नर्सिंग कॉलेज परीक्षा: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, फेल कॉलेजों के छात्र होंगे शिफ्ट

Jitendra Shrivastava | Aug 25, 2026, 19:50 IST
Photograph: (THESOOTR)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, CBI जांच में ग्रीन चेक पाने वाले नर्सिंग कॉलेजों में ही छात्र परीक्षा दे सकेंगे। फेल कॉलेजों के छात्रों को दूसरे संस्थान में शिफ्ट किया जाएगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • ग्रीन चेक कॉलेजों में ही अब मिलेगा एग्जाम का मौका।
  • फर्जी कॉलेजों के छात्रों को मिलेगा नया ठिकाना।
  • CJI ने छात्रों से पूछा, पैसा किसे दिया था।
  • 8 हजार छात्रों का भविष्य कोर्ट के फैसले पर टिक गया है।
  • 31 अगस्त से पहले हाईकोर्ट में होगी बड़ी सुनवाई।

मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अब परीक्षा को लेकर स्थिति साफ कर दी है। CBI जांच में जिन कॉलेजों को ग्रीन चेक मिलेगा, वहीं छात्र परीक्षा दे सकेंगे।



जिन कॉलेजों को हरी झंडी नहीं मिलेगी, वहां के छात्रों को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा। यह मामला ग्वालियर-चंबल संभाग के करीब 130 कॉलेजों से जुड़ा है।



कोर्ट ने क्या कहा

मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और गुणवत्ता पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। इसी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है।



कोर्ट ने साफ कहा कि CBI जांच में ग्रीन चेक पाने वाले कॉलेजों के छात्र ही उसी कॉलेज में परीक्षा दे पाएंगे। जिन कॉलेजों को CBI की मंजूरी नहीं मिलेगी, उनके छात्रों को दूसरे संस्थान में भेजा जाएगा।



सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI – Chief Justice of India) सूर्यकांत ने छात्रों को सीधी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि छात्र उसी मैनेजमेंट से सवाल करें, जिसे उन्होंने फीस या डोनेशन दिया है।



उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज प्रबंधन को CBI जांच का सामना करना चाहिए। अगर कॉलेज नियमों के मुताबिक सही है, तो जांच में उसकी स्थिति खुद साफ हो जाएगी।



किन छात्रों का है यह मामला

यह मामला 2020-21 और 2021-22 सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों से जुड़ा है। छात्रों के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके कॉलेजों को पहले की समिति ने नियमों के अनुरूप पाया था।



वकील ने यह भी कहा कि दाखिले के समय से ही यह मामला कोर्ट की निगरानी में है। कॉलेजों का निरीक्षण भी पहले हो चुका है। ऐसे में छात्रों को परीक्षा में बैठने का मौका मिलना चाहिए।



130 कॉलेजों की जांच पर क्यों लगी थी रोक

मध्य प्रदेश NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार के अनुसार, हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों की अनियमितताओं पर CBI जांच के आदेश दिए थे। उनके मुताबिक ग्वालियर-चंबल संभाग के करीब 130 कॉलेजों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।



इन कॉलेजों ने CBI जांच पर रोक की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने के बाद इन कॉलेजों की जांच रुक गई थी। वहीं प्रदेश के बाकी नर्सिंग कॉलेजों की जांच पूरी हो चुकी है। उन्हें सूटेबल, अनसूटेबल और डेफिशिएंट तीन श्रेणियों में बांटा गया है।



कितने छात्रों पर पड़ेगा असर

रवि परमार का दावा है कि इन 130 कॉलेजों में करीब 8 से 10 हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब या तो इन कॉलेजों की CBI जांच होगी, या छात्रों को उपयुक्त कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा।



उन्होंने यह भी कहा कि जांच में फर्जी पाए जाने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। लेकिन इसका असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए।



आगे क्या होगा

छात्रों के वकील ने बताया कि छात्र हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। 31 अगस्त से पहले उनकी याचिका पर सुनवाई की मांग की जाएगी। अब छात्रों के लिए उनके कॉलेज की CBI जांच सबसे अहम हो गई है।



कॉलेज जांच में उपयुक्त पाया गया तो छात्र वहीं से परीक्षा दे सकेंगे। अगर कॉलेज जांच में उपयुक्त नहीं पाया गया, तो छात्रों को दूसरे संस्थान में भेजा जा सकता है।



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