धान बर्बादी मामला: वेयरहाउस की निगरानी करने वाले नगायच की नाक के नीचे बड़ी लापरवाही
समझें क्या है पूरा मामला...
- पन्ना में खुले में सड़ गया हजारों क्विंटल सरकारी धान।
- नगायच के गृह जिले में ही निकली बड़ी लापरवाही।
- बारिश में भीगकर बर्बाद हुआ किसानों का धान।
- गोदाम तक नहीं पहुंचा धान, बोरियों में उग आए पौधे।
- जीतू पटवारी का वेयर हाउस चेक करने वालों की अपनी लापरवाही।
पन्ना जिले में हजारों क्विंटल धान खुले में रखा गया था। लगातार बारिश से यह धान पूरी तरह भीग गया। भीगे हुए धान में अब पौधे तक उग आए हैं। यह लापरवाही वेयर हाउस कॉरपोरेशन अध्यक्ष संजय नगायच के गृह जिले में सामने आई है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
धान से उगे पौधे, प्रशासन पर सवाल
मध्य प्रदेश वेयर हाउस कॉरपोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच बीते कुछ महीनों से लगातार चर्चा में हैं। पद संभालने के बाद से वह अलग-अलग गोदामों का निरीक्षण कर रहे हैं। कुछ समय पहले उन्होंने जीतू पटवारी से जुड़े वेयर हाउस का भी दौरा किया था। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था।
अब उन्हीं के गृह जिले पन्ना से एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे रखा रह गया। समय पर यह धान गोदाम तक नहीं पहुंचाया गया। बारिश की वजह से यह पूरी तरह खराब हो गया।
बड़ागांव और लक्ष्मीपुर में लापरवाही
यह लापरवाही पन्ना जिले के बड़ागांव और लक्ष्मीपुर खरीदी केंद्रों में सामने आई है। इन दोनों केंद्रों पर किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदा गया था। खरीदी के बाद धान को सुरक्षित रखना विभाग की जिम्मेदारी थी।
लेकिन धान को गोदाम तक पहुंचाने के बजाय खुले में ही छोड़ दिया गया। कई दिनों तक यह धान बारिश की मार झेलता रहा। नतीजा यह हुआ कि हजारों क्विंटल धान पूरी तरह बर्बाद हो गया।
बोरियों में उग आए हरे पौधे
स्थानीय लोगों के मुताबिक धान इतनी देर तक भीगा रहा कि उसमें से अंकुरण शुरू हो गया। बोरियों के अंदर ही हरे पौधे उग आए। तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला तेजी से फैल गया।
यह धान सरकारी पैसे से किसानों से खरीदा गया था। इसका सीधा नुकसान अब सरकारी खजाने को उठाना पड़ रहा है। कई लाख रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों ने दिए जांच के निर्देश
मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। खाद्य विभाग और वेयर हाउस कॉरपोरेशन दोनों जांच की बात कह रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर धान उठाया जाता तो यह नुकसान टल सकता था। बारिश शुरू होने से पहले भी धान को गोदाम में नहीं रखा गया। इसी वजह से यह पूरी बर्बादी हुई।
जिम्मेदारी को लेकर उठे सवाल
धान की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीधे तौर पर वेयर हाउस कॉरपोरेशन (Warehouse Corporation – सरकारी भंडारण संस्था) और खाद्य विभाग की थी। दोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी नजर आ रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी। किसानों की मेहनत से उगाया गया धान सिर्फ लापरवाही की वजह से बर्बाद हो गया। आम जनता के टैक्स के पैसों का भी इसमें सीधा नुकसान हुआ है।
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