एमपी में 800 करोड़ का पोषण आहार घोटाला, लोकायुक्त ने अफसरों को किया तलब

Amresh Kushwaha | Jul 05, 2026, 13:13 IST
एमपी में 800 करोड़ का पोषण आहार घोटाला
भोपाल में 800 करोड़ के पोषण आहार घोटाले में लोकायुक्त ने महिला बाल विकास और आजीविका मिशन के अफसरों को तलब किया है। लोकायुक्त के 14 पत्रों के बाद भी विभाग ने कार्रवाई प्रतिवेदन नहीं दिया था।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल में 800 करोड़ रुपए के पोषण आहार घोटाले का मामला सामने आया है।
  • पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने यह शिकायत लोकायुक्त से की थी।
  • लोकायुक्त ने पंचायत विभाग को 14 पत्र भेजे, पर जवाब नहीं मिला।
  • अब महिला बाल विकास और आजीविका मिशन के अफसर तलब किए गए हैं।
  • 24 अगस्त को अफसरों को कार्रवाई प्रतिवेदन के साथ पेश होना है।

क्या है पूरा घोटाला

भोपाल में पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने 800 करोड़ रुपए के कथित पोषण आहार घोटाले की शिकायत की थी। यह शिकायत महालेखाकार (एजी यानी Accountant General) की जांच रिपोर्ट पर आधारित थी। जांच 2018 से 2021 के बीच आठ जिलों में हुई थी। इसी जांच के आधार पर सकलेचा ने लोकायुक्त से शिकायत की। लोकायुक्त ने इसके बाद जांच शुरू की। यह मामला अब भी अधूरा माना जा रहा है।



पोषण आहार योजना क्या है

पोषण आहार योजना बच्चों और महिलाओं को पोषक भोजन देने के लिए चलती है। इसका मकसद कुपोषण कम करना और सेहत सुधारना है। यह योजना आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए लागू होती है। इसमें हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। इसलिए इस योजना में पारदर्शिता बहुत जरूरी मानी जाती है। किसी भी गड़बड़ी का सीधा असर गरीब परिवारों पर पड़ता है। राज्य और केंद्र सरकार दोनों इस योजना के लिए फंड देती हैं। इसलिए इसमें हिसाब-किताब की सख्त निगरानी जरूरी होती है।



किन अफसरों पर आरोप हैं

इस मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैंस पर संगीन आरोप हैं। आजीविका मिशन के तत्कालीन संचालक ललित मोहन बेलवाल पर भी आरोप लगे हैं। इनके अलावा कुछ और अफसरों के नाम भी शामिल हैं। लोकायुक्त इन सभी की भूमिका की जांच कर रहा है। अभी तक किसी अफसर पर औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ होगी।



14 पत्र भेजे, जवाब नहीं आया

लोकायुक्त कार्यालय ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को 14 पत्र भेजे थे। ये पत्र महालेखाकार की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई का प्रतिवेदन मांगने के लिए थे। ये पत्र 30 अक्टूबर 2023 के बाद एक-एक कर भेजे गए थे। हर बार पत्र अपर मुख्य सचिव (एसीएस यानी Additional Chief Secretary) तक भेजा गया था। इसके बावजूद विभाग आज तक जवाब नहीं दे सका। इतने पत्रों के बाद भी कोई ठोस जवाब नहीं आया।



पंचायत विभाग ने मांगी मोहलत

सबसे हैरानी की बात यह है कि पंचायत विभाग ने खुद पांच बार समय मांगा। हर बार जवाब देने के लिए और मोहलत ली गई। आखिरकार 8 जून को विभाग ने जानकारी भेजी। लेकिन लोकायुक्त ने इस जानकारी को अधूरा पाया। यह जानकारी मांगी गई जानकारी से मेल नहीं खाती थी। इससे लोकायुक्त कार्यालय की नाराजगी और बढ़ गई।



अब अफसर होंगे तलब

जवाब से संतुष्ट न होने पर लोकायुक्त ने अब सीधा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया गया है। ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ (सीईओ यानी Chief Executive Officer) को भी बुलाया गया है। दोनों अफसरों को 24 अगस्त को लोकायुक्त कार्यालय आना होगा। उन्हें कार्रवाई प्रतिवेदन भी साथ लाना होगा। लोकायुक्त ने साफ कहा है कि जवाब पूरा होना चाहिए।



क्यों अटकी रही कार्रवाई

पोषण आहार घोटाला का मामला दिखाता है कि बड़े घोटाले की जांच में भी देरी होती है। जिम्मेदार विभाग जवाब देने से बचते रहे हैं। बार-बार मोहलत मांगना जांच को धीमा करता है। इससे शिकायतकर्ता और जनता का भरोसा भी कमजोर होता है। कई बार ऐसे मामलों में सालों तक फैसला नहीं आता। इससे दोषी अफसरों को बचने का मौका मिल जाता है।



पहले भी उठे थे सवाल

यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी योजना में गड़बड़ी की शिकायत आई हो। पहले भी कई योजनाओं में जांच की मांग उठी है। वहीं, अक्सर विभागों की सुस्ती जांच को लंबा खींच देती है। इस मामले में भी दो साल से ज्यादा समय बीत गया है। फिर भी अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है।



जनता से क्यों जुड़ा है मामला

पोषण आहार योजना सीधे गरीब बच्चों और महिलाओं से जुड़ी होती है। यदि इसमें घोटाला हुआ तो असली नुकसान जरूरतमंद लोगों को होता है। ऐसे मामलों में जल्दी जांच और सही कार्रवाई जरूरी है। इससे सरकारी योजनाओं पर लोगों का भरोसा बना रहता है। पारदर्शी जांच से ही असली दोषियों तक पहुंचा जा सकता है।



आगे क्या हो सकता है

24 अगस्त की सुनवाई में अफसरों को पूरा हिसाब देना होगा। यदि जवाब फिर अधूरा रहा तो लोकायुक्त सख्त कदम उठा सकता है। मामले में और अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। जनता को अब अंतिम कार्रवाई का इंतजार है। कई लोग मानते हैं कि यह मामला बड़े स्तर की जवाबदेही तय करेगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।



ये खबरें भी पढ़िए...



MP में 12 रुपए से कैसे मिटेगा कुपोषण? इतने कम बजट में दाल-चावल खरीदना भी मुश्किल



MP News: सत्तू पैकेट में मिले मरे हुए सांप, आंगनवाड़ी से बच्ची को मिला था पोषण आहार



मध्यप्रदेश में सस्ते बजट में पोषण का दावा, कुपोषण से जंग में सरकारी सिस्टम फेल?



MP में कुपोषण का डरावना चेहरा: एक गिलास दूध 12 रुपए का और बच्चे का पोषण 8 रुपए में?



Tags:
  • MP News
  • मध्यप्रदेश
  • भोपाल
  • केंद्र सरकार
  • पोषण आहार घोटाला
  • महिला एवं बाल विकास विभाग
  • सरकारी योजना
  • ग्रामीण आजीविका मिशन