नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026 में विवादों की झड़ी, महिला आरक्षण के बाद अब योग्यता नियमों पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

Neel Tiwari | Apr 18, 2026, 21:50 IST
nursing officer recruitment 2026
मध्य प्रदेश की नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026 लगातार नए विवादों में उलझती जा रही है। पहले 100% महिला आरक्षण को लेकर कोर्ट में चुनौती दी गई। अब भर्ती प्रक्रिया में योग्यता के नियमों को लेकर एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई है।

News in Short

  • पहले 100% महिला आरक्षण अब डिग्री शर्तों पर उठे सवाल।
  • अब भर्ती नियमों के उल्लंघन और योग्यता शर्तों पर नया विवाद।
  • GNM के बावजूद अतिरिक्त डिग्री की शर्त को बताया अवैध।
  • 12वीं में बायोलॉजी अनिवार्यता पर भी उठे गंभीर सवाल।
  • हाईकोर्ट ने एमपी सरकार और ESB को नोटिस जारी कर मांगा जवाब।

News in detail

मध्यप्रदेश में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026 शुरू से ही विवादों में बनी हुई है। इस भर्ती में आरक्षण से लेकर योग्यता नियमों तक बड़ी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। पहले इस भर्ती में 100% महिला आरक्षण लागू किए जाने को नियमों के विरुद्ध बताते हुए मामला कोर्ट पहुंच चुका है। अब इस भर्ती में योग्यता के लिए तय की गई डिग्री के नियमों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।





भर्ती नियमों से अलग बनाई गई पात्रता शर्तें

जबलपुर निवासी ज्योति साहू और अन्य उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विज्ञापन में निर्धारित शर्तें नियमों के विपरीत हैं। उनका आरोप है कि नियमों के बावजूद विज्ञापन में नई पात्रता शर्तें जोड़ी गई हैं।



अतिरिक्त डिग्री की बाध्यता

याचिका में कहा गया है कि नियमों के अनुसार GNM को नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए पर्याप्त योग्यता माना गया है। इसके बावजूद भर्ती विज्ञापन में GNM धारकों के लिए "पोस्ट बेसिक बी.एस.सी. नर्सिंग" की अनिवार्यता जोड़ दी गई है। यह शर्त उन उम्मीदवारों के लिए बड़ी बाधा बन रही है, जिन्होंने नियमों के अनुसार पढ़ाई पूरी की है। अब वे नौकरी के पात्र होते हुए भी बाहर किए जा रहे हैं।



बायोलॉजी अनिवार्यता पर नया विवाद

भर्ती विज्ञापन की कंडिका 8 (क) में 12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान (PCB) को अनिवार्य कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब उन्होंने GNM कोर्स में प्रवेश लिया था, तब ऐसी कोई शर्त लागू नहीं थी। ऐसे में भर्ती के समय अचानक इस शर्त को लागू करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह कानून के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है। इसे भेदभावपूर्ण और तर्कहीन बताते हुए चुनौती दी गई है।



हाईकोर्ट ने फिर दिखाई सख्ती

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल (ESB) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, सभी याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए भर्ती परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है।



सवालों के घेरे में पूरी भर्ती प्रक्रिया

पहले 100% महिला आरक्षण और अब योग्यता के नियमों में बदलाव, इन विवादों से नर्सिंग भर्ती 2026 की प्रक्रिया में खामियां स्पष्ट हो रही हैं। इससे उम्मीदवारों का भरोसा डगमगा रहा है और सरकार तथा भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब अभ्यर्थियों को इस मामले में हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद है, जो भर्ती प्रक्रिया की दिशा और भविष्य तय करेगा।



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