सामने आ सके।



उमंग सिंघार ने लगाए गंभीर आरोप

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में कहा कि इस मामले को लगातार टाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले 9 अप्रैल को स्पीकर के सामने सुनवाई तय थी, लेकिन “भोपाल में मौजूद न होने” का कारण बताकर इसे 22 अप्रैल तक टाल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 5 मई को निर्मला सप्रे के भाजपा जॉइन करने के दो साल पूरे हो जाएंगे, फिर भी उनकी सदस्यता पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश है कि ऐसे मामलों में तीन माह में फैसला लिया जाना चाहिए।



क्या है पूरा मामला?

दरअसल, सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस विधायक रहीं निर्मला सप्रे ने 5 मई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद उमंग सिंघार ने दल-बदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की याचिका विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष दायर की। आरोप है कि संविधान की 10वीं अनुसूची के बावजूद इस पर लंबे समय से कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।



सोशल मीडिया बनाम कोर्ट में दावा

इस केस में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने आया है। जहां एक ओर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं के साथ निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने की तस्वीरें मौजूद हैं, वहीं कोर्ट में उनकी ओर से यह दावा किया गया है कि वह अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट को फिलहाल निर्णायक साक्ष्य नहीं माना है और ठोस प्रमाण पेश करने के निर्देश दिए हैं।



अब 22 अप्रैल पर टिकी नजरें

अब इस पूरे विवाद की दिशा काफी हद तक 22 अप्रैल को स्पीकर के समक्ष होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी। इसके बाद 29 अप्रैल को हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि मामले में आगे क्या रुख अपनाया जाएगा। फिलहाल, देरी को लेकर उठ रहे सवालों ने इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।



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