OBC आरक्षण मामले पर हाईकोर्ट ने तय किया रोडमैप, 15 जुलाई से रोजाना होगी अंतिम सुनवाई

Neel Tiwari | Jun 24, 2026, 16:56 IST
15 जुलाई से रोज होगी OBC आरक्षण केस पर सुनवाई
एमपी के बहुचर्चित OBC आरक्षण मामले में बुधवार को हाईकोर्ट ने आगे की सुनवाई का पूरा कार्यक्रम तय कर दिया। जैसा द सूत्र ने अपने पाठकों को बताया था कि आज इस मामले में सुनवाई नहीं होगी, बल्कि अगली सुनवाई का रोड मैप तय किया जाएगा और हुआ भी वही।

समझें क्या है पूरा मामला

  • ओबीसी आरक्षण मामले की नियमित अंतिम सुनवाई 15 जुलाई से शुरू होगी।
  • जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने तय किया कार्यक्रम।
  • सुनवाई प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे होगी।
  • OBC पक्ष ने 19 फरवरी को मिले स्टे को हटाने की मांग की।
  • हाईकोर्ट ने कहा, मामले की रोजाना सुनवाई कर जल्द फैसला देने का प्रयास किया जाएगा।

24 जून को वही हुआ जो द सूत्र ने बताया था

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को OBC आरक्षण मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान वही स्थिति सामने आई जिसकी जानकारी पहले ही द सूत्र ने अपने पाठकों को दे दी थी।



अदालत ने आज इस मामले पर अंतिम सुनवाई शुरू नहीं की। बल्कि यह तय किया कि आगे की सुनवाई किस प्रकार और किस समय होगी।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध इस बहुचर्चित मामले में सभी पक्षों ने जल्द सुनवाई की मांग रखी। इसके बाद अदालत ने सुनवाई का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित किया।



15 जुलाई से रोजाना सुनवाई

कोर्ट ने पहले इस मामले की नियमित सुनवाई 13 जुलाई से तय करने पर विचार किया था। लेकिन अदालत में लंबित मामलों और आगामी कार्यसूची को देखते हुए नई तारीख 15 जुलाई निर्धारित की गई।



अब इस मामले की सुनवाई 15 जुलाई से प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे होगी। प्रदेशभर में हजारों अभ्यर्थियों और उम्मीदवारों की निगाहें लंबे समय से इस मामले पर टिकी हुई हैं। इसलिए सुनवाई की निश्चित समय-सारिणी तय होने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।



स्टे हटाने की मांग पर भी हुई बहस

सुनवाई के दौरान ओबीसी पक्ष ने स्थगन हटाने का अनुरोध किया। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने यह दलील दी। यह याचिका आशिता दुबे बनाम मध्य प्रदेश शासन से जुड़ी है। सामान्य वर्ग की ओर से विरोध दर्ज किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने आपत्ति जताई। राज्य सरकार ने अंतिम सुनवाई की बात कही। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराजन ने यह जानकारी दी।



27 प्रतिशत आरक्षण पर फैसला जरूरी

ओबीसी पक्ष ने 27 प्रतिशत आरक्षण विवाद उठाया। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। लंबित स्थिति से मानसिक तनाव की बात भी कही गई। उन्होंने 20 अभ्यर्थियों की आत्महत्या का उल्लेख किया। अदालत ने नियमित सुनवाई का आश्वासन दिया। शीघ्र निर्णय का प्रयास करने की बात कही गई।



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अब 15 जुलाई पर टिकी हैं प्रदेश की निगाहें

पिछले कई वर्षों से चर्चा में बने इस मामले में अब एक बार फिर सुनवाई का स्पष्ट और नियमित रोड मैप सामने आया है। प्रदेश के हजारों अभ्यर्थी स्थिति पर नजर रखे हैं। आरक्षण से प्रभावित पक्ष भी निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें 15 जुलाई पर टिकी हैं। उसी दिन अंतिम सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। हाईकोर्ट में बहुचर्चित मामले की आगे सुनवाई होगी।



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