NTA की 14 में से 5 परीक्षाओं में समस्याएं, ब्लैकलिस्टेड कंपनी ले रहीं ठेके, कमाए 3512 करोड़

Sanjay Gupta | May 17, 2026, 15:33 IST
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की करतूतें संसदीय समिति उच्च शिक्षा की रिपोर्ट में उजागर हुई हैं। इसमें हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट डॉ. के राधाकृष्णन की भी रिपोर्ट है। एनटीए ने फीस से 6 सालों में 3512 करोड़ रुपए लिए, इसमें शुद्ध मुनाफा 448 करोड़ रुपए है।

एनटीए की नीट 2026 रद्द हो गई है। साल 2024 में भी धांधली हुई थी और अब 2025 के भी क्लीन होने पर आशंका हो गई है। नीट की कार्यशैली संतोषजनक नहीं है। ब्लैकलिस्टेड फर्म ठेके ले रही हैं। यह सारे खुलासे उच्च शिक्षा पर बनी संसदीय समिति जिसके अध्यक्ष मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह रहे हैं, उसकी रिपोर्ट में हैं।



यह रिपोर्ट द सूत्र के पास मौजूद है। इस रिपोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा ही बनी हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट डॉ. के राधाकृष्णन की कमेटी की रिपोर्ट को आधार बनाया है। यह रिपोर्ट भी इसी संसदीय कमेटी की रिपोर्ट में लगी है जो संसद में 8 दिसंबर 2025 को पेश हुई थी।



केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए प्रमुख प्रदीप जोशी से इस्तीफा मांगा जा रहा है। 'द सूत्र' ने पहले भी जोशी की राजनीतिक नियुक्ति से लेकर उनके विविध कार्यकाल के विवाद बताए थे।



एनटीए की 5 परीक्षाओं में गंभीर समस्या, पेपर लीक भी

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि एनटीए की कार्यशैली संतोषजनक नहीं रही है। कमेटी ने कहा कि अकेले साल 2024 में, एनटीए द्वारा आयोजित 14 प्रतियोगी परीक्षाओं में से कम से कम पांच में गंभीर समस्याएं आईं।



इसके चलते तीन परीक्षाएं (यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-नेट और नीट-पीजी) स्थगित करनी पड़ीं, एक परीक्षा (नीट-यूजी) में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं हुईं और एक परीक्षा सीयूईटी (यूजी/पीजी) के परिणाम स्थगित करने पड़े।



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आंसर की भी गलत दे रहा एनटीए

कमेटी ने कहा कि जनवरी 2025 में आयोजित जेईई मेन 2025 में, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की अंतिम आंसर की में त्रुटियों के कारण कम से कम 12 प्रश्न वापस लेने पड़े। कमेटी ने पाया कि एनटीए द्वारा बीते सालों से सीयूईटी परीक्षा के परिणाम समय पर घोषित नहीं किए गए हैं। इससे देरी होती है और यूनिवर्सिटी का कैलेंडर भी देर से शुरू होता है। इससे छात्रों पर बेवजह का दबाव बन रहा है।



छात्रों का भरोसा कम कर रही है एनटीए

कमेटी ने कहा कि ऐसी घटनाएं छात्रों का सिस्टम पर विश्वास कम करती हैं। इसलिए समिति अनुशंसा करती है कि एनटीए को शीघ्र ही अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों।



एनटीए का शुद्ध मुनाफा 448 करोड़ रुपए

कमेटी ने रिपोर्ट में बताया कि विविध परीक्षाओं के शुल्क के जरिए एनटीए को साल भर में तीन हजार 512 करोड़ 98 लाख रुपए की कमाई हुई है। वहीं परीक्षाओं के संचालन पर उसने तीन हजार 64 करोड़ 77 लाख रुपए खर्च किए हैं।



इससे पिछले छह वर्षों में 448 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। कमेटी ने इस राशि को एजेंसी के परीक्षा सिस्टम को मजबूत करने और खुद परीक्षा आयोजित करने की क्षमता विकसित करने में खर्च करने के लिए कहा था।



ब्लैकलिस्टेड फर्मों को दिया जा रहा ठेका

कमेटी ने अपनी जांच में कहा कि पेपर सेटिंग, प्रशासन और सुधार से जुड़ी कई फर्मों को किसी एक संगठन/राज्य सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है तो दूसरे राज्य में ठेका मिल जाता है। ऐसी ब्लैकलिस्टेड फर्मों को एनटीए या राज्य सरकारों द्वारा किसी भी प्रवेश परीक्षा के लिए नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।





कमेटी ने अनुशंसा की है कि विभाग ब्लैकलिस्टेड फर्मों की एक राष्ट्रव्यापी सूची तैयार करे, जिसमें उन फर्मों में शामिल व्यक्तियों या संस्थाओं के नाम भी हों। भविष्य में ऐसी फर्मों/व्यक्तियों/संस्थाओं को ठेके प्राप्त करने से रोका जा सके।



ऑफलाइन परीक्षा का बोला, मंत्री बोले ऑनलाइन कराएंगे

वहीं कमेटी ने ऑफलाइन (पेन-पेपर) और सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट ऑनलाइन दोनों का अध्ययन किया है। कमेटी ने साफ कहा कि ऑफलाइन सिस्टम अधिक मजबूत है और इसमें सिस्टम डेवलप किया जा सकता है। सीबीटी में हैकिंग की समस्याएं रहती हैं।



कमेटी ने ऑफलाइन परीक्षा की अनुशंसा की है। उधर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कमेटी के विपरीत घोषणा करते हुए कहा कि अगले साल से नीट ऑनलाइन होगी। वहीं कमेटी ने यह भी कहा कि यदि सीबीटी कराना है तो यह केवल सरकारी केंद्रों पर ही होना चाहिए। निजी को केंद्र ना बनाएं।



मंत्री प्रधान और जोशी का मांगा जा रहा है इस्तीफा

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इन्दौर में लगातार कहा कि इस मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए चीफ प्रदीप जोशी से इस्तीफा लिया जाना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो पीएम उन्हें बर्खास्त कर दें। यही बात लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उठाते हुए इस्तीफा मांगा है।



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संसदीय रिपोर्ट पर दिग्गी ने प्रधान को दिया जवाब

वहीं मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाब देते हुए दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया और संसदीय समिति की रिपोर्ट की लिंक जारी कर दी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि संसदीय समिति रिपोर्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने कहा कि मैं संसदीय स्थायी समिति द्वारा उठाए गए सवालों (red flags) पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा... संसदीय स्थायी समिति में विपक्ष के सदस्य भी होते हैं। वे चीजों को एक खास तरीके से लिखते हैं, यह आप भी जानते हैं। इसलिए, मैं स्थायी समिति पर कुछ नहीं बोलूंगा।



पूर्व सीएम ने कहा कि मंत्री का यह बयान बेहद परेशान करने वाला और घोर निंदनीय है। सच तो यह है कि समिति में शामिल संसद के 30 सदस्यों में से 17 सदस्य खुद BJP के हैं। मंत्री को न केवल माफ़ी मांगनी चाहिए, बल्कि उन्हें इस्तीफा भी दे देना चाहिए। अगर वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो पीएम पद से हटा दें।



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