रिटायर्ड आईएएस जेएन कंसोटिया ने शेयर की 25 साल पुरानी चिट्ठी, सोशल मीडिया पर हो गई वायरल
News In Short
- साल 2001 में रिटायर्ड IAS अफसर जेएन कंसोटिया राजगढ़ जिले के कलेक्टर थे।
- उन्हें एक पोस्टकार्ड मिला जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन की जाति पर सवाल उठाया गया था।
- पोस्टकार्ड में पूछा गया था कि शूद्र होने पर नारायणन राष्ट्रपति कैसे बन सकते हैं।
- यह घटना समाज में आज भी मौजूद जातिवादी सोच को उजागर करती है।
- कंसोटिया ने इस किस्से को साझा कर समाज में बदलाव की जरूरत बताई।
News In Detail
एक पोस्टकार्ड जिसने हिला दिया
साल 2001 की बात है। जेएन कंसोटिया उन दिनों राजगढ़ जिले के कलेक्टर थे। एक दिन उनके दफ्तर में एक साधारण सा पोस्टकार्ड आया, लेकिन उस पर लिखा सवाल बिल्कुल साधारण नहीं था। पोस्टकार्ड पर लिखा था कि केआर नारायणन शूद्र हैं, तो वह राष्ट्रपति कैसे बन सकते हैं? यह पढ़कर कंसोटिया कुछ देर के लिए रुक गए। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि कोई ऐसा सोच भी सकता है।
केआर नारायणन: एक महान शख्सियत
केआर नारायणन यानी कोचेरिल रामन नारायणन भारत के 10वें राष्ट्रपति थे। वे 1997 से 2002 तक इस पद पर रहे। वे दलित समाज से आने वाले पहले राष्ट्रपति थे। उनकी पूरी जिंदगी संघर्ष, पढ़ाई और देश सेवा की मिसाल रही। ऐसे इंसान के बारे में जाति के आधार पर सवाल उठाना, यह समाज की एक कड़वी सच्चाई को सामने लाता है।
जातिवाद की सोच आज भी जिंदा है
रिटायर्ड आईएएस जेएन कंसोटिया ने आज उस चिट्ठी को सार्वजनिक किया और लिखा कि यह पोस्टकार्ड सिर्फ एक चिट्ठी नहीं था। यह उस मानसिकता का आईना था जो आज भी हमारे समाज में कहीं न कहीं मौजूद है। उनके मुताबिक, जब कोई इंसान अपनी मेहनत और काबिलियत से ऊंचाई तक पहुंचता है, तो उसे उसकी जाति के नजरिए से देखना गलत है। यह सोच उस इंसान की तरक्की को नहीं, बल्कि हमारी संकीर्ण मानसिकता को दिखाती है।
समाज में बदलाव की जरूरत
रिटायर्ड IAS जेएन कंसोटिया ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उस पोस्टकार्ड को देखकर मुझे एहसास हुआ कि हमें समाज में बदलाव लाने की जरूरत है। हर इंसान को उसकी काबिलियत के आधार पर इज्जत मिलनी चाहिए, न कि उसकी जाति के आधार पर। उनकी यह बात सोचने पर मजबूर करती है कि हम आजादी के इतने सालों बाद भी कहां खड़े हैं।
बदलाव की जरूरत क्यों जरूरी है
जातिवाद सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है। यह शहरों, दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों में भी दिखता है। किसी को उसकी जाति की वजह से कम आंकना, यह उसकी तौहीन है और समाज की कमजोरी भी। कंसोटिया का मानना है कि शिक्षा और जागरुकता ही इस सोच को बदल सकती है। जब हम किसी को उसके काम से पहचानेंगे, तभी असली तरक्की होगी।
वह पोस्टकार्ड आज भी सवाल करता है
25 साल बाद भी वह पोस्टकार्ड उतना ही जरूरी है जितना तब था। वह एक छोटा सा कागज था, लेकिन उसने एक बड़ा सवाल खड़ा किया था। क्या हम आज भी किसी इंसान को उसकी जाति से पहचानते हैं? यह सवाल हम सबसे है। जवाब हमें खुद ढूंढना होगा।
FAQ
- क्या केआर नारायणन सच में दलित समाज से थे?
हां, केआर नारायणन (Kocheril Raman Narayanan) केरल के एक दलित परिवार से आते थे। वे बेहद गरीबी में पले-बढ़े लेकिन अपनी पढ़ाई और मेहनत के दम पर IFS (Indian Foreign Service) अधिकारी बने, फिर राजनेता और अंततः भारत के 10वें राष्ट्रपति बने। वे 1997 से 2002 तक राष्ट्रपति रहे। उनका जीवन इस बात का सबूत है कि जाति नहीं, काबिलियत ही असली पहचान होती है। - IAS कंसोटिया को पोस्टकार्ड कब और कहां मिला था?
यह घटना साल 2001 की है, जब जेएन कंसोटिया मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के कलेक्टर थे। उनके दफ्तर में एक पोस्टकार्ड आया जिसमें राष्ट्रपति केआर नारायणन की जाति पर आपत्तिजनक सवाल उठाया गया था। कंसोटिया ने इस किस्से को बाद में सार्वजनिक किया ताकि समाज में जातिवाद के खिलाफ जागरूकता फैले। - कौन हैं रिटायर्ड आईएएस जेन कंसोटिया?
जेएन कंसोटिया मध्यप्रदेश कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। उनकी प्रशासनिक सेवा करीब तीन दशकों तक रही। उन्होंने अपनी सेवा SDM स्तर से शुरू की। इसके बाद वे जिला कलेक्टर बने और कई जिलों में काम किया। राजगढ़ जिले में वे 2001 में कलेक्टर के पद पर तैनात थे। धीरे-धीरे वे Commissioner, Principal Secretary और फिर ACS (Additional Chief Secretary) के पद तक पहुंचे। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने DG RCVP (Rajmata Vijayaraje Scindia Krishi Vishwa Vidyalaya) और ACS Home जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी भी संभाली। ये दोनों पद मध्यप्रदेश शासन में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अजाक्स के बड़े नेता जेएन कंसोटिया सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ उनके अनुभव और विचार चर्चा में रहते हैं। वे लंबे समय तक SC-ST कर्मचारियों के संगठन अजाक्स के अध्यक्ष रह चुके हैं।
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