मंत्री प्रतिमा बागरी का कास्ट सर्टिफिकेट विवाद: छानबीन समिति में आज होगा फैसला

Amresh Kushwaha | Jul 05, 2026, 10:15 IST
मंत्री प्रतिमा बागरी का कास्ट सर्टिफिकेट विवाद
मध्य प्रदेश की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद पर आज छानबीन समिति फैसला करेगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद होने वाली इस बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मंत्री प्रतिमाबागरी सोमवार कोछानबीन समिति केसामने पेश होंगी।
  • बैठक सुबह 11 बजेहोनी तय है।
  • उनके जाति प्रमाणपत्रको लेकर विवादचल रहा है।
  • शुरुआती दस्तावेजउनके पक्ष मेंबताए जा रहे हैं।
  • इससे पहलेराज्यमंत्री गौतम टेटवालको भी क्लीनचिट मिली थी।

मंत्री प्रतिमा बागरी का कास्ट सर्टिफिकेट विवाद

मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के लिए आज यानी सोमवार, 06 जुलाई का दिन बड़ा है। वे अपने कास्ट सर्टिफिकेट विवाद के मामले में छानबीन समिति के सामने पेश होंगी। यह बैठक सुबह 11 बजे प्रस्तावित है। सूत्रों के मुताबिक समिति के सामने रखे जाने वाले शुरुआती दस्तावेज उनके पक्ष में हैं। इससे उन्हें राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।



बताया जा रहा है कि इन दस्तावेजों में फैमिली ट्री भी शामिल है। इस फैमिली ट्री में कुछ अहम तथ्य दर्ज हैं। इनके मुताबिक उनके परिवार के सदस्य पहले भी विधायक और मंत्री रह चुके हैं। ये सीटें अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) वर्ग के लिए आरक्षित थीं। यदि समिति उन्हें क्लीन चिट दे देती है तो यह उनके लिए बड़ी राहत होगी। इसके साथ ही वे मोहन सरकार में दूसरी मंत्री बन जाएंगी जिन्हें ऐसी राहत मिली हो।



पहले भी मिली है ऐसी राहत

यह पहला मामला नहीं है जब किसी मंत्री को छानबीन समिति से राहत मिली हो। इससे पहले राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के मामले में भी ऐसा हुआ था। उन्हें भी छानबीन समिति से क्लीन चिट मिल चुकी है। हालांकि उनका मामला यहीं खत्म नहीं हुआ था। बाद में उनके क्लीन चिट को अदालत में चुनौती दी गई। टेटवाल के मामले में शिकायतकर्ता ने इंदौर हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है। इस मामले में अंतिम सुनवाई 21 जुलाई को तय है। यानी टेटवाल का मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है।



इस उदाहरण को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि छानबीन समिति से राहत मिलना अंतिम फैसला नहीं होता। अगर कोई पक्ष असंतुष्ट रहता है तो वह अदालत जा सकता है। प्रतिमा बागरी के मामले में भी ऐसा हो सकता है।



कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

अब सवाल यह है कि प्रतिमा बागरी का यह विवाद कैसे शुरू हुआ था। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने इस पर शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान प्रतिमा बागरी ने जो कास्ट सर्टिफिकेट दिया, वह सही नहीं है।



प्रदीप अहिरवार का दावा है कि सतना क्षेत्र की अनुसूचित जाति सूची में बागरी समुदाय का नाम नहीं है। उनका कहना है कि प्रतिमा बागरी असल में राजपूत या ठाकुर समुदाय से आती हैं। यदि यह सच है तो वे सामान्य वर्ग से मानी जाएंगी। ऐसी स्थिति में आरक्षित सीट से चुनाव लड़ना नियमों के खिलाफ होगा। यही अहिरवार का मुख्य आरोप है।



यह शिकायत पहले छानबीन समिति के पास पहुंची थी। वहीं, वहां कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया। मामला लंबे समय तक अटका रहा। इसके बाद प्रदीप अहिरवार ने इंदौर हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने अदालत से जल्द फैसला लेने की मांग की।



हाईकोर्ट में क्या हुआ

प्रदीप अहिरवार की याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई की। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले का जल्द निपटारा किया जाए। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद से छानबीन समिति की कार्रवाई पर सभी की नजर है। यही वजह है कि सोमवार की बैठक इतनी अहम मानी जा रही है।



छानबीन समिति के सामने अब दोनों पक्षों की बात रखी जाएगी। प्रतिमा बागरी अपने दस्तावेज पेश करेंगी। इन दस्तावेजों में उनके परिवार का इतिहास भी शामिल होगा। समिति इन दस्तावेजों की जांच करेगी। इसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।



आगे क्या हो सकता है

अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उससे लगता है कि प्रतिमा बागरी को राहत मिल सकती है। वहीं, गौतम टेटवाल के मामले से यह भी साफ है कि यह अंतिम फैसला नहीं होगा। वहीं, शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं होते तो वे भी अदालत जा सकते हैं। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और आगे बढ़ सकता है।



राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। कास्ट सर्टिफिकेट से जुड़े मामले हमेशा संवेदनशील रहे हैं। ऐसे मामलों का असर सीधे चुनाव और सामाजिक न्याय से जुड़ा होता है। इसलिए हर फैसले पर बारीकी से नजर रखी जाती है। सोमवार की बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।



जानें कौन हैं मंत्री प्रतिमा बागरी

37 वर्षीय प्रतिमा बागरी की राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। ग्रेजुएट शिक्षित प्रतिमा ने 2024 के विधानसभा चुनाव में सतना जिले की रैगांव सीट से 36 हजार 060 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।



उन्होंने कांग्रेस की कल्पना वर्मा को शिकस्त दी थी। हालांकि, इससे पहले 2021 के उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। फिलहाल वे नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं, लेकिन हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश ने उनके राजनीतिक भविष्य पर एक सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।



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