OBC आरक्षण केस: 16 जून की सुनवाई भी अधर में! नई बेंच में मामला लिस्ट नहीं
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- 16, 17 और 18 जून को तय सुनवाई फिलहाल कॉज लिस्ट में नहीं दिखी।
- एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच में मामला अपेक्षित था।
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को 90 दिनों में फैसला देने का निर्देश दिया था।
- ग्रीष्मकालीन अवकाश के पहले थी फैसला आने की उम्मीद पर मामला लंबित
- ओबीसी वर्ग के अधिवक्ता मेंशनिंग कर मामले को लिस्ट कराने की कोशिश करेंगे।
OBC आरक्षण मामले में अभी खत्म नहीं होगा इंतजार?
मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित और सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले मामलों में शामिल ओबीसी आरक्षण प्रकरण एक बार फिर अधर में लटकता हुआ नजर आ रहा है।
लाखों अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि 16 जून से इस मामले में अंतिम बहस की शुरुआत होगी और लंबे समय से रुकी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लेकिन सोमवार देर शाम तक जारी कॉज लिस्ट ने उम्मीदवारों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। जिस मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, वह फिलहाल नई खंडपीठ की सूची में दिखाई नहीं दिया।
16 जून से लगातार सुनवाई तय थी, लेकिन...
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई 16, 17 और 18 जून को लगातार तीन दिनों तक की जानी थी। यही कारण था कि लाखों अभ्यर्थियों सहित, सामान्य वर्ग संगठनों, ओबीसी वर्ग और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि अब मामले में निर्णायक प्रगति देखने को मिल सकती है।
मंगलवार 16 जून की कॉज लिस्ट में मामला शामिल नहीं होने से एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। खबर लिखे जाने तक एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच में 1040 से अधिक मामले सूचीबद्ध हैं, लेकिन इनमें यह बहुप्रतीक्षित मामला शामिल नहीं था।
बेंच बदलने के बाद बढ़ी अनिश्चितता
दरअसल, जब इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए तीन दिन निर्धारित किए गए थे, तब सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष हो रही थी। बाद में परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हो गए, जबकि जस्टिस विनय सराफ का ट्रांसफर इंदौर खंडपीठ में हो गया। इस मामले को मंगलवार 16 जून को एक्टिंग चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच में लिस्ट किया जाना चाहिए था। लेकिन यह काज़लिस्ट में शामिल नहीं और इसके बाद से यह सवाल बना हुआ है कि मामला नई बेंच के समक्ष कब और किस प्रकार आगे बढ़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे अधिक चर्चा सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश की हो रही है जिसमें हाईकोर्ट को इस मामले में 90 दिनों के भीतर फैसला करने के लिए कहा गया था।
मामले की पिछली या सुनवाई में तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा भी कई बार इस निर्देश का जिक्र कर चुके हैं। लेकिन ओबीसी आरक्षण से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में अंतिम बहस ही पूरी नहीं हो पा रही। अब सुनवाई की प्रक्रिया भी बार-बार प्रभावित होती दिखाई दे रही है।
क्या आखिरी समय में हो सकता है फेरबदल?
कानूनी जानकारों का कहना है कि सामान्यतः कॉज लिस्ट जारी होने के बाद बड़े फेरबदल कम ही होते हैं, लेकिन विशेष परिस्थितियों में संशोधन संभव है।
यदि देर शाम या सुनवाई के दिन किसी प्रकार का परिवर्तन होता है और मामला सूचीबद्ध हो जाता है तो यह ओबीसी आरक्षण से प्रभावित कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर होगी। हालांकि, फिलहाल की स्थिति यही संकेत दे रही है कि सुनवाई एक बार फिर आगे खिसक सकती है।
अधिवक्ता करेंगे मेंशनिंग, निगाहें हाईकोर्ट पर
ओबीसी वर्ग से जुड़े अधिवक्ताओं ने संकेत दिया है कि वे न्यायालय के समक्ष मामले की मेंशनिंग कर इसे शीघ्र सूचीबद्ध कराने का प्रयास करेंगे। ऐसे में अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं।
प्रदेश के लाखों अभ्यर्थी जो कई वर्षों से ओबीसी आरक्षण से जुड़े अंतिम समाधान का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इंतजार खत्म होगा या और बढ़ेगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ओबीसी आरक्षण मामले में लंबा इंतजार अब और बढ़ने वाला है? सुनवाई की तय तारीख सामने होने के बावजूद मामला कॉज लिस्ट में नहीं दिखना नौकरी की आस में बैठे अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा रहा है।
अब नौकरी के इंतजार में बैठे प्रदेश के लाखों युवा इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई कब होगी और वर्षों से लंबित विवाद पर अंतिम फैसला कब सामने आएगा।
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