'प्यार से दें तो रख लेता हूं' कहने वाले इंजीनियर सस्पेंड, रिश्वत पर बयान देना पड़ा भारी, लोकायुक्त ने की कार्रवाई
उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को उन्हें सस्पेंड कर दिया है। दरअसल, लोकायुक्त ने विभाग के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा था। दोनों कर्मचारी 45 हजार रुपए की रिश्वत ले रहे थे। हालांकि, सी.बी. अहिरवार खुद रिश्वत लेते नहीं पकड़े गए थे। उन पर कार्रवाई सिर्फ उनके वायरल बयान की वजह से हुई है।
क्या है पूरा मामला?
पन्ना के जल संसाधन विभाग में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया था। ग्वालियर के ठेकेदार गौरव तोमर ने लोकायुक्त सागर से शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उनके निर्माण कार्य का अंतिम भुगतान अटका हुआ था।
यह काम मझगांय मध्यम परियोजना के कैनाल स्लूस निर्माण से जुड़ा था। आरोप था कि भुगतान करने के बदले रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई थी।
इसके बाद टीम ने कार्रवाई कर दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा था। इस लोकायुक्तकार्रवाई के बाद विभाग के कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं।
45 हजार रुपए लेते पकड़े गए दो कर्मचारी
सागर लोकायुक्त की टीम ने दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा था। इनमें संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार शामिल थे। दूसरे कर्मचारी सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक थे।
दीपक सिंह परमार को 15 हजार रुपए लेते पकड़ा गया था। वहीं, अरविंद कुमार पाठक 30 हजार रुपए लेते पकड़े गए थे। दोनों के पास से कुल 45 हजार रुपए बरामद हुए थे।
यह पैसा एक ठेकेदार के निर्माण कार्य से जुड़ा था। ठेकेदार को अपने काम का आखिरी भुगतान मिलना था। इसी भुगतान के बदले रिश्वत लेने की बात सामने आई थी।
हालांकि, कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार रिश्वत लेते नहीं पकड़े गए थे।
मीडिया के सामने क्या बोले थे अहिरवार?
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मीडिया ने सी.बी. अहिरवार से बात की थी। इस दौरान अहिरवार ने कहा कि रिश्वत मांगना गलत है। उन्होंने बताया कि उनका कोई फिक्स कमीशन या प्रतिशत नहीं है।
लेकिन कोई खुशी से कुछ देता है, तो वे रख लेते हैं। उनका यही बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था। वीडियो सामने आते ही उनके बयान पर सवाल उठने लगे थे। ये मामला जल संसाधन विभाग और राज्य सरकार तक भी पहुंच गया है।
सरकार ने अहिरवार को क्यों किया सस्पेंड?
जल संसाधन विभाग ने अहिरवार के बयान पर आपत्ति जताई है। विभाग के मुताबिक, उनका बयान सरकारी कर्मचारी के नियमों के खिलाफ था। सरकार ने इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का उल्लंघन माना है। विभाग ने उनके बयान को अनुशासनहीनता और गलत व्यवहार बताया था।
इसके बाद 30 अक्टूबर 2026 को निलंबन का आदेश जारी हुआ। इस आदेश के तहत अहिरवार को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन के दौरान उन्हें भोपाल में रहना होगा। उनका मुख्यालय जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में रहेगा।
रिश्वत मामले में अहिरवार की क्या भूमिका थी?
इस रिश्वत मामले में अहिरवार की भूमिका अलग थी। लोकायुक्त ने ठेकेदार की शिकायत पर कार्रवाई की थी। इस दौरान विभाग के दो कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए थे। लेकिन अहिरवार को रिश्वत लेते नहीं पकड़ा गया था। उनके खिलाफ कार्रवाई मीडिया में दिए बयान के कारण हुई थी। इसलिए 45 हजार रुपए की रिश्वत लेने वाली बात गलत है।
अब आगे क्या होगा?
निलंबन के बाद अहिरवार का मुख्यालय भोपाल तय कर दिया गया है। हालांकि, उनके खिलाफ आगे कब कार्रवाई होगी, यह अभी साफ नहीं है। विभागीय जांच कब शुरू होगी, इसकी भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल विभाग ने सिर्फ उनके निलंबन का आदेश जारी किया है।
FAQ
- सी.बी. अहिरवार को क्यों सस्पेंड किया गया?
सी.बी. अहिरवार को उनके द्वारा मीडिया में दिए गए बयान के कारण सस्पेंड किया गया है, जिसे सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का उल्लंघन माना है। - इंजीनियर सी.बी. अहिरवार ने रिश्वत को लेकर क्या कहा था?
अहिरवार ने कहा था कि रिश्वत मांगना गलत है, लेकिन अगर कोई खुशी से या प्यार से कुछ देता है, तो वे उसे रख लेते हैं। - क्या लोकायुक्त ने सी.बी. अहिरवार को रिश्वत लेते पकड़ा था?
नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त ने अहिरवार को रिश्वत लेते नहीं पकड़ा था। उनका निलंबन मीडिया में दिए गए बयान के कारण हुआ है।