ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में पंडितों के प्रवेश पर रोक, कलेक्टर तक पहुंचा विवाद
मुश्ताक मंसूरी @ खंडवा
समझें क्या है पूरा मामला
- ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह 9 बजे बाद पंडितों का प्रवेश रोका गया।
- सुरक्षा कर्मियों ने टी-पॉइंट पर ही पंडितों को रोक दिया।
- यह आदेश एसडीएम पुनासा पंकज वर्मा के निर्देश पर लागू हुआ बताया गया।
- पंडितों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।
- कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में बुधवार को एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सुबह 9 बजे के बाद पंडितों का प्रवेश रोक दिया गया। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें टी-पॉइंट पर ही रोक दिया। इससे नाराज पंडितों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। मामला अब कलेक्टर तक पहुंच चुका है।
ओंकारेश्वर देशभर के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यहां रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश को लेकर लगी यह रोक बड़ा मुद्दा बन गई है। पंडितों का कहना है कि यह फैसला बिना किसी पूर्व सूचना के लिया गया।
मंदिर परिसर में क्या हुआ
पंडित राधे तिवारी और नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पंडित नवल किशोर शर्मा मंदिर की ओर जा रहे थे। सुबह 9 बजे के बाद टी-पॉइंट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। सुरक्षा कर्मियों ने कहा कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों से यही निर्देश मिला है।
उनके मुताबिक सुबह 9 बजे के बाद किसी भी पंडित को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। आदेश तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। इससे मंदिर परिसर में पंडितों और सुरक्षा कर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया।
किसने दिए ये निर्देश
पंडितों के मुताबिक कंपनी के इंचार्ज तिलोक त्यागी ने ग्रुप में यह संदेश भेजा था। संदेश में साफ लिखा था कि आदेश का पालन नहीं करने पर कर्मचारी की नौकरी भी जा सकती है। पंडितों का यह भी कहना है कि यह व्यवस्था एसडीएम पुनासा पंकज वर्मा के निर्देश पर लागू हुई है।
इससे साफ है कि यह फैसला अचानक नहीं, बल्कि किसी योजना के तहत लिया गया है। हालांकि इस बारे में कोई लिखित आदेश अब तक सामने नहीं आया है। पंडितों का कहना है कि उन्हें सीधे मौखिक तरीके से रोका गया। उनका सवाल है कि इतना बड़ा फैसला बिना लिखित आदेश के कैसे लागू किया जा सकता है।
पंडितों ने रखीं तीन मांगें
इस फैसले से नाराज पंडितों के दल ने प्रशासन के सामने तीन मांगें (Religious Rights) रखीं। पहली मांग है कि अधिकृत पंडितों को मंदिर में बिना रोक-टोक प्रवेश मिले। दूसरी मांग है कि यजमानों के साथ जलाभिषेक की अनुमति फिर से बहाल हो। तीसरी मांग है कि अभिषेक हॉल में पहले जैसी विधिवत पूजा-अर्चना की व्यवस्था शुरू हो।
पंडितों का कहना है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु अक्सर सुबह 9 बजे के बाद भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यह रोक श्रद्धालुओं और पंडितों दोनों के लिए मुश्किल खड़ी करेगी।
मध्यप्रदेश में ओंकारेश्वर मंदिर केपंडितों का मानना है कि यह सिर्फ नियम का मामला नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी से भी जुड़ा है। कई पंडित परिवार पीढ़ियों से मंदिर में पूजा-पाठ का काम करते आ रहे हैं। ऐसे में अचानक लगी रोक से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
कलेक्टर ने दिया आश्वासन
पंडितों ने पूरे मामले की जानकारी फोन पर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता को दी। कलेक्टर ने पंडितों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। उन्होंने जल्द समाधान निकालने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।
Omkareshwara Temple केपंडितों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही स्पष्ट रास्ता निकालेगा। कुछ स्थानीय लोगों ने भी इसे पंडितों की आजीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि प्रशासन को साफ दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। कुछ श्रद्धालुओं ने भी कहा कि इस तरह की रोक से उनके पारंपरिक पूजन में बाधा आएगी। उनका कहना है कि दूर से आने वाले भक्तों के लिए समय की सीमा तय करना ठीक नहीं है।
आगे क्या होगा
फिलहाल प्रशासन और omkareshwar mandirप्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है। लिखित आदेश न होने से पंडितों में असंतोष और बढ़ गया है। अब सबकी नजरें मंदिर ट्रस्ट की अगली बैठक पर टिकी हैं। पंडितों की मांग है कि प्रशासन जल्द स्पष्ट आदेश जारी करे। उनका कहना है कि इससे परंपरा और व्यवस्था दोनों बनी रहेगी। यह देखना अभी बाकी है कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा और पंडितों के अधिकार, दोनों को साधना प्रशासन के लिए चुनौती होगी। पंडितों का कहना है कि जब तक स्पष्ट आदेश नहीं आता, तब तक भ्रम की स्थिति बनी रहेगी। उनकी मांग है कि मंदिर ट्रस्ट जल्द बैठक बुलाकर इस पर फैसला ले। कई पंडितों ने कहा कि परंपरा से चली आ रही व्यवस्था को अचानक बदलना ठीक नहीं है। उनका कहना है कि बदलाव से पहले सभी पक्षों से बात होनी चाहिए थी। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब सबकी नजर टिकी है। इस बीच मंदिर में रोज आने वाले श्रद्धालु भी असमंजस में हैं।
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