पटौदी परिवार की 15,000 करोड़ की संपत्ति पर सरकार करेगी कब्जा
भोपाल में नवाब मंसूर अली खां पटौदी और उनके परिवार की 15,000 करोड़ रुपए की संपत्ति पर सरकार का कब्जा होने की संभावना बढ़ गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर) ने शत्रु संपत्ति अधिनियम (Enemy Property Act) के तहत इस मामले में चल रहे स्टे को हटा दिया है। कोर्ट ने पटौदी परिवार को 30 दिन के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष पक्ष रखने का आदेश दिया था।
शत्रु संपत्ति अधिनियम क्या है?
1968 में बनाए गए शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत, विभाजन के बाद पाकिस्तान या चीन जाने वाले भारतीय नागरिकों की संपत्तियों को भारत सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है।
भोपाल रियासत की स्थिति:
भोपाल की ऐतिहासिक संपत्तियों को नवाब हमीदुल्लाह खान की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान का वारिस माना गया। चूंकि वह पाकिस्तान चली गई थीं, इसलिए यह संपत्ति शत्रु संपत्ति अधिनियम के दायरे में आती है।
नवाब परिवार की संपत्तियां कहां-कहां हैं?
सरकारी कार्रवाई की तैयारी
भोपाल के कलेक्टर ने बताया कि इन संपत्तियों की सर्वे प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यदि सरकारी जमीन पाई जाती है, तो इसे शत्रु संपत्ति घोषित कर कब्जे में लिया जाएगा।
विवादित संपत्ति का क्या होगा?
बेची गई संपत्तियां: 80% संपत्तियां पहले ही बेची जा चुकी हैं, जिन पर मकान बने हैं।
अवैध निर्माण: करीब 100 एकड़ की जमीन पर 1.5 लाख लोग रह रहे हैं। कोर्ट के आदेश के बाद ये सभी निर्माण अवैध हो चुके हैं।
आगे की कानूनी स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के 2019 के आदेश के मुताबिक, शत्रु संपत्तियां उत्तराधिकारियों के बीच बांटी जाएंगी। आबिदा सुल्तान के हिस्से की संपत्ति शत्रु संपत्ति मानी जाएगी।
FAQ
- शत्रु संपत्ति अधिनियम क्या है?
यह 1968 का कानून है, जिसके तहत पाकिस्तान या चीन जाने वाले लोगों की भारत में छोड़ी गई संपत्ति पर सरकार का हक होता है। - पटौदी परिवार की संपत्तियां कितनी हैं?
भोपाल, गुरुग्राम और अन्य स्थानों पर उनकी 15,000 करोड़ रुपए की संपत्ति है। - क्या सरकार इन संपत्तियों को कब्जे में ले सकती है?
हाई कोर्ट का स्टे हटने के बाद, सरकार कानूनी रूप से इन संपत्तियों को कब्जे में ले सकती है। - क्या इन संपत्तियों पर रह रहे लोग बेदखल होंगे?
सरकार का अगला कदम इन संपत्तियों का सर्वे और बेदखली की कार्रवाई हो सकती है। - नवाब परिवार ने अभी तक क्या किया है?
पटौदी परिवार ने अभी तक अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष कोई दावा नहीं किया है।
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